हिंदी साहित्य का काल विभाजन
The Periods of Hindi Literature
भाग-III हिंदी में साहित्य से लगभग 20 प्रश्न आते हैं और काल विभाजन से 2 प्रश्न लगभग तय हैं। परीक्षा काल के नाम, उनकी समय-सीमा और किस आचार्य ने कौन-सा नाम दिया — तीनों पूछती है, इसलिए इन्हें तालिका की तरह याद कीजिए।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल का विभाजन
हिंदी साहित्य का मान्य काल विभाजन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ग्रंथ हिंदी साहित्य का इतिहास में किया। उन्होंने साहित्य को चार कालों में बाँटा और नाम उस काल की प्रधान प्रवृत्ति के आधार पर रखे।
| काल | संवत् | अन्य नाम |
|---|---|---|
| आदिकाल | 1050 से 1375 | वीरगाथा काल |
| भक्तिकाल | 1375 से 1700 | पूर्व मध्यकाल |
| रीतिकाल | 1700 से 1900 | उत्तर मध्यकाल, शृंगार काल |
| आधुनिक काल | 1900 से अब तक | गद्य काल |
ध्यान दीजिए कि ये विक्रम संवत् हैं, ईस्वी नहीं। ईस्वी में बदलने के लिए संवत् में से 57 घटाइए — संवत् 1375 यानी लगभग 1318 ईस्वी।
✗ शुक्ल जी का काल विभाजन ईस्वी वर्षों में है | ✓ यह विक्रम संवत् में है; ईस्वी के लिए 57 घटाना पड़ता है
आदिकाल के अलग-अलग नाम
आदिकाल को अलग-अलग विद्वानों ने अलग नाम दिए, और यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
| विद्वान | दिया गया नाम |
|---|---|
| आचार्य रामचंद्र शुक्ल | वीरगाथा काल |
| हजारी प्रसाद द्विवेदी | आदिकाल |
| राहुल सांकृत्यायन | सिद्ध-सामंत काल |
| जॉर्ज ग्रियर्सन | चारण काल |
| मिश्रबंधु | प्रारंभिक काल |
| रामकुमार वर्मा | संधिकाल एवं चारणकाल |
आदिकाल नाम आज सबसे अधिक प्रचलित है और यह हजारी प्रसाद द्विवेदी का दिया हुआ है। शुक्ल जी का नाम वीरगाथा काल था, क्योंकि उस समय रासो ग्रंथों में वीरता का वर्णन प्रधान था।
नामकरण का आधार
- आदिकाल — वीरगाथा और रासो काव्य की प्रधानता।
- भक्तिकाल — भक्ति भावना का प्रसार, इसे हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है।
- रीतिकाल — काव्य के लक्षण और रीति ग्रंथों की रचना।
- आधुनिक काल — गद्य का विकास और नई विधाओं का जन्म।
आसान क्रम: वीर, भक्ति, शृंगार, गद्य — यह चार शब्दों का क्रम याद रखिए। हर काल की प्रधान प्रवृत्ति ही उसका नाम है, इसलिए नाम से काल और काल से नाम, दोनों याद आ जाते हैं।
TRE संकेत: संवत् और ईस्वी का अंतर याद रखिए — विकल्पों में दोनों रखे जाते हैं। आदिकाल के छह नाम और किसने कौन-सा दिया, यह लगभग तय प्रश्न है — विशेषकर शुक्ल का वीरगाथा काल और द्विवेदी का आदिकाल। भक्तिकाल को स्वर्ण युग कहा जाता है, यह भी पूछा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- काल विभाजन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में किया।
- चार काल — आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल।
- समय-सीमा विक्रम संवत् में है; ईस्वी के लिए 57 घटाइए।
- शुक्ल ने आदिकाल को वीरगाथा काल कहा, द्विवेदी ने आदिकाल।
- राहुल सांकृत्यायन ने सिद्ध-सामंत काल और ग्रियर्सन ने चारण काल कहा।
- भक्तिकाल हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहलाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदी साहित्य का काल विभाजन किसने किया?
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने, अपने प्रसिद्ध ग्रंथ हिंदी साहित्य का इतिहास में। उन्होंने साहित्य को चार कालों में बाँटा और हर काल का नाम उस समय की प्रधान प्रवृत्ति के आधार पर रखा। यही विभाजन आज भी सर्वाधिक मान्य है।
आदिकाल को वीरगाथा काल क्यों कहा गया?
क्योंकि उस समय की प्रधान रचनाएँ रासो ग्रंथ थीं, जिनमें राजाओं और वीरों की वीरता का वर्णन मिलता है। आचार्य शुक्ल ने इसी प्रवृत्ति के आधार पर यह नाम दिया। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इसे आदिकाल कहा, जो आज अधिक प्रचलित है।
भक्तिकाल को स्वर्ण युग क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसी काल में कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास और मीराबाई जैसे कवि हुए और हिंदी काव्य अपनी सर्वोच्च ऊँचाई पर पहुँचा। भाषा, भाव और शिल्प तीनों दृष्टियों से यह काल सबसे समृद्ध माना जाता है, इसीलिए इसे स्वर्ण युग कहा गया।
संवत् को ईस्वी में कैसे बदलें?
विक्रम संवत् में से सत्तावन घटाने पर लगभग ईस्वी वर्ष मिल जाता है। संवत् 1375 लगभग 1318 ईस्वी होता है और संवत् 1900 लगभग 1843 ईस्वी। परीक्षा में विकल्प दोनों रूपों में दिए जाते हैं, इसलिए यह गणना याद रखनी चाहिए।
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