मानव नेत्र एवं दृष्टि दोष
The Human Eye and Defects of Vision
यह भाग परीक्षा की दृष्टि से बहुत उपयोगी है, क्योंकि इसमें प्रश्न लगभग तय होते हैं — किस दोष में कौन-सा लेंस लगता है, नेत्र का कौन-सा भाग क्या काम करता है, और स्वच्छ दृष्टि की न्यूनतम दूरी कितनी होती है। तीनों बिंदु पक्के होने चाहिए।
नेत्र के भाग
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कॉर्निया | पारदर्शी परत, जहाँ प्रकाश का सबसे अधिक अपवर्तन होता है |
| आइरिस | पुतली का आकार घटा-बढ़ाकर प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है |
| पुतली | वह छिद्र जिससे प्रकाश भीतर जाता है |
| नेत्र लेंस | रेटिना पर प्रतिबिंब केंद्रित करता है |
| रेटिना | प्रकाश-संवेदी परदा जहाँ प्रतिबिंब बनता है |
| दृक् तंत्रिका | संदेश को मस्तिष्क तक पहुँचाती है |
रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और छोटा होता है, पर मस्तिष्क उसे सीधा करके समझ लेता है। रेटिना में दो प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं — शंकु कोशिकाएँ रंग और तेज़ प्रकाश के लिए तथा शलाका कोशिकाएँ मंद प्रकाश के लिए।
जहाँ दृक् तंत्रिका रेटिना से जुड़ती है वहाँ कोई संवेदी कोशिका नहीं होती, इसीलिए उसे अंध बिंदु कहते हैं। पीत बिंदु पर सबसे स्पष्ट दृष्टि बनती है।
समंजन एवं दृष्टि परिसर
नेत्र लेंस की फोकस दूरी पक्ष्माभी पेशियों के खिंचने और ढीले पड़ने से बदलती रहती है, जिससे पास और दूर दोनों की वस्तुएँ रेटिना पर केंद्रित हो जाती हैं। इसी क्षमता को समंजन कहते हैं।
- स्वच्छ दृष्टि की न्यूनतम दूरी — सामान्य वयस्क के लिए लगभग 25 सेंटीमीटर।
- दूर बिंदु — सामान्य नेत्र के लिए अनंत।
- इससे पास रखी वस्तु देखने पर आँखों पर दबाव पड़ता है और धुँधली दिखती है।
दृष्टि दोष
| दोष | कठिनाई | कारण | उपचार |
|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि | दूर की वस्तु धुँधली | प्रतिबिंब रेटिना से पहले बनता है | अवतल लेंस |
| दूर-दृष्टि | पास की वस्तु धुँधली | प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है | उत्तल लेंस |
| जरा-दूरदृष्टिता | पास और दूर दोनों में कठिनाई | बुढ़ापे में समंजन क्षमता घटना | द्विफोकसी लेंस |
| दृष्टिवैषम्य | रेखाएँ धुँधली दिखना | कॉर्निया की वक्रता असमान | बेलनाकार लेंस |
याद रखने का सरल तरीका — निकट-दृष्टि में अवतल और दूर-दृष्टि में उत्तल लेंस। मोतियाबिंद लेंस के धुँधला हो जाने से होता है और उसका उपचार लेंस से नहीं, शल्य क्रिया से होता है।
✗ निकट-दृष्टि दोष में उत्तल लेंस लगाया जाता है | ✓ निकट-दृष्टि में अवतल लेंस लगता है; उत्तल लेंस दूर-दृष्टि के लिए है
नेत्रों की देखभाल एवं ब्रेल
- विटामिन-ए की कमी से रतौंधी होती है; गाजर, पपीता और हरी सब्ज़ियाँ लाभदायक हैं।
- बहुत पास या बहुत कम रोशनी में पढ़ना आँखों पर दबाव डालता है।
- सूर्य को सीधे कभी नहीं देखना चाहिए, यह रेटिना को स्थायी क्षति पहुँचा सकता है।
- ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए है, जिसमें छह उभरे बिंदुओं के अलग-अलग संयोजन से अक्षर बनते हैं।
दोनों दोषों में लेंस याद रखने का तरीका — निकट-दृष्टि में प्रतिबिंब आगे बन रहा है, उसे पीछे धकेलना है, इसलिए फैलाने वाला अवतल लेंस। दूर-दृष्टि में प्रतिबिंब पीछे बन रहा है, उसे आगे लाना है, इसलिए मिलाने वाला उत्तल लेंस।
TRE संकेत: निकट-दृष्टि में अवतल और दूर-दृष्टि में उत्तल लेंस लगभग हर वर्ष आता है। स्वच्छ दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेंटीमीटर वाली संख्या सीधे पूछी जाती है। रेटिना पर प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा बनता है — यह भी तयशुदा प्रश्न है, और विटामिन-ए की कमी से रतौंधी भी।
60 सेकंड का रिवीजन
- रेटिना पर प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और छोटा बनता है।
- आइरिस पुतली का आकार बदलकर प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है।
- स्वच्छ दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर होती है।
- निकट-दृष्टि दोष का उपचार अवतल लेंस से होता है।
- दूर-दृष्टि दोष का उपचार उत्तल लेंस से होता है।
- जरा-दूरदृष्टिता में द्विफोकसी लेंस लगाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निकट-दृष्टि दोष में अवतल लेंस ही क्यों लगाया जाता है?
इस दोष में नेत्र लेंस अधिक शक्तिशाली हो जाने या नेत्र गोलक लंबा हो जाने से प्रतिबिंब रेटिना से पहले ही बन जाता है। अवतल लेंस किरणों को थोड़ा फैला देता है, जिससे प्रतिबिंब पीछे खिसककर ठीक रेटिना पर बन जाता है और दूर की वस्तु स्पष्ट दिखने लगती है।
रेटिना पर उल्टा प्रतिबिंब बनने पर भी हमें दुनिया सीधी क्यों दिखती है?
क्योंकि देखने का काम केवल आँख नहीं करती। रेटिना पर बना उल्टा प्रतिबिंब दृक् तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचता है और मस्तिष्क उसकी व्याख्या करके उसे सीधा कर देता है। इसलिए वास्तविक प्रतिबिंब उल्टा होने के बावजूद हमारा अनुभव सीधा रहता है।
जरा-दूरदृष्टिता क्यों होती है?
बढ़ती उम्र में पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर पड़ जाती हैं और नेत्र लेंस का लचीलापन घट जाता है, जिससे समंजन क्षमता कम हो जाती है। ऐसे व्यक्ति को पास और दूर दोनों देखने में कठिनाई होती है, इसलिए ऊपर-नीचे दो अलग शक्ति वाला द्विफोकसी लेंस दिया जाता है।
अंध बिंदु क्या है?
रेटिना पर वह स्थान जहाँ दृक् तंत्रिका जुड़ती है, वहाँ कोई प्रकाश-संवेदी कोशिका नहीं होती। इसलिए उस बिंदु पर बनने वाला प्रतिबिंब दिखाई नहीं देता और उसे अंध बिंदु कहते हैं। इसके ठीक विपरीत पीत बिंदु पर सबसे स्पष्ट दृष्टि बनती है।
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