यूरोपीय आगमन एवं ब्रिटिश सत्ता का विस्तार
यूरोपीय आगमन एवं ब्रिटिश सत्ता का विस्तार
यह अध्याय आधुनिक भारत की शुरुआत है और इससे प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — कौन-सी यूरोपीय कंपनी पहले आई, तीन निर्णायक युद्ध कब हुए, और अंग्रेज़ों ने विस्तार के लिए कौन-से तरीके अपनाए। तीनों को क्रम से देखिए।
यूरोपीय कंपनियाँ
| कंपनी | आगमन | पहली बस्ती |
|---|---|---|
| पुर्तगाली | 1498 में वास्को द गामा | कोच्चि, गोवा |
| डच | 1602 | पुलिकट, मसूलीपट्टनम |
| अंग्रेज़ | 1600 में कंपनी की स्थापना | सूरत, मद्रास |
| डेनिश | 1616 | ट्रांकोबार |
| फ़्रांसीसी | 1664 | पांडिचेरी, चंद्रनगर |
पुर्तगाली सबसे पहले आए और सबसे बाद तक रहे — वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा और गोवा 1961 तक पुर्तगाली अधिकार में रहा। यह तथ्य परीक्षा में बार-बार आता है।
अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई और उसे महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम से व्यापार का अधिकार पत्र मिला। भारत में उसका पहला कारख़ाना सूरत में लगा।
तीन निर्णायक युद्ध
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| प्लासी | 1757 | सिराजुद्दौला की पराजय; बंगाल पर नियंत्रण |
| बक्सर | 1764 | संयुक्त सेना की पराजय; दीवानी अधिकार |
| तृतीय पानीपत | 1761 | मराठों की पराजय; प्रतिद्वंद्वी कमज़ोर |
प्लासी में जीत सैन्य शक्ति से अधिक मीर जाफ़र के विश्वासघात से मिली, इसलिए उसे युद्ध से अधिक एक सौदा कहा जाता है। बक्सर असली निर्णायक युद्ध था, क्योंकि वहाँ बंगाल का नवाब, अवध का नवाब और मुगल सम्राट तीनों मिलकर भी हार गए।
बक्सर के बाद 1765 की इलाहाबाद संधि से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी यानी राजस्व वसूलने का अधिकार मिल गया। यही वह क्षण है जहाँ से कंपनी व्यापारी से शासक बनी।
✗ प्लासी का युद्ध ब्रिटिश सत्ता का निर्णायक क्षण था | ✓ निर्णायक युद्ध बक्सर था, क्योंकि उसी के बाद कंपनी को दीवानी अधिकार मिला और वह वैध शासक बनी
विस्तार के साधन
- सहायक संधि — लॉर्ड वेलेजली की व्यवस्था, जिसमें देशी राज्य को अंग्रेज़ी सेना रखनी और उसका खर्च देना पड़ता था।
- व्यपगत सिद्धांत — लॉर्ड डलहौज़ी की नीति, जिसमें दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी न मानकर राज्य हड़प लिया जाता था।
- कुशासन का आरोप — जिसके आधार पर अवध को 1856 में मिला लिया गया।
- सीधा युद्ध — मैसूर, मराठा और सिख युद्धों के रूप में।
व्यपगत सिद्धांत से झाँसी, सतारा, नागपुर और संबलपुर जैसे राज्य हड़पे गए, और यही आगे चलकर 1857 के विद्रोह का एक बड़ा कारण बना।
बंगाल और बिहार में द्वैध शासन
दीवानी मिलने के बाद रॉबर्ट क्लाइव ने द्वैध शासन शुरू किया, जिसमें राजस्व वसूलने का अधिकार कंपनी के पास था और प्रशासन तथा कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी नवाब पर। यानी शक्ति एक के पास और उत्तरदायित्व दूसरे पर।
इसका परिणाम भयावह रहा। 1770 का बंगाल का अकाल, जिसमें बंगाल और बिहार की बड़ी आबादी मारी गई, इसी अव्यवस्था से जुड़ा है। अंततः 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने द्वैध शासन समाप्त किया।
इस अध्याय में 1757, 1764, 1765 और 1772 — ये चार तिथियाँ एक कहानी बनाती हैं। प्लासी से पैर जमे, बक्सर से जीत पक्की हुई, इलाहाबाद संधि से अधिकार मिला और 1772 में सीधा शासन शुरू हुआ।
TRE संकेत: बक्सर का युद्ध और दीवानी अधिकार सबसे अधिक पूछा जाता है। व्यपगत सिद्धांत डलहौज़ी और सहायक संधि वेलेजली की जोड़ी भी तयशुदा है। पुर्तगाली पहले आए और बाद तक रहे भी सीधे पूछा गया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा।
- अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई।
- प्लासी का युद्ध 1757 और बक्सर का 1764 में हुआ।
- 1765 की इलाहाबाद संधि से कंपनी को दीवानी अधिकार मिला।
- सहायक संधि वेलेजली और व्यपगत सिद्धांत डलहौज़ी की नीति थी।
- द्वैध शासन 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने समाप्त किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्लासी नहीं, बक्सर निर्णायक युद्ध क्यों माना जाता है?
प्लासी में जीत मुख्यतः मीर जाफ़र के विश्वासघात से मिली और वहाँ केवल बंगाल का नवाब पराजित हुआ। बक्सर में बंगाल का नवाब, अवध का नवाब और मुगल सम्राट तीनों मिलकर भी हारे, और उसके बाद कंपनी को दीवानी अधिकार मिला। इसी से वह व्यापारी से वैध शासक बनी।
व्यपगत सिद्धांत क्या था?
यह लॉर्ड डलहौज़ी की नीति थी, जिसके अनुसार यदि किसी देशी शासक का अपना कोई पुत्र न हो तो उसका दत्तक पुत्र उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा और राज्य कंपनी में मिला लिया जाएगा। इससे झाँसी, सतारा, नागपुर और संबलपुर हड़पे गए, और यह 1857 के विद्रोह का एक बड़ा कारण बना।
द्वैध शासन में समस्या क्या थी?
उसमें शक्ति और उत्तरदायित्व अलग-अलग हाथों में थे। राजस्व वसूलने का अधिकार कंपनी के पास था, पर प्रशासन और कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी नवाब पर। इससे किसी की जवाबदेही नहीं बची, वसूली कठोर हो गई और 1770 के भीषण अकाल में उसका सबसे बुरा परिणाम सामने आया।
पुर्तगालियों का भारत में क्या महत्व है?
वे यूरोपीय शक्तियों में सबसे पहले आए और सबसे बाद तक रहे। वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा और गोवा 1961 तक उनके अधिकार में रहा। उन्होंने समुद्री व्यापार पर नियंत्रण की नीति चलाई और भारत में तंबाकू, आलू तथा मिर्च जैसी कई फ़सलें भी उन्हीं के साथ आईं।
