बिहार का भूगोल एवं आपदा प्रबंधन
बिहार का भूगोल एवं आपदा प्रबंधन
यह अध्याय भूगोल खंड का सबसे राज्य-केंद्रित भाग है और इससे लगभग तीन प्रश्न आते हैं। ध्यान रखिए कि इन्हीं प्रश्नों की तैयारी परीक्षा हॉल का हर दूसरा परीक्षार्थी भी करके आया होगा, इसलिए यहाँ परिचय नहीं, सटीकता अंक दिलाती है।
स्थिति और भौतिक बनावट
- बिहार स्थलरुद्ध है और पूरी तरह उत्तरी मैदान में स्थित है।
- सीमाएँ — उत्तर में नेपाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखंड और पूर्व में पश्चिम बंगाल।
- गंगा राज्य के बीच से पश्चिम से पूर्व बहती है और उसे उत्तर बिहार तथा दक्षिण बिहार में बाँटती है।
- दक्षिण में छोटे पहाड़ी भाग हैं — कैमूर का पठार और राजगीर की पहाड़ियाँ।
- राज्य में नौ प्रमंडल और अड़तीस ज़िले हैं।
- कर्क रेखा बिहार से नहीं गुज़रती।
नदी तंत्र
| किनारा | नदियाँ |
|---|---|
| गंगा के उत्तर | घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, कोसी, महानंदा |
| गंगा के दक्षिण | सोन, पुनपुन, फल्गु, किउल |
उत्तर की नदियाँ नेपाल और हिमालय से निकलती हैं, भारी गाद लाती हैं और लगभग हर वर्ष बाढ़ लाती हैं। दक्षिण की नदियाँ पठार से निकलती हैं, कम गाद लाती हैं और उनका मार्ग स्थिर रहता है। सोन दक्षिणी समूह की सबसे बड़ी नदी है।
कोसी को बिहार का शोक कहा जाता है, क्योंकि वह इतनी गाद जमा करती है कि अपना ही तल ऊँचा कर लेती है और समय-समय पर नया मार्ग बना लेती है।
✗ सोन को बिहार का शोक कहा जाता है | ✓ बिहार का शोक कोसी को कहते हैं; सोन दक्षिण की सबसे बड़ी सहायक नदी है
कृषि और उत्पाद
| उत्पाद | क्षेत्र | विशेष |
|---|---|---|
| धान | पूरे राज्य में | मुख्य खरीफ़ फ़सल |
| गेहूँ | पूरे राज्य में | मुख्य रबी फ़सल |
| मक्का | उत्तर और पूर्वी बिहार | प्रमुख अनाज |
| गन्ना | उत्तरी ज़िले | चीनी मिलों का आधार |
| शाही लीची | मुज़फ़्फ़रपुर | 2018 में जीआई टैग |
| मखाना | मिथिलांचल | तालाबों और आर्द्र भूमि में |
बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर टिकी है। खनिज पेटी नवंबर 2000 में झारखंड के अलग होने के साथ राज्य से बाहर चली गई। लीची और मखाना राज्य की पहचान वाली उपज हैं।
बाढ़ और आपदा प्रबंधन
उत्तर बिहार भारत के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में है, इसलिए यहाँ बाढ़ प्रबंधन एक जीवित प्रशासनिक विषय है।
- संरचनात्मक — तटबंध, कोसी बैराज, जल निकासी नहरें और ऊँचे मंच।
- गैर-संरचनात्मक — पूर्वानुमान, चेतावनी तंत्र, निकासी की योजना और राहत सामग्री का भंडारण।
- दीर्घकालिक — जलग्रहण क्षेत्र में वनरोपण, जिसका बड़ा भाग नेपाल में है, इसलिए संयुक्त प्रबंधन आवश्यक।
- सामुदायिक — ऊँचे चापाकल, ऊँची कुर्सी वाले मकान, गाँव की नावें और शरण स्थल के रूप में विद्यालय।
