कारक एवं विभक्ति
कारक एवं विभक्ति
कारक से 2 प्रश्न लगभग हर वर्ष आते हैं और यह वाक्य विचार का सबसे नियमबद्ध भाग है। आठ कारक, उनके चिह्न और उनसे बनने वाला अर्थ — तीनों एक साथ याद कर लेने पर ये प्रश्न बिना सोचे हल हो जाते हैं।
आठ कारक एवं उनके चिह्न
| कारक | विभक्ति चिह्न | अर्थ |
|---|---|---|
| कर्ता | ने | काम करने वाला |
| कर्म | को | जिस पर काम का प्रभाव |
| करण | से, के द्वारा | साधन |
| संप्रदान | के लिए, को | जिसके लिए काम हो |
| अपादान | से (अलग होना) | अलगाव |
| संबंध | का, के, की | संबंध बताना |
| अधिकरण | में, पर | आधार या स्थान |
| संबोधन | हे, अरे | पुकारना |
सबसे बड़ी कठिनाई करण और अपादान में है, क्योंकि दोनों का चिह्न से है। भेद अर्थ से होता है — यदि साधन का भाव हो तो करण, और यदि अलग होने का भाव हो तो अपादान।
✗ पेड़ से पत्ता गिरा — इसमें करण कारक है | ✓ यहाँ अलग होने का भाव है, इसलिए अपादान कारक है
दो उदाहरण साथ रखिए — मैं कलम से लिखता हूँ में कलम साधन है, इसलिए करण कारक; पेड़ से पत्ता गिरा में पत्ता पेड़ से अलग हो रहा है, इसलिए अपादान कारक।
कर्म और संप्रदान की उलझन
इन दोनों का चिह्न को हो सकता है। यहाँ भी भेद अर्थ से होता है — यदि काम का प्रभाव पड़ रहा हो तो कर्म, और यदि किसी के लिए कुछ किया जा रहा हो तो संप्रदान।
- राम ने श्याम को मारा — प्रभाव पड़ा, इसलिए कर्म कारक।
- राम ने श्याम को पुस्तक दी — श्याम के लिए दी गई, इसलिए संप्रदान कारक।
- गुरु को नमस्कार — आदर के लिए, इसलिए संप्रदान कारक।
ने का प्रयोग
कर्ता के साथ ने केवल तब लगता है जब क्रिया सकर्मक हो और भूतकाल में हो। राम ने पत्र लिखा — सही; राम ने हँसा — गलत, क्योंकि हँसना अकर्मक है।
परीक्षा की विधि: कारक पहचानने के लिए क्रिया से प्रश्न पूछिए — किसने, किसको, किससे, किसके लिए, कहाँ। जो प्रश्न उत्तर दे दे, वही कारक है।
TRE संकेत: करण और अपादान का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है — साधन हो तो करण, अलगाव हो तो अपादान। कर्म और संप्रदान का अंतर भी इसी तरह अर्थ से तय होता है। ने का नियम — सकर्मक क्रिया और भूतकाल — याद रखिए, क्योंकि अशुद्धि शोधन में भी यही नियम काम आता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- कारक आठ होते हैं और हर कारक का अपना विभक्ति चिह्न है।
- करण और अपादान दोनों का चिह्न से है; अर्थ से भेद होता है।
- साधन का भाव हो तो करण, अलग होने का भाव हो तो अपादान।
- प्रभाव पड़े तो कर्म, किसी के लिए हो तो संप्रदान कारक।
- संबंध कारक के चिह्न का, के, की हैं; अधिकरण के में और पर।
- ने केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करण और अपादान कारक में अंतर कैसे करें?
दोनों का चिह्न से है, इसलिए अर्थ देखना पड़ता है। यदि से किसी साधन या माध्यम की ओर संकेत करे तो करण कारक है, जैसे मैं कलम से लिखता हूँ। यदि अलग होने का भाव हो तो अपादान कारक है, जैसे पेड़ से पत्ता गिरा।
ने का प्रयोग कब होता है?
जब क्रिया सकर्मक हो और भूतकाल में हो। राम ने पत्र लिखा शुद्ध है, क्योंकि लिखना सकर्मक है और वाक्य भूतकाल का है। राम ने हँसा अशुद्ध है, क्योंकि हँसना अकर्मक क्रिया है और उसके साथ ने नहीं लगता।
कर्म और संप्रदान कारक में क्या अंतर है?
दोनों का चिह्न को हो सकता है। यदि काम का प्रभाव जिस पर पड़ रहा है वह बताया जाए तो कर्म कारक है, जैसे राम ने श्याम को मारा। यदि किसी के लिए कुछ किया जा रहा हो तो संप्रदान कारक है, जैसे राम ने श्याम को पुस्तक दी।
कारक पहचानने की सबसे आसान विधि क्या है?
क्रिया से प्रश्न पूछना। किसने पूछने पर कर्ता मिलता है, किसको पूछने पर कर्म, किससे पूछने पर करण या अपादान, किसके लिए पूछने पर संप्रदान और कहाँ पूछने पर अधिकरण। उत्तर देने वाला शब्द ही उस कारक में होता है।
