न्यायपालिका, संघवाद एवं आपातकालीन उपबंध
The Judiciary, Federalism and Emergency Provisions
यह अध्याय संविधान के तीन अलग-अलग हिस्सों को जोड़ता है और प्रश्न प्रायः तीनों में से किसी एक पर केंद्रित रहता है — न्यायपालिका की स्वतंत्रता, तीन सूचियों का बँटवारा, और आपातकाल के प्रकार। तीनों को अलग-अलग तैयार कीजिए।
न्यायपालिका
भारत में एकीकृत न्याय व्यवस्था है, यानी उच्चतम न्यायालय से लेकर ज़िला न्यायालय तक एक ही शृंखला बनती है। यह अमेरिका की दोहरी व्यवस्था से अलग है और परीक्षा में यह अंतर पूछा जाता है।
- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
- उनकी सेवानिवृत्ति आयु पैंसठ वर्ष और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की बासठ वर्ष है।
- उन्हें महाभियोग से ही हटाया जा सकता है।
- न्यायिक पुनरावलोकन से न्यायालय किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
- जनहित याचिका से कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक हित में न्यायालय जा सकता है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता कई उपायों से सुरक्षित की गई है — कठिन निष्कासन प्रक्रिया, निश्चित वेतन जो संचित निधि से आता है, और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हीं न्यायालयों में वकालत पर रोक।
संघवाद और शक्तियों का बँटवारा
| सूची | किसके पास | उदाहरण |
|---|---|---|
| संघ सूची | केंद्र | रक्षा, विदेश, मुद्रा, रेल |
| राज्य सूची | राज्य | पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य |
| समवर्ती सूची | दोनों | शिक्षा, वन, विवाह, दंड विधि |
शिक्षा मूल संविधान में राज्य सूची में थी और बयालीसवें संशोधन, 1976 से उसे समवर्ती सूची में लाया गया। यह तथ्य शिक्षक भर्ती परीक्षा में विशेष रूप से पूछा जाता है।
यदि किसी विषय पर केंद्र और राज्य दोनों के कानून टकराएँ तो केंद्र का कानून प्रभावी रहता है। जो विषय किसी सूची में नहीं हैं, उन पर कानून बनाने की अवशिष्ट शक्ति केंद्र के पास है।
✗ शिक्षा आरंभ से ही समवर्ती सूची में थी | ✓ वह मूल संविधान में राज्य सूची में थी और 1976 के बयालीसवें संशोधन से समवर्ती सूची में लाई गई
आपातकालीन उपबंध
| प्रकार | अनुच्छेद | किस स्थिति में |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय आपातकाल | 352 | युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह |
| राष्ट्रपति शासन | 356 | राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता |
| वित्तीय आपातकाल | 360 | वित्तीय स्थिरता को ख़तरा |
अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल तीन बार लगाया जा चुका है और उनमें 1975 वाला सबसे अधिक चर्चित रहा। चवालीसवें संशोधन से इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए शर्तें कड़ी की गईं और आंतरिक अशांति शब्द की जगह सशस्त्र विद्रोह रखा गया।
वित्तीय आपातकाल भारत में आज तक कभी नहीं लगाया गया — यह तथ्य परीक्षा में सीधे पूछा जाता है। आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 और 21 को स्थगित नहीं किया जा सकता, जो चवालीसवें संशोधन की महत्वपूर्ण देन है।
तीनों आपातकालों को उनके अनुच्छेद से जोड़कर याद कीजिए — 352 राष्ट्रीय, 356 राज्य और 360 वित्तीय। संख्या के साथ याद करने पर वे कभी आपस में नहीं बदलतीं।
TRE संकेत: शिक्षा 1976 में समवर्ती सूची में आई शिक्षक भर्ती में सबसे अधिक पूछा जाता है। वित्तीय आपातकाल कभी नहीं लगा भी तयशुदा है। अनुच्छेद 20 और 21 स्थगित नहीं हो सकते भी सीधे आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- भारत में एकीकृत न्याय व्यवस्था है।
- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु पैंसठ वर्ष है।
- शक्तियाँ संघ, राज्य और समवर्ती तीन सूचियों में बँटी हैं।
- शिक्षा 1976 में राज्य सूची से समवर्ती सूची में लाई गई।
- अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास हैं।
- वित्तीय आपातकाल आज तक कभी नहीं लगाया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिक्षा को समवर्ती सूची में क्यों लाया गया?
1976 के बयालीसवें संशोधन से यह बदलाव किया गया, ताकि पूरे देश में शिक्षा की न्यूनतम गुणवत्ता और समान मानक बनाए रखने में केंद्र भी भूमिका निभा सके। इसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा से जुड़े केंद्रीय कानून बनाना संभव हुआ, जबकि क्रियान्वयन मुख्यतः राज्यों के पास रहा।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की गई है?
कई उपायों से। न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया बहुत कठिन है और वह केवल महाभियोग से संभव है। उनका वेतन संचित निधि से आता है, इसलिए उस पर संसद में मतदान नहीं होता। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हीं न्यायालयों में वकालत पर रोक है, जिससे निर्णय प्रभावित न हों।
न्यायिक पुनरावलोकन का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि न्यायालय संसद या विधानमंडल के बनाए किसी कानून की संवैधानिकता जाँच सकता है और यदि वह संविधान के विरुद्ध हो तो उसे अमान्य घोषित कर सकता है। यही शक्ति संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखती है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।
आपातकाल के दौरान कौन-से अधिकार सुरक्षित रहते हैं?
अनुच्छेद 20 और 21 किसी भी स्थिति में स्थगित नहीं किए जा सकते। अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि से जुड़ी सुरक्षा देता है और अनुच्छेद 21 प्राण तथा दैहिक स्वतंत्रता की। यह सुरक्षा चवालीसवें संशोधन से जोड़ी गई, ताकि आपातकाल के दुरुपयोग की पुनरावृत्ति न हो।
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