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पर्यावरण, प्रदूषण एवं जैव विविधता

By ExamAtlas · 29/8/2026

पर्यावरण, प्रदूषण एवं जैव विविधता

यह विषय 1 से 2 प्रश्न देता है और इसमें बिहार से जुड़े तथ्य भी आते हैं, इसलिए राज्य के पत्र में इसकी उपयोगिता दोहरी है। पारिस्थितिक तंत्र, प्रदूषण के प्रकार और संरक्षण की दो विधियाँ — तीनों में परिभाषा स्तर के प्रश्न बनते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र एवं आहार शृंखला

किसी क्षेत्र के जैविक और अजैविक घटक मिलकर पारिस्थितिक तंत्र बनाते हैं। जैविक में पौधे, जंतु और सूक्ष्मजीव आते हैं; अजैविक में वायु, जल, मिट्टी और प्रकाश।

  1. उत्पादक — हरे पौधे, जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
  2. प्राथमिक उपभोक्ता — शाकाहारी, जैसे हिरण, गाय।
  3. द्वितीयक उपभोक्ता — माँसाहारी, जैसे साँप, लोमड़ी।
  4. अपघटक — जीवाणु और कवक, जो मृत पदार्थ को वापस मिट्टी में मिलाते हैं।

आहार शृंखला हमेशा उत्पादक से शुरू होती है, क्योंकि ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है और उसे केवल हरे पौधे ग्रहण कर सकते हैं। ऊर्जा का प्रवाह एकदिश होता है और हर स्तर पर घटता जाता है।

आहार शृंखला उपभोक्ता से शुरू होती है  |   वह हमेशा उत्पादक यानी हरे पौधों से शुरू होती है

प्रदूषण एवं जलवायु

प्रकारमुख्य कारणप्रभाव
वायु प्रदूषणवाहन, उद्योग, परालीश्वास रोग, धुंध
जल प्रदूषणऔद्योगिक अपशिष्ट, मलजलजनित रोग
मृदा प्रदूषणरासायनिक उर्वरक, कीटनाशकउर्वरता में कमी
ध्वनि प्रदूषणवाहन, लाउडस्पीकरश्रवण एवं तनाव संबंधी समस्या

ग्रीनहाउस गैसें — कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड — पृथ्वी की ऊष्मा को रोक लेती हैं, जिससे वैश्विक तापन होता है। ओज़ोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाती है और क्लोरोफ़्लोरो कार्बन उसे क्षति पहुँचाते हैं। दोनों को आपस में गड्डमड्ड मत कीजिए — यही सबसे आम भूल है।

संरक्षण: स्वस्थाने एवं बहिःस्थाने

विधिअर्थउदाहरण
स्वस्थानेप्राकृतिक आवास में ही संरक्षणराष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य
बहिःस्थानेआवास से बाहर संरक्षणचिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक

भेद का सूत्र सरल है — जीव अपने घर में रहे तो स्वस्थाने, बाहर ले जाया जाए तो बहिःस्थाने। यह जोड़ा सीधे पूछा जाता है।

बिहार के संरक्षित क्षेत्र

  • वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान — पश्चिम चंपारण; बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और देश का 18वाँ बाघ अभयारण्य।
  • विक्रमशिला गांगेय डॉल्फ़िन अभयारण्य — भागलपुर; 1991 में अधिसूचित, गंगा के लगभग 60 किमी हिस्से में।
  • गंगेय डॉल्फ़िन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है।

बिहार वाला हिस्सा छोटा है पर तयशुदा है — एक राष्ट्रीय उद्यान, एक डॉल्फ़िन अभयारण्य, और गंगेय डॉल्फ़िन का राष्ट्रीय जलीय जीव होना। तीनों एक साथ याद कीजिए।

TRE संकेत: स्वस्थाने बनाम बहिःस्थाने का जोड़ा तय प्रश्न है — घर में या घर से बाहर। ओज़ोन क्षय और वैश्विक तापन अलग-अलग समस्याएँ हैं, इन्हें मिलाना सबसे आम भूल है। बिहार में वाल्मीकि एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और गंगेय डॉल्फ़िन राष्ट्रीय जलीय जीव दो तय तथ्य हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • पारिस्थितिक तंत्र जैविक और अजैविक घटकों से बनता है।
  • आहार शृंखला हमेशा उत्पादक से शुरू होती है; ऊर्जा प्रवाह एकदिश है।
  • अपघटक मृत पदार्थ को वापस मिट्टी में मिलाते हैं।
  • ग्रीनहाउस गैसें वैश्विक तापन करती हैं; CFC ओज़ोन परत को क्षति पहुँचाते हैं।
  • स्वस्थाने संरक्षण प्राकृतिक आवास में, बहिःस्थाने उससे बाहर।
  • वाल्मीकि बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान; गंगेय डॉल्फ़िन राष्ट्रीय जलीय जीव।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वस्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण में क्या अंतर है?

स्वस्थाने संरक्षण में जीव को उसके प्राकृतिक आवास में ही बचाया जाता है, जैसे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य। बहिःस्थाने संरक्षण में उसे आवास से बाहर ले जाकर बचाया जाता है, जैसे चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान और बीज बैंक।

ओज़ोन क्षय और वैश्विक तापन एक ही समस्या है?

नहीं, दोनों अलग हैं। वैश्विक तापन ग्रीनहाउस गैसों के कारण होता है, जो पृथ्वी की ऊष्मा रोक लेती हैं। ओज़ोन क्षय क्लोरोफ़्लोरो कार्बन के कारण होता है और उससे पराबैंगनी किरणों से मिलने वाली सुरक्षा घटती है। कारण और प्रभाव दोनों भिन्न हैं।

आहार शृंखला उत्पादक से ही क्यों शुरू होती है?

क्योंकि ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है और उसे रासायनिक ऊर्जा में केवल हरे पौधे बदल सकते हैं। उपभोक्ता अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, इसलिए वे उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि शृंखला हमेशा पौधों से आरंभ होती है।

भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौन है?

गंगेय डॉल्फ़िन, जिसके संरक्षण के लिए भागलपुर में विक्रमशिला गांगेय डॉल्फ़िन अभयारण्य बनाया गया है। यह अभयारण्य 1991 में अधिसूचित हुआ और गंगा के लगभग साठ किलोमीटर हिस्से में फैला है, इसलिए बिहार के पत्र में यह तथ्य महत्वपूर्ण है।