आलेख, निर्देशांक ज्यामिति एवं समानुपाती राशियाँ
आलेख, निर्देशांक ज्यामिति एवं समानुपाती राशियाँ
यह विषय बीजगणित को पूरा करता है और 1 से 2 प्रश्न देता है। कार्तीय तल के चतुर्थांश, रैखिक समीकरण का आलेख, तथा सीधा और व्युत्क्रम समानुपात — तीनों में नियम तय हैं और प्रश्न प्रायः चिह्न या दिशा पर बनता है।
कार्तीय तल
दो लंब रेखाओं से बना तल कार्तीय तल कहलाता है। क्षैतिज रेखा x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर रेखा y-अक्ष है; दोनों का कटान बिंदु मूल बिंदु (0, 0) है।
| चतुर्थांश | x का चिह्न | y का चिह्न |
|---|---|---|
| प्रथम | + | + |
| द्वितीय | − | + |
| तृतीय | − | − |
| चतुर्थ | + | − |
चतुर्थांशों की गिनती वामावर्त होती है, यानी प्रथम से चलकर ऊपर-बाएँ, नीचे-बाएँ, नीचे-दाएँ। यह क्रम उलटा याद कर लेना आम भूल है।
निर्देशांक में क्रम मायने रखता है — (2, 3) और (3, 2) अलग-अलग बिंदु हैं। पहला अंक भुज यानी x है और दूसरा कोटि यानी y।
✗ (2, 3) और (3, 2) एक ही बिंदु हैं | ✓ क्रमित युग्म में क्रम मायने रखता है; ये दो अलग बिंदु हैं
अक्षों पर स्थित बिंदु किसी चतुर्थांश में नहीं आते — x-अक्ष पर y = 0 और y-अक्ष पर x = 0 होता है। यह भी सीधे पूछा जाता है।
रैखिक समीकरण का आलेख
दो चर वाले रैखिक समीकरण का आलेख सदा एक सरल रेखा होता है — इसीलिए उसे रैखिक कहा जाता है। रेखा खींचने के लिए दो बिंदु पर्याप्त हैं, तीसरा केवल जाँच के लिए।
- y = mx के रूप वाली रेखा सदा मूल बिंदु से गुज़रती है।
- x = k y-अक्ष के समांतर ऊर्ध्वाधर रेखा है।
- y = k x-अक्ष के समांतर क्षैतिज रेखा है।
अंतिम दो को उलट देना बहुत आम है। याद रखने का तरीका — x = k में x स्थिर है, इसलिए रेखा ऊर्ध्वाधर होगी, क्योंकि उस पर हर बिंदु का x वही रहता है।
सीधा एवं व्युत्क्रम समानुपात
सीधा समानुपात: x ÷ y = अचर | व्युत्क्रम समानुपात: x × y = अचर
| स्थिति | प्रकार |
|---|---|
| अधिक वस्तुएँ, अधिक मूल्य | सीधा |
| अधिक दूरी, अधिक समय (चाल स्थिर) | सीधा |
| अधिक मज़दूर, कम दिन | व्युत्क्रम |
| अधिक चाल, कम समय | व्युत्क्रम |
पहचान का सूत्र सरल है — दोनों राशियाँ एक साथ बढ़ें तो सीधा, एक बढ़े और दूसरी घटे तो व्युत्क्रम समानुपात। सीधा में भागफल स्थिर रहता है और व्युत्क्रम में गुणनफल।
परीक्षा में आलेख पढ़ना
- पहले दोनों अक्षों के शीर्षक और मात्रक पढ़िए।
- फिर पैमाना देखिए — एक खाना कितना दर्शा रहा है।
- अब प्रश्न पढ़कर आवश्यक बिंदु ढूँढ़िए।
- अनुमान से मत पढ़िए — रेखा खींचकर मान लीजिए।
आलेख वाले प्रश्न में सबसे अधिक अंक मात्रक की चूक से जाते हैं। यदि अक्ष पर हज़ार में मान दिए हैं और उत्तर सीधी संख्या में माँगा गया है, तो गुणा करना न भूलिए।
TRE संकेत: चतुर्थांशों के चिह्न तालिका की तरह याद कीजिए, यह सीधा प्रश्न बनता है। x = k ऊर्ध्वाधर और y = k क्षैतिज वाला जोड़ा उलट जाना सबसे आम भूल है। समानुपात में साथ बढ़ें तो सीधा, उल्टा चलें तो व्युत्क्रम — यह पहचान पूरे विषय का काम कर देती है।
60 सेकंड का रिवीजन
- कार्तीय तल में क्षैतिज x-अक्ष और ऊर्ध्वाधर y-अक्ष होता है।
- चतुर्थांशों की गिनती वामावर्त होती है; चिह्न क्रमशः ++, −+, −−, +−।
- (2, 3) और (3, 2) अलग बिंदु हैं; क्रम मायने रखता है।
- अक्षों पर स्थित बिंदु किसी चतुर्थांश में नहीं आते।
- x = k ऊर्ध्वाधर और y = k क्षैतिज रेखा देता है।
- सीधे समानुपात में भागफल और व्युत्क्रम में गुणनफल स्थिर रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चतुर्थांशों में चिह्न कैसे याद रखें?
प्रथम चतुर्थांश में दोनों धनात्मक होते हैं, फिर वामावर्त चलते हुए द्वितीय में x ऋणात्मक और y धनात्मक, तृतीय में दोनों ऋणात्मक, और चतुर्थ में x धनात्मक और y ऋणात्मक। गिनती वामावर्त होती है, दक्षिणावर्त नहीं।
x बराबर k किस प्रकार की रेखा देता है?
ऊर्ध्वाधर रेखा, जो y-अक्ष के समांतर होती है। उस पर हर बिंदु का x मान वही रहता है, इसलिए रेखा खड़ी होती है। इसके विपरीत y बराबर k क्षैतिज रेखा देता है, जो x-अक्ष के समांतर होती है। इन दोनों को उलट देना बहुत आम भूल है।
सीधा और व्युत्क्रम समानुपात कैसे पहचानें?
यदि एक राशि बढ़ने पर दूसरी भी बढ़े तो वह सीधा समानुपात है और उनका भागफल स्थिर रहता है। यदि एक बढ़ने पर दूसरी घटे तो वह व्युत्क्रम समानुपात है और उनका गुणनफल स्थिर रहता है। अधिक मज़दूर और कम दिन इसका उदाहरण है।
रैखिक समीकरण का आलेख खींचने के लिए कितने बिंदु चाहिए?
दो बिंदु पर्याप्त हैं, क्योंकि दो बिंदुओं से होकर केवल एक ही सरल रेखा खींची जा सकती है। तीसरा बिंदु केवल जाँच के लिए लिया जाता है कि गणना में कोई चूक तो नहीं हुई। यदि तीनों बिंदु एक रेखा में आ जाएँ तो हल सही है।
