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घातांक एवं मानक रूप

Exponents and Standard Form

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यह विषय 1 से 2 प्रश्न देता है और पूरा का पूरा नियमों पर टिका है। घातांक के छह नियम, शून्य और ऋणात्मक घात का व्यवहार, तथा मानक रूप — तीनों याद हो जाएँ तो यहाँ गलती की गुंजाइश ही नहीं रहती।

घातांक के नियम

aᵐ × aⁿ = aᵐ⁺ⁿ | aᵐ ÷ aⁿ = aᵐ⁻ⁿ | (aᵐ)ⁿ = aᵐⁿ

(ab)ᵐ = aᵐbᵐ | (a/b)ᵐ = aᵐ/bᵐ

ध्यान रखिए कि ये नियम तभी चलते हैं जब आधार समान हो। 2³ × 3² को जोड़कर हल नहीं किया जा सकता, क्योंकि आधार अलग हैं। यही सबसे आम भूल है।

✗ 2³ × 3² = 6⁵  |  ✓ आधार अलग हैं, इसलिए घात जोड़ी नहीं जा सकती; उत्तर 8 × 9 = 72 है

शून्य एवं ऋणात्मक घात

a⁰ = 1 (जहाँ a ≠ 0) | a⁻ⁿ = 1 ÷ aⁿ

शून्य घात का उत्तर सदा 1 होता है, चाहे आधार कितना भी बड़ा हो — 100⁰ भी 1 है और 5⁰ भी। इसका कारण भाग के नियम से निकलता है, क्योंकि aᵐ ÷ aᵐ = a⁰ और वही 1 के बराबर है।

ऋणात्मक घात का अर्थ व्युत्क्रम है, ऋणात्मक उत्तर नहीं। 2⁻³ का मान 1/8 है, −8 नहीं। यह जाल लगभग हर वर्ष रखा जाता है।

मानक रूप

बहुत बड़ी या बहुत छोटी संख्या को k × 10ⁿ के रूप में लिखना मानक रूप कहलाता है, जहाँ k का मान 1 और 10 के बीच होता है।

संख्यामानक रूप
450004.5 × 10⁴
0.000323.2 × 10⁻⁴
60200006.02 × 10⁶
0.00000757.5 × 10⁻⁶

नियम सरल है — दशमलव को बाईं ओर ले जाने पर घात धनात्मक और दाईं ओर ले जाने पर ऋणात्मक होती है। जितने स्थान चले, उतनी घात।

बड़ी संख्याओं की तुलना

जब घातें बड़ी हों तो सीधी गणना संभव नहीं होती। ऐसे में आधार समान कीजिए और फिर घात की तुलना कीजिए, या घात समान कीजिए और फिर आधार की।

  • 2¹⁰ और 4⁵ की तुलना — 4⁵ = (2²)⁵ = 2¹⁰, इसलिए दोनों बराबर हैं।
  • 3⁴ और 4³ की तुलना — 81 और 64, इसलिए 3⁴ बड़ा है।

तुलना का सूत्र: पहले आधार बराबर करने की कोशिश कीजिए, वह न हो तो घात बराबर कीजिए। दोनों न हो सकें तभी वास्तविक मान निकालिए।

TRE संकेत: a⁰ = 1 और ऋणात्मक घात का अर्थ व्युत्क्रम — दो तयशुदा प्रश्न हैं और दूसरे में ऋणात्मक उत्तर वाला विकल्प ज़रूर रखा जाता है। आधार समान होने पर ही घात जोड़ी जाती है, यह शर्त याद रखिए। मानक रूप में k का मान 1 और 10 के बीच होना अनिवार्य है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • समान आधार पर गुणा में घात जोड़ी और भाग में घटाई जाती है।
  • घात के ऊपर घात हो तो दोनों घातें गुणा होती हैं।
  • आधार अलग हो तो घात जोड़ी नहीं जा सकती।
  • शून्य घात का मान सदा 1 होता है, बशर्ते आधार शून्य न हो।
  • ऋणात्मक घात का अर्थ व्युत्क्रम है, ऋणात्मक उत्तर नहीं।
  • मानक रूप में k का मान 1 और 10 के बीच रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसी संख्या की शून्य घात एक क्यों होती है?

यह भाग के नियम से निकलता है। समान आधार वाली दो बराबर घातों का भाग करने पर घातें घटकर शून्य हो जाती हैं, और कोई संख्या स्वयं से भाग देने पर एक ही आती है। इसलिए किसी भी शून्येतर आधार की शून्य घात एक होती है।

2 की ऋण तीन घात का मान क्या है?

एक बटा आठ। ऋणात्मक घात का अर्थ व्युत्क्रम लेना है, ऋणात्मक उत्तर देना नहीं। इसलिए दो की ऋण तीन घात का मान एक बटा दो का घन यानी एक बटा आठ होगा। विकल्पों में ऋण आठ ज़रूर रखा जाता है, इसलिए सावधानी चाहिए।

क्या अलग-अलग आधार वाली घातों को जोड़ा जा सकता है?

नहीं। घात जोड़ने का नियम केवल तभी लागू होता है जब आधार समान हो। दो का घन गुणा तीन का वर्ग को छह की पाँचवीं घात नहीं लिखा जा सकता। ऐसी स्थिति में दोनों के मान अलग-अलग निकालकर गुणा करना पड़ता है।

मानक रूप में लिखने का नियम क्या है?

संख्या को k गुणा दस की घात n के रूप में लिखा जाता है, जहाँ k का मान एक और दस के बीच होना चाहिए। दशमलव को बाईं ओर ले जाने पर घात धनात्मक और दाईं ओर ले जाने पर ऋणात्मक होती है, और जितने स्थान चले उतनी ही घात होती है।

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