जलमंडल, जैवमंडल एवं पारितंत्र
Hydrosphere, Biosphere and Ecosystems
यह अध्याय पृथ्वी के जल और जीवन दोनों को जोड़ता है। प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — महासागरों का क्रम, धाराओं का प्रभाव, और प्रमुख जैव क्षेत्रों की पहचान। तीनों को अलग-अलग देखिए, क्योंकि प्रश्न किसी एक पर केंद्रित रहता है।
महासागर
पृथ्वी का लगभग इकहत्तर प्रतिशत भाग जल से ढका है, इसीलिए उसे नीला ग्रह कहा जाता है। इसमें अधिकांश जल खारा है और मीठा जल बहुत कम, जिसका बड़ा हिस्सा हिमानियों में जमा है।
| महासागर | विशेषता |
|---|---|
| प्रशांत | सबसे बड़ा और गहरा; मारियाना गर्त यहीं |
| अटलांटिक | सबसे व्यस्त व्यापार मार्ग |
| हिंद | एकमात्र जो किसी देश के नाम पर है |
| दक्षिणी | अंटार्कटिका के चारों ओर |
| आर्कटिक | सबसे छोटा और सबसे ठंडा |
मारियाना गर्त पृथ्वी का सबसे गहरा ज्ञात बिंदु है और वह प्रशांत महासागर में है। हिंद महासागर एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है — यह तथ्य परीक्षा में बार-बार आता है।
महासागरीय धाराएँ
धाराएँ महासागर के जल का नियमित प्रवाह हैं और वे गर्म या ठंडी होती हैं। गर्म धाराएँ भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर और ठंडी धाराएँ ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं।
- गल्फ़ स्ट्रीम गर्म धारा है और उसी के कारण पश्चिमी यूरोप के बंदरगाह सर्दियों में जमते नहीं।
- लैब्राडोर ठंडी धारा है।
- जहाँ गर्म और ठंडी धारा मिलती हैं वहाँ मछलियाँ बहुत होती हैं, जैसे न्यूफ़ाउंडलैंड के पास।
- वहीं कोहरा भी घना बनता है, जो जहाज़ों के लिए ख़तरा है।
धाराएँ जलवायु पर सीधा असर डालती हैं — गर्म धारा वाले तट अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं और ठंडी धारा वाले तटों के पास प्रायः मरुस्थल मिलते हैं, क्योंकि वहाँ हवा नमी नहीं ले पाती।
✗ सभी महासागरीय धाराएँ ठंडी होती हैं | ✓ धाराएँ गर्म और ठंडी दोनों होती हैं, और दोनों का जलवायु पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है
जैवमंडल और पारितंत्र
जैवमंडल वह पतला क्षेत्र है जहाँ स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल मिलते हैं और जीवन संभव होता है। किसी क्षेत्र के सभी जीव और उनका निर्जीव परिवेश मिलकर पारितंत्र बनाते हैं।
पारितंत्र में तीन घटक होते हैं — उत्पादक यानी हरे पौधे, उपभोक्ता यानी जंतु, और अपघटक यानी सूक्ष्मजीव। ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है और वह आहार शृंखला से आगे बढ़ती है।
प्रमुख जैव क्षेत्र
| जैव क्षेत्र | जलवायु | विशेषता |
|---|---|---|
| उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन | गर्म और अत्यधिक वर्षा | सघन, सदाबहार; पृथ्वी के फेफड़े |
| उष्ण घास मैदान | मौसमी वर्षा | सवाना; शाकाहारी पशु अधिक |
| मरुस्थल | बहुत कम वर्षा | कँटीली वनस्पति |
| शीतोष्ण घास मैदान | मध्यम वर्षा | प्रेयरी, स्टेपी; अन्न के भंडार |
| टैगा | ठंडा | शंकुधारी वन |
| टुंड्रा | अत्यधिक ठंडा | काई और लाइकेन |
उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन को पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है, क्योंकि वे बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं। शीतोष्ण घास मैदान विश्व के अन्न भंडार माने जाते हैं, क्योंकि वहीं गेहूँ की बड़े पैमाने पर खेती होती है।
जैव क्षेत्र पहचानने का सरल तरीका दो प्रश्न पूछना है — वहाँ कितनी वर्षा होती है और कितनी ठंड पड़ती है। इन्हीं दो कारकों से लगभग हर जैव क्षेत्र की पहचान हो जाती है।
TRE संकेत: हिंद महासागर किसी देश के नाम पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। मारियाना गर्त सबसे गहरा बिंदु भी तयशुदा है। गल्फ़ स्ट्रीम गर्म धारा और वर्षा वन पृथ्वी के फेफड़े भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- पृथ्वी का लगभग इकहत्तर प्रतिशत भाग जल से ढका है।
- प्रशांत सबसे बड़ा और आर्कटिक सबसे छोटा महासागर है।
- मारियाना गर्त प्रशांत महासागर में सबसे गहरा बिंदु है।
- गर्म और ठंडी धाराओं के मिलन स्थल पर मछलियाँ अधिक होती हैं।
- पारितंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक होते हैं।
- उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों को पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गर्म और ठंडी धाराओं के मिलने से क्या होता है?
ऐसे स्थानों पर पोषक तत्व ऊपर आ जाते हैं और प्लवक खूब पनपता है, इसलिए मछलियाँ बहुत अधिक होती हैं। न्यूफ़ाउंडलैंड के पास का क्षेत्र इसी कारण विश्व के सबसे बड़े मत्स्य क्षेत्रों में है। पर वहीं घना कोहरा भी बनता है, जो जहाज़ों के लिए ख़तरा रहता है।
गल्फ़ स्ट्रीम का यूरोप पर क्या प्रभाव है?
यह एक गर्म धारा है जो अपने साथ गर्म जल पश्चिमी यूरोप के तटों तक ले जाती है। इसी कारण उतने ऊँचे अक्षांश पर होने के बावजूद वहाँ के बंदरगाह सर्दियों में जमते नहीं और जलवायु अपेक्षाकृत नरम रहती है। इसी अक्षांश के दूसरे क्षेत्र कहीं अधिक ठंडे रहते हैं।
पारितंत्र में अपघटकों का क्या काम है?
वे मरे हुए पौधों और जंतुओं को सड़ाकर उनमें बँधे पोषक तत्व फिर से मिट्टी में लौटा देते हैं, जहाँ से पौधे उन्हें दोबारा ले सकते हैं। यदि अपघटक न हों तो पोषक तत्वों का चक्र रुक जाएगा और मृत शरीरों के ढेर लग जाएँगे। इसीलिए वे पारितंत्र के सफ़ाईकर्मी कहलाते हैं।
वर्षा वनों को पृथ्वी के फेफड़े क्यों कहते हैं?
क्योंकि वे बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे वायुमंडल का संतुलन बना रहता है। साथ ही उनमें पृथ्वी की जैव विविधता का बहुत बड़ा हिस्सा रहता है। इसीलिए उनकी कटाई का असर केवल उस क्षेत्र पर नहीं, पूरे विश्व की जलवायु पर पड़ता है।
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