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मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य

By ExamAtlas · 29/8/2026

मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य

मौलिक अधिकारों से प्रश्न लगभग हर बार आता है और वह प्रायः तीन बिंदुओं पर होता है — छह अधिकारों के नाम, कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेद, और रिट के प्रकार। तीनों को अनुच्छेद संख्या के साथ याद कीजिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः संख्या ही पूछता है।

छह मौलिक अधिकार

अधिकारअनुच्छेद
समता का अधिकार14 से 18
स्वतंत्रता का अधिकार19 से 22
शोषण के विरुद्ध अधिकार23 और 24
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार25 से 28
संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार29 और 30
संवैधानिक उपचारों का अधिकार32

संपत्ति का अधिकार पहले मौलिक अधिकार था, पर चवालीसवें संशोधन, 1978 से उसे हटाकर विधिक अधिकार बना दिया गया। यह तथ्य परीक्षा में बार-बार आता है।

डॉ. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा और हृदय कहा था, क्योंकि उसी से बाकी अधिकारों को लागू कराया जा सकता है। बिना उसके शेष अधिकार केवल घोषणा बनकर रह जाते।

कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेदविषय
14विधि के समक्ष समता
17अस्पृश्यता का अंत
19वाक् एवं अभिव्यक्ति सहित छह स्वतंत्रताएँ
21प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
21कछह से चौदह वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा
23मानव दुर्व्यापार और बेगार पर रोक
24चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों से कारखाने में काम पर रोक

अनुच्छेद 21क शिक्षक के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसी ने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। वह छियासीवें संशोधन, 2002 से जोड़ा गया और उसी के आधार पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 बना, जो 2010 में लागू हुआ।

शिक्षा का अधिकार आरंभ से ही संविधान में मौलिक अधिकार था  |   वह 2002 के छियासीवें संशोधन से अनुच्छेद 21क के रूप में जोड़ा गया

रिट

अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकते हैं।

रिटअर्थ
बंदी प्रत्यक्षीकरणबंदी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश
परमादेशकर्तव्य पालन का आदेश
प्रतिषेधनिचली अदालत को आगे न बढ़ने का आदेश
उत्प्रेषणमामला ऊपर मँगाने का आदेश
अधिकार पृच्छाकिस अधिकार से पद पर हैं, यह पूछना

इनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण सबसे अधिक पूछी जाती है और वह अवैध हिरासत के विरुद्ध सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। ध्यान दीजिए कि उच्च न्यायालय का क्षेत्र इस मामले में उच्चतम न्यायालय से व्यापक है, क्योंकि वह अन्य उद्देश्यों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।

मौलिक कर्तव्य

मौलिक कर्तव्य मूल संविधान में नहीं थे। वे बयालीसवें संशोधन, 1976 से अनुच्छेद 51क में जोड़े गए और सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित थे। आरंभ में दस थे और छियासीवें संशोधन से एक और जुड़कर ग्यारह हो गए।

ग्यारहवाँ कर्तव्य यह है कि माता-पिता या संरक्षक छह से चौदह वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर दें। यह कर्तव्य अनुच्छेद 21क का पूरक है और शिक्षक के लिए सीधे प्रासंगिक है।

अधिकार और कर्तव्य में एक बड़ा अंतर याद रखिए — मौलिक अधिकार न्यायालय से लागू कराए जा सकते हैं, पर मौलिक कर्तव्य सीधे लागू नहीं कराए जा सकते। यही अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है।

TRE संकेत: अनुच्छेद 21क और शिक्षा का अधिकार शिक्षक भर्ती में सबसे अधिक पूछा जाता है। अनुच्छेद 32 संविधान की आत्मा भी तयशुदा है। संपत्ति का अधिकार अब मौलिक नहीं और मौलिक कर्तव्य 1976 में जोड़े गए भी सीधे आए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • संविधान में छह मौलिक अधिकार हैं।
  • संपत्ति का अधिकार 1978 में मौलिक अधिकार से हटा दिया गया।
  • अनुच्छेद 32 को डॉ. आंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा।
  • अनुच्छेद 21क छह से चौदह वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देता है।
  • पाँच प्रकार की रिट जारी की जा सकती हैं।
  • मौलिक कर्तव्य 1976 में अनुच्छेद 51क में जोड़े गए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा क्यों कहा जाता है?

क्योंकि वही नागरिक को सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है जब उसका कोई मौलिक अधिकार छीना जाए। बाकी अधिकार तभी अर्थ रखते हैं जब उन्हें लागू कराने का रास्ता हो, और वह रास्ता यही अनुच्छेद देता है। इसीलिए डॉ. आंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा और हृदय कहा।

शिक्षा का अधिकार संविधान में कब आया?

2002 के छियासीवें संशोधन से, जब अनुच्छेद 21क जोड़ा गया और छह से चौदह वर्ष के बच्चों की नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। इसी आधार पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में बना और 2010 में लागू हुआ।

मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य में क्या अंतर है?

मौलिक अधिकार न्यायालय से लागू कराए जा सकते हैं, यानी उनके उल्लंघन पर सीधे अदालत जाया जा सकता है। मौलिक कर्तव्य नैतिक दायित्व हैं और उन्हें सीधे न्यायालय से लागू नहीं कराया जा सकता, यद्यपि कानून बनाकर उनसे जुड़े दायित्व लागू किए जा सकते हैं।

बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि वह अवैध हिरासत के विरुद्ध सबसे सीधा उपाय है। इसमें न्यायालय हिरासत में रखने वाले को आदेश देता है कि बंदी को उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाए और हिरासत का कारण बताया जाए। यदि कारण वैध न हो तो व्यक्ति तुरंत मुक्त कर दिया जाता है।