उत्सर्जन एवं नियंत्रण-समन्वय
उत्सर्जन एवं नियंत्रण-समन्वय
यह भाग तीन अलग तंत्रों को जोड़ता है, पर परीक्षा में प्रश्न सीमित और तय हैं — वृक्क की इकाई का नाम, प्रतिवर्ती क्रिया का अर्थ, और कौन-सा हार्मोन किस ग्रंथि से निकलता है। इन तीनों को अलग-अलग तालिका बनाकर याद कीजिए।
मनुष्य में उत्सर्जन
शरीर से नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट निकालने की क्रिया उत्सर्जन कहलाती है और इसका मुख्य अंग वृक्क है। मनुष्य में दो वृक्क होते हैं और उनकी संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई नेफ़्रॉन कहलाती है।
वृक्क रक्त को छानकर यूरिया, अतिरिक्त जल और लवण अलग कर देते हैं, जो मूत्र के रूप में बाहर आते हैं। यूरिया वास्तव में यकृत में बनता है और रक्त द्वारा वृक्क तक पहुँचता है — यह बारीकी परीक्षा में पूछी जाती है।
- त्वचा पसीने के रूप में जल और लवण बाहर करती है।
- फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प निकालते हैं।
- दोनों वृक्क खराब होने पर अपोहन यानी डायलिसिस से रक्त साफ़ किया जाता है।
✗ यूरिया वृक्क में बनता है | ✓ यूरिया यकृत में बनता है; वृक्क केवल उसे रक्त से छानकर बाहर निकालते हैं
तंत्रिका तंत्र
तंत्रिका तंत्र की इकाई तंत्रिका कोशिका है, जो शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है। तंत्रिका तंत्र के दो भाग हैं — केंद्रीय जिसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु आते हैं, और परिधीय जिसमें बाकी तंत्रिकाएँ।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| प्रमस्तिष्क | सोचना, याद रखना, ऐच्छिक क्रियाएँ |
| अनुमस्तिष्क | संतुलन और गति का समन्वय |
| मेडुला | श्वास, हृदय गति, रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ |
| मेरुरज्जु | प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण |
प्रतिवर्ती क्रिया वह तुरंत होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जिसमें मस्तिष्क तक संदेश जाने की प्रतीक्षा नहीं की जाती। गर्म बर्तन छूते ही हाथ खिंच जाना इसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है, और इसका नियंत्रण मेरुरज्जु करती है। इसी से समय बचता है और शरीर की रक्षा हो जाती है।
अंतःस्रावी तंत्र
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ती हैं, इसलिए उन्हें नलिकाविहीन ग्रंथियाँ कहा जाता है। इनके स्राव हार्मोन कहलाते हैं।
| ग्रंथि | हार्मोन | कार्य |
|---|---|---|
| पीयूष | वृद्धि हार्मोन | शरीर की वृद्धि; मास्टर ग्रंथि |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन | उपापचय का नियंत्रण |
| अग्न्याशय | इंसुलिन | रक्त में शर्करा का नियंत्रण |
| अधिवृक्क | एड्रीनैलिन | आपात स्थिति का हार्मोन |
पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि वह दूसरी ग्रंथियों को भी नियंत्रित करती है। एड्रीनैलिन भय या उत्तेजना के समय स्रावित होता है और हृदय की धड़कन तेज़ कर देता है, इसीलिए उसे आपात स्थिति का हार्मोन कहते हैं। आयोडीन की कमी से थायरॉक्सिन नहीं बन पाता और घेंघा रोग हो जाता है।
तीनों तंत्रों का बँटवारा सरल है — उत्सर्जन कचरा निकालता है, तंत्रिका तंत्र तेज़ और तात्कालिक संदेश भेजता है, और हार्मोन धीमे पर लंबे समय तक चलने वाला नियंत्रण करते हैं।
TRE संकेत: नेफ़्रॉन वृक्क की इकाई है और यूरिया यकृत में बनता है — दोनों तयशुदा प्रश्न हैं। प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण मेरुरज्जु करती है, यह सीधे पूछा जाता है। पीयूष मास्टर ग्रंथि और इंसुलिन अग्न्याशय से वाला बिंदु भी बार-बार आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- वृक्क उत्सर्जन का मुख्य अंग है और उसकी इकाई नेफ़्रॉन है।
- यूरिया यकृत में बनता है और वृक्क द्वारा बाहर निकाला जाता है।
- त्वचा और फेफड़े भी उत्सर्जन में भाग लेते हैं।
- प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण मेरुरज्जु करती है।
- अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन बनाए रखता है।
- पीयूष मास्टर ग्रंथि है और इंसुलिन अग्न्याशय से निकलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की भूमिका क्यों नहीं होती?
गर्म वस्तु छूने जैसी स्थिति में देर करना खतरनाक होता है। इसलिए संदेश मेरुरज्जु तक जाकर वहीं से आदेश लौट आता है और हाथ तुरंत खिंच जाता है। मस्तिष्क तक जाने में जो अतिरिक्त समय लगता, वह बच जाता है। मस्तिष्क को घटना की जानकारी बाद में मिलती है।
पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहते हैं?
क्योंकि वह केवल अपने हार्मोन नहीं बनाती, बल्कि थायरॉइड और अधिवृक्क जैसी दूसरी अंतःस्रावी ग्रंथियों के काम को भी नियंत्रित करती है। शरीर की वृद्धि से जुड़ा हार्मोन भी यही बनाती है, इसलिए उसके ठीक से काम न करने पर बौनापन या असामान्य लंबाई हो सकती है।
आयोडीन की कमी से क्या होता है?
थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन चाहिए। भोजन में आयोडीन कम होने पर यह हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता और ग्रंथि फूल जाती है, जिसे घेंघा कहते हैं। इसी कारण खाने में आयोडीनयुक्त नमक के प्रयोग की सलाह दी जाती है।
डायलिसिस की ज़रूरत कब पड़ती है?
जब दोनों वृक्क रक्त को छानने का काम ठीक से नहीं कर पाते, तब शरीर में यूरिया और अतिरिक्त जल जमा होने लगता है, जो घातक हो सकता है। ऐसी स्थिति में मशीन की सहायता से रक्त को शरीर के बाहर छानकर वापस भेजा जाता है, इसी को अपोहन या डायलिसिस कहते हैं।
