भारतीय संविधान एवं शासन व्यवस्था
भारतीय संविधान एवं शासन व्यवस्था
सामान्य जागरूकता भाग-II के 40 प्रश्नों वाले पत्र के पाँच बराबर हिस्सों में से एक है, इसलिए यहाँ से लगभग 8 प्रश्न आते हैं और उनमें 2 से 3 राजव्यवस्था से रहते हैं। प्रश्न तथ्यपरक और कथन-आधारित होते हैं — कोई अनुच्छेद संख्या, कोई संशोधन, या कोई संस्था और उसका काम। यहाँ गहराई से अधिक सटीकता काम आती है।
संविधान का निर्माण
संविधान सभा का गठन 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत हुआ। तीन नाम बार-बार पूछे जाते हैं।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद — संविधान सभा के अध्यक्ष, और बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति। इनका जन्म बिहार में हुआ था, इसीलिए राज्य स्तर के पत्रों में ये सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
- डॉ. भीमराव आंबेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष।
- सच्चिदानंद सिन्हा — पहली बैठक के अस्थायी सभापति, ये भी बिहार से।
संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। दोनों तिथियाँ अलग-अलग याद रखिए — प्रश्न प्रायः इन्हें आपस में बदल देता है।
✗ संविधान 26 जनवरी 1950 को अंगीकृत हुआ | ✓ उस दिन वह लागू हुआ; अंगीकृत 26 नवंबर 1949 को हुआ
प्रस्तावना
प्रस्तावना भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित करती है। समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता — ये तीन शब्द मूल प्रस्तावना में नहीं थे; इन्हें 42वें संशोधन, 1976 ने जोड़ा।
42वें संशोधन को लघु संविधान कहा जाता है, क्योंकि इसने सबसे अधिक बदलाव किए। इसी संशोधन ने भाग IVA में मौलिक कर्तव्य भी जोड़े।
मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| मौलिक अधिकार | भाग III, अनुच्छेद 12 से 35; अब कुल 6 |
| संपत्ति का अधिकार | 44वें संशोधन 1978 से हटाया गया; अब अनुच्छेद 300A |
| अनुच्छेद 21A | 86वें संशोधन 2002 से जोड़ा; RTE अधिनियम का आधार |
| मौलिक कर्तव्य | भाग IVA, अनुच्छेद 51A |
| नीति निर्देशक तत्व | भाग IV |
अनुच्छेद 21A शिक्षक पद के उम्मीदवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 इसी से निकला है। यही आपकी नौकरी का विधिक आधार है।
याद रखने का सूत्र: 42वाँ (1976) जोड़ता है — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता और मौलिक कर्तव्य। 44वाँ (1978) हटाता है — संपत्ति का अधिकार। 86वाँ (2002) देता है — अनुच्छेद 21A।
TRE संकेत: दो तिथियाँ जोड़े में याद कीजिए — 26 नवंबर 1949 अंगीकृत, 26 जनवरी 1950 लागू। तीन संशोधन संख्याएँ — 42, 44, 86 — और हर एक के साथ एक बदलाव। बिहार वाली कड़ी दोहरी है: राजेंद्र प्रसाद और सच्चिदानंद सिन्हा दोनों बिहार से, इसलिए राज्य के पत्र में यह जोड़ी बार-बार लौटती है।
60 सेकंड का रिवीजन
- संविधान सभा 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत बनी।
- राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष, आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष, सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी सभापति।
- अंगीकृत 26 नवंबर 1949, लागू 26 जनवरी 1950।
- समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता 42वें संशोधन 1976 से जुड़े।
- संपत्ति का अधिकार 44वें संशोधन 1978 से हटा; अब अनुच्छेद 300A।
- अनुच्छेद 21A 86वें संशोधन 2002 से आया — RTE का आधार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे और आगे चलकर भारत के पहले राष्ट्रपति बने। इसकी पहली बैठक की अध्यक्षता अस्थायी सभापति के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी। दोनों बिहार से थे, इसीलिए राज्य के शिक्षक पत्रों में यह जोड़ी बार-बार आती है।
प्रस्तावना में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द किस संशोधन से जुड़े?
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े। इतने बड़े बदलाव के कारण इसे लघु संविधान कहा जाता है। इसी संशोधन ने भाग IVA में मौलिक कर्तव्य भी जोड़े।
अनुच्छेद 21A क्या है और शिक्षक परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है। इसे 86वें संशोधन ने 2002 में जोड़ा और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 इसे लागू करता है। शिक्षक पद के लिए यही अनुच्छेद आपकी नौकरी का विधिक आधार है।
क्या संपत्ति का अधिकार आज भी मौलिक अधिकार है?
नहीं। 44वें संशोधन, 1978 ने इसे भाग III से हटा दिया। अब यह अनुच्छेद 300A के अंतर्गत एक संवैधानिक विधिक अधिकार है, यानी इसे साधारण कानून से नियंत्रित किया जा सकता है और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे लागू नहीं कराया जा सकता। यह बदलाव एक पंक्ति का तयशुदा प्रश्न है।
