अतिशयोक्ति, व्यंग्य, विरोधाभास
अतिशयोक्ति, व्यंग्य, विरोधाभास
इस समूह के अलंकार अर्थ के स्तर पर काम करते हैं, ध्वनि या तुलना के स्तर पर नहीं। इसीलिए इन्हें पहचानने के लिए यह देखना पड़ता है कि कहा क्या गया है और उसका असली आशय क्या है। दोनों में अंतर दिखे तो समझिए इसी समूह का कोई अलंकार है।
चारों की परिभाषा
| अलंकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अतिशयोक्ति | प्रभाव के लिए जान-बूझकर बढ़ा-चढ़ाकर कहना | I have told you a million times |
| व्यंग्य | कहा कुछ जाए और आशय उसका उल्टा हो | Lovely weather, said in a storm |
| विरोधाभास | दो विरोधी शब्द साथ-साथ | deafening silence, bitter sweet |
| विरोधाभासी कथन | कथन जो विरोधी लगे पर सच हो | The child is father of the man |
विरोधाभास और विरोधाभासी कथन का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। पहला केवल दो शब्दों का जोड़ है, जबकि दूसरा एक पूरा कथन होता है जो ऊपर से असंगत लगता है पर गहराई में सही निकलता है।
✗ deafening silence एक विरोधाभासी कथन है | ✓ यह विरोधाभास है, क्योंकि केवल दो विरोधी शब्द साथ रखे गए हैं; विरोधाभासी कथन पूरा वाक्य होता है
व्यंग्य के तीन प्रकार
- शाब्दिक व्यंग्य — जो कहा गया उसका उल्टा आशय हो।
- परिस्थितिजन्य व्यंग्य — जो हुआ वह अपेक्षा के ठीक विपरीत हो, जैसे अग्निशमन केंद्र में आग लग जाना।
- नाटकीय व्यंग्य — दर्शक वह जानते हों जो पात्र नहीं जानता।
नाटकीय व्यंग्य शेक्सपियर की त्रासदियों का प्रमुख साधन है और इसीलिए वह साहित्य वाले अध्याय से जुड़ जाता है। परीक्षा प्रायः स्थिति देकर पूछती है कि यह कौन-सा व्यंग्य है।
अतिशयोक्ति और उसका उल्टा
अतिशयोक्ति में बात बढ़ाकर कही जाती है और उसका उद्देश्य झूठ बोलना नहीं, प्रभाव पैदा करना होता है। सुनने वाला भी जानता है कि यह शब्दशः सच नहीं है।
इसका उल्टा न्यूनोक्ति है, जिसमें बात जान-बूझकर घटाकर कही जाती है, जैसे किसी बड़ी चोट को मामूली खरोंच कह देना। यह भी प्रभाव पैदा करने की ही युक्ति है और परीक्षा में जोड़ी बनाकर पूछी जाती है।
दो और जानने लायक
प्रतिपक्ष में दो विरोधी विचार संतुलित रूप में रखे जाते हैं, जैसे Man proposes, God disposes। यह विरोधाभास से अलग है, क्योंकि यहाँ विरोध शब्दों में नहीं, पूरे वाक्यांशों में है।
उपलक्षण में किसी वस्तु का एक भाग पूरी वस्तु के लिए प्रयोग होता है, जैसे All hands on deck में hands से पूरा व्यक्ति। यह अलंकार भी विकल्पों में रखा जाता है।
इस समूह में उत्तर तक पहुँचने का तरीका यही है — पहले पूछिए कि कहा क्या गया, फिर पूछिए कि आशय क्या है। दोनों एक हों तो यह अलंकार नहीं; अलग हों तो देखिए कि अंतर बढ़ाने का है, उलटने का है या विरोध का।
TRE संकेत: विरोधाभास और विरोधाभासी कथन का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। व्यंग्य के तीन प्रकार भी तयशुदा प्रश्न हैं। अतिशयोक्ति और न्यूनोक्ति की जोड़ी तथा प्रतिपक्ष का उदाहरण भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- अतिशयोक्ति में बात प्रभाव के लिए बढ़ाकर कही जाती है।
- न्यूनोक्ति उसका उल्टा है, जिसमें बात घटाकर कही जाती है।
- व्यंग्य में कहा कुछ जाता है और आशय उल्टा होता है।
- व्यंग्य के तीन प्रकार शाब्दिक, परिस्थितिजन्य और नाटकीय हैं।
- विरोधाभास दो विरोधी शब्दों का जोड़ है।
- विरोधाभासी कथन पूरा वाक्य होता है जो असंगत लगकर भी सही निकलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विरोधाभास और विरोधाभासी कथन में क्या अंतर है?
विरोधाभास केवल दो विरोधी शब्दों को साथ रख देना है, जैसे deafening silence या bitter sweet। विरोधाभासी कथन एक पूरा वाक्य होता है जो पहली नज़र में असंगत लगता है पर सोचने पर सही निकलता है, जैसे The child is father of the man। एक शब्द स्तर पर है और दूसरा विचार स्तर पर।
नाटकीय व्यंग्य क्या होता है?
वह स्थिति जिसमें दर्शक या पाठक कोई बात जानते हैं और मंच पर मौजूद पात्र नहीं जानता। इससे उसके हर वाक्य का अर्थ दो स्तरों पर बन जाता है और तनाव बढ़ता है। शेक्सपियर की त्रासदियों में यह सबसे अधिक प्रयोग हुआ है और परीक्षा प्रायः स्थिति देकर इसका नाम पूछती है।
अतिशयोक्ति को झूठ क्यों नहीं माना जाता?
क्योंकि उसका उद्देश्य धोखा देना नहीं, प्रभाव पैदा करना है, और सुनने वाला भी जानता है कि बात शब्दशः सच नहीं है। जब कोई कहता है कि उसने यह बात लाखों बार कही, तो कोई गिनती नहीं करता — सब समझ जाते हैं कि उसका आशय बार-बार कहने से है।
परिस्थितिजन्य व्यंग्य कैसे पहचानें?
देखिए कि जो हुआ वह अपेक्षा के ठीक उल्टा है या नहीं। अग्निशमन केंद्र में आग लग जाना, तैराकी सिखाने वाले का डूब जाना, या चोरी रोकने वाले उपकरण का चोरी हो जाना — ये सब परिस्थितिजन्य व्यंग्य हैं। यहाँ किसी ने कुछ उल्टा कहा नहीं, बल्कि घटना ही उल्टी घट गई।
