तथ्यात्मक, निष्कर्षात्मक एवं शब्दार्थ प्रश्न
तथ्यात्मक, निष्कर्षात्मक एवं शब्दार्थ प्रश्न
गद्यांश के प्रश्न तीन तरह के होते हैं और तीनों को हल करने का तरीका अलग है। यही कारण है कि प्रश्न पढ़ते ही सबसे पहले उसका प्रकार पहचान लेना चाहिए, क्योंकि प्रकार तय हो जाने पर उत्तर तक पहुँचने का रास्ता भी तय हो जाता है।
तीन प्रकार
| प्रकार | क्या पूछता है | कहाँ से मिलेगा |
|---|---|---|
| तथ्यात्मक | गद्यांश में सीधे लिखी बात | उसी पंक्ति से |
| निष्कर्षात्मक | जो कहा गया उससे निकलने वाली बात | एक कदम आगे सोचकर |
| शब्दार्थ | किसी शब्द का संदर्भ में अर्थ | आसपास के वाक्यों से |
तथ्यात्मक प्रश्न सबसे आसान होते हैं और उनका उत्तर गद्यांश में शब्दशः मिल जाता है। इनमें केवल यह सावधानी चाहिए कि विकल्प में शब्द बदलकर लिखा जा सकता है, इसलिए अर्थ मिलाइए, शब्द नहीं।
निष्कर्ष केवल एक कदम
निष्कर्षात्मक प्रश्न में उत्तर सीधे लिखा नहीं होता, पर वह गद्यांश से तार्किक रूप से निकलता है। यहाँ सबसे बड़ी भूल है बहुत दूर तक चले जाना।
नियम याद रखिए — निष्कर्ष केवल एक कदम आगे का होना चाहिए। यदि विकल्प तक पहुँचने के लिए दो-तीन अतिरिक्त मान्यताएँ जोड़नी पड़ रही हैं तो वह विकल्प ग़लत है।
✗ निष्कर्ष वाले प्रश्न में वह विकल्प चुन लेना जो सच तो लगता है पर गद्यांश से नहीं निकलता | ✓ हर निष्कर्ष के लिए गद्यांश में वह पंक्ति दिखाइए जिससे वह निकल रहा है
- विकल्प में always, never, all, none जैसे शब्द हों तो सावधान रहिए।
- ऐसे निरपेक्ष शब्द प्रायः ग़लत विकल्प में रखे जाते हैं।
- गद्यांश प्रायः संतुलित भाषा में लिखा होता है, इसलिए संतुलित विकल्प ही सही निकलता है।
संदर्भ में शब्द का अर्थ
शब्दार्थ वाले प्रश्न में शब्दकोश का अर्थ नहीं, उस वाक्य में उसका अर्थ पूछा जाता है। इसलिए पहले उस वाक्य को पूरा पढ़िए, फिर हर विकल्प को उस शब्द की जगह रखकर देखिए।
जो विकल्प रखने पर वाक्य का भाव वही बना रहे, वही सही उत्तर है। कई बार वह विकल्प शब्द का सबसे प्रचलित अर्थ नहीं होता, और परीक्षा ठीक यही जाँचती है।
दो और प्रारूप
पहला — लेखक का दृष्टिकोण पूछने वाला प्रश्न। यहाँ देखिए कि लेखक विषय के पक्ष में है, विरोध में है, या केवल जानकारी दे रहा है। विशेषणों और क्रियाविशेषणों से यह भाव पकड़ में आता है।
दूसरा — गद्यांश का उद्देश्य पूछने वाला प्रश्न। उत्तर प्रायः चार में से एक होता है — सूचना देना, समझाना, राय बनाना या आलोचना करना। पूरे गद्यांश का स्वर देखकर यह तय होता है।
प्रश्न पढ़ते ही उसका प्रकार पहचान लीजिए। तथ्यात्मक के लिए पंक्ति खोजिए, निष्कर्ष के लिए एक कदम आगे सोचिए, और शब्दार्थ के लिए विकल्प को वाक्य में रखकर पढ़िए। तीनों के लिए एक ही तरीका अपनाना सबसे आम भूल है।
TRE संकेत: निष्कर्ष वाले प्रश्न में निरपेक्ष विकल्प जान-बूझकर रखे जाते हैं, वे प्रायः ग़लत होते हैं। संदर्भ में शब्द का अर्थ वाला प्रश्न भी लगभग हर गद्यांश में आता है। लेखक का दृष्टिकोण भी बार-बार पूछा गया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं — तथ्यात्मक, निष्कर्षात्मक और शब्दार्थ।
- तथ्यात्मक उत्तर गद्यांश में सीधे मिल जाता है।
- निष्कर्ष केवल एक कदम आगे का होना चाहिए।
- always और never जैसे निरपेक्ष शब्द प्रायः ग़लत विकल्प में होते हैं।
- शब्दार्थ के प्रश्न में विकल्प को वाक्य में रखकर देखिए।
- लेखक का दृष्टिकोण उसके विशेषणों से पकड़ में आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निष्कर्ष वाले प्रश्न में सबसे आम भूल क्या है?
बहुत दूर तक चले जाना। परीक्षार्थी अपने अनुभव और सामान्य ज्ञान से ऐसा विकल्प चुन लेता है जो सच तो है, पर गद्यांश से नहीं निकलता। नियम यह है कि हर निष्कर्ष के लिए गद्यांश में एक पंक्ति दिखाई जा सके, जिससे वह सीधे निकल रहा हो।
विकल्प में always या never हो तो क्या करें?
ऐसे निरपेक्ष शब्दों को संदेह की दृष्टि से देखिए। गद्यांश प्रायः संतुलित भाषा में लिखे जाते हैं और उनमें प्रायः, अधिकतर या कुछ मामलों में जैसे शब्द आते हैं। इसलिए हमेशा या कभी नहीं कहने वाला विकल्प अकसर गद्यांश से आगे निकल जाता है और ग़लत सिद्ध होता है।
शब्द का सबसे प्रचलित अर्थ ही उत्तर क्यों नहीं होता?
क्योंकि प्रश्न शब्दकोश का अर्थ नहीं, संदर्भ का अर्थ पूछता है। एक ही शब्द अलग वाक्यों में अलग भाव दे सकता है। इसलिए विकल्प को उस शब्द की जगह रखकर पूरा वाक्य पढ़िए, और जिस विकल्प से भाव वही बना रहे उसे चुनिए।
लेखक का दृष्टिकोण कैसे पहचानें?
उसके चुने हुए शब्दों से। यदि वह प्रशंसा वाले विशेषण प्रयोग कर रहा है तो वह पक्ष में है, और यदि आलोचना वाले शब्द हैं तो विरोध में। यदि वाक्य तथ्य भर बता रहे हैं और कहीं भाव नहीं झलक रहा, तो लेखक तटस्थ है और केवल सूचना दे रहा है।
