स्वतंत्रता, विभाजन एवं रियासतों का एकीकरण
Independence, Partition and the Integration of States
यह अध्याय स्वतंत्रता संग्राम को उसके अंत तक ले जाता है और इससे प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया, विभाजन का आधार, और रियासतों का विलय कैसे हुआ। तीनों की तिथियाँ स्पष्ट हैं, इसलिए यह भाग अंक देने वाला है।
सत्ता हस्तांतरण तक का रास्ता
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1942 | क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन |
| 1946 | कैबिनेट मिशन योजना; संविधान सभा का गठन |
| 1946 | अंतरिम सरकार का गठन |
| 1947 | माउंटबेटन योजना, 3 जून |
| 1947 | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, जुलाई |
| 1947 | 15 अगस्त को स्वतंत्रता |
कैबिनेट मिशन 1946 में आया और उसी की सिफ़ारिश पर संविधान सभा बनी। माउंटबेटन योजना 3 जून 1947 को घोषित हुई, जिसमें विभाजन की रूपरेखा दी गई, और उसी के आधार पर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद ने पारित किया।
विभाजन
विभाजन की सीमा तय करने के लिए सर सिरिल रैडक्लिफ़ की अध्यक्षता में सीमा आयोग बना, और वह रेखा रैडक्लिफ़ रेखा कहलाती है। बंगाल और पंजाब दोनों प्रांत बाँटे गए।
- विभाजन के साथ इतिहास का सबसे बड़ा जनसंख्या स्थानांतरण हुआ।
- व्यापक हिंसा और विस्थापन ने लाखों परिवारों को उजाड़ा।
- संपत्ति, सेना और खज़ाने का बँटवारा भी करना पड़ा।
- कश्मीर का प्रश्न इसी समय से अनसुलझा रह गया।
गांधीजी विभाजन के समय दिल्ली में नहीं थे, वे नोआखली और कलकत्ता में सांप्रदायिक शांति के प्रयास में लगे रहे। यह तथ्य परीक्षा में आया है।
रियासतों का एकीकरण
स्वतंत्रता के समय लगभग पाँच सौ पैंसठ देशी रियासतें थीं, जिन्हें भारत या पाकिस्तान में मिलने या स्वतंत्र रहने का विकल्प मिला था। इस काम का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया, जिन्हें लौह पुरुष कहा जाता है, और उनके सचिव वी. पी. मेनन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
| रियासत | कैसे मिली |
|---|---|
| अधिकांश रियासतें | विलय पत्र पर हस्ताक्षर से |
| जूनागढ़ | जनमत संग्रह के बाद |
| हैदराबाद | पुलिस कार्रवाई से, 1948 |
| जम्मू-कश्मीर | विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद |
विलय पत्र में रियासतें रक्षा, विदेश और संचार — इन तीन विषयों पर केंद्र का अधिकार स्वीकार करती थीं। यह सीमित शुरुआत आगे चलकर पूर्ण एकीकरण में बदली।
✗ सभी रियासतें स्वेच्छा से बिना किसी कठिनाई के भारत में मिल गईं | ✓ अधिकांश स्वेच्छा से मिलीं, पर जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर के मामले अलग-अलग तरीक़ों से सुलझाने पड़े
स्वतंत्रता से गणतंत्र तक
संविधान सभा का गठन 1946 में हुआ और उसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। डॉ. राजेंद्र प्रसाद उसके स्थायी अध्यक्ष बने, जो बिहार से थे, और डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष।
संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिस दिन भारत गणतंत्र बना। इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने।
इस अध्याय की तिथियाँ एक क्रम में हैं और उसी क्रम में याद कीजिए — 1946 में संविधान सभा, 1947 में स्वतंत्रता, 1949 में संविधान अंगीकृत और 1950 में लागू। क्रम बन जाने पर तिथियाँ आपस में नहीं बदलतीं।
TRE संकेत: सरदार पटेल और रियासतों का एकीकरण लगभग हर बार आता है। रैडक्लिफ़ रेखा भी तयशुदा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष बिहार से जुड़ा सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है।
60 सेकंड का रिवीजन
- कैबिनेट मिशन 1946 में आया और उसी से संविधान सभा बनी।
- माउंटबेटन योजना 3 जून 1947 को घोषित हुई।
- विभाजन की सीमा रैडक्लिफ़ रेखा कहलाती है।
- रियासतों के एकीकरण का नेतृत्व सरदार पटेल ने किया।
- विलय पत्र में रक्षा, विदेश और संचार केंद्र को सौंपे गए।
- संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और भारत गणतंत्र बना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रियासतों का एकीकरण कैसे संभव हुआ?
मुख्यतः बातचीत और विलय पत्र के माध्यम से, जिसका नेतृत्व सरदार पटेल ने किया और वी. पी. मेनन ने उनकी सहायता की। रियासतों को पहले केवल रक्षा, विदेश और संचार पर केंद्र का अधिकार स्वीकार करना था, जिससे उन्हें निर्णय आसान लगा। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर के मामले अलग तरीक़ों से सुलझाए गए।
रैडक्लिफ़ रेखा क्या है?
यह भारत और पाकिस्तान के बीच खींची गई सीमा रेखा है, जिसे सर सिरिल रैडक्लिफ़ की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग ने तय किया। बंगाल और पंजाब दोनों प्रांतों को इसी रेखा से बाँटा गया। रेखा की घोषणा स्वतंत्रता के बाद हुई, जिससे भ्रम और अव्यवस्था और बढ़ गई।
संविधान सभा से जुड़े बिहार के कौन-से नाम हैं?
सबसे प्रमुख नाम डॉ. राजेंद्र प्रसाद का है, जो संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष रहे और बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति बने। वे चंपारण सत्याग्रह से लेकर संविधान निर्माण तक हर बड़े मोड़ पर सक्रिय रहे, इसलिए बिहार की परीक्षाओं में उनका नाम बार-बार आता है।
संविधान 26 जनवरी को ही क्यों लागू किया गया?
क्योंकि 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन के बाद पहली बार पूर्ण स्वराज दिवस मनाया था। उस तिथि का प्रतीकात्मक महत्व बनाए रखने के लिए संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकार करने के बाद भी लागू 26 जनवरी 1950 को किया गया, और तभी से यह गणतंत्र दिवस है।
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