अंतिम बिंदु पर शिक्षक सीधे जुड़ जाता है। ग्रामीण बिहार में विद्यालय भवन ही सामान्य बाढ़ शरण स्थल होता है, इसलिए शिक्षक व्यवहार में ज़िले की आपदा योजना का हिस्सा बन जाता है।
तटबंधों पर संतुलित उत्तर में दोनों पक्ष आने चाहिए — वे भूमि की रक्षा करते हैं, पर वे गाद को नदी के भीतर रोक देते हैं जिससे तल ऊँचा होता जाता है, और जहाँ वे टूटते हैं वहाँ अचानक भीषण बाढ़ आती है।
इस अध्याय में हर दूसरा परीक्षार्थी भी तैयार होकर आता है, इसलिए यहाँ अनुमान से उत्तर मत दीजिए। उत्तर और दक्षिण की नदियों की सूची, कोसी का नाम और ज़िलों की संख्या — इन्हें अक्षरशः याद कीजिए।
TRE संकेत: कोसी बिहार का शोक लगभग हर बार आता है और सोन के साथ बदलकर पूछा जाता है। नौ प्रमंडल और अड़तीस ज़िले तथा कर्क रेखा बिहार से नहीं गुज़रती भी तयशुदा हैं। तटबंध वाले प्रश्न में दोनों पक्ष दीजिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- बिहार स्थलरुद्ध है और पूरी तरह उत्तरी मैदान में स्थित है।
- उत्तर में नेपाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखंड और पूर्व में पश्चिम बंगाल है।
- राज्य में नौ प्रमंडल और अड़तीस ज़िले हैं।
- उत्तर की नदियाँ नेपाल से आती हैं और बाढ़ लाती हैं, दक्षिण की नहीं।
- कोसी को बिहार का शोक और सोन को दक्षिण की सबसे बड़ी नदी कहते हैं।
- मुज़फ़्फ़रपुर की शाही लीची को 2018 में जीआई टैग मिला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर बिहार में हर वर्ष बाढ़ क्यों आती है और दक्षिण में नहीं?
क्योंकि उत्तर की नदियाँ नेपाल और हिमालय से निकलती हैं, उन्हें बर्फ़ पिघलने तथा भारी मानसूनी वर्षा दोनों से जल मिलता है, और वे बहुत अधिक गाद लेकर समतल मैदान में उतरती हैं। दक्षिण की नदियाँ पठार से निकलती हैं, कम गाद लाती हैं और उनका मार्ग स्थिर रहता है।
कोसी को बिहार का शोक क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वह इतनी अधिक गाद जमा करती है कि उसका अपना तल लगातार ऊँचा होता जाता है, और अंततः वह किनारा तोड़कर मैदान में नया मार्ग बना लेती है। इस बार-बार मार्ग बदलने से एक विशाल जलोढ़ पंख बना है और उत्तरी ज़िलों में बार-बार भीषण बाढ़ आती रही है।
क्या तटबंधों से बिहार की बाढ़ की समस्या हल हो गई?
केवल आंशिक रूप से। उन्होंने भूमि की रक्षा की है और नदी के मार्ग बदलने की प्रवृत्ति घटाई है। पर वे गाद को नदी के भीतर ही रोक देते हैं, जिससे तल समय के साथ ऊँचा होता जाता है, और जहाँ तटबंध टूटता है वहाँ पानी अचानक और अधिक विनाशकारी रूप में फैलता है।
बाढ़ प्रबंधन में विद्यालय की क्या भूमिका है?
ग्रामीण बिहार में विद्यालय भवन ही प्रायः बाढ़ शरण स्थल के रूप में प्रयोग होते हैं, और शिक्षक व्यवहार में ज़िले की प्रतिक्रिया योजना का हिस्सा बन जाते हैं। इसलिए ऊँची कुर्सी, सुरक्षित पेयजल और निकासी अभ्यास जैसी तैयारियाँ विद्यालय से सीधे जुड़ी होती हैं।
