क्रिया, काल, वाच्य एवं अव्यय
Verb, Tense, Voice and Indeclinables
इस भाग से 2 प्रश्न आते हैं और इनमें वाच्य सबसे कठिन माना जाता है। सकर्मक-अकर्मक का भेद, तीन काल और उनके उपभेद, तथा तीनों वाच्य — इन तीनों को उदाहरण के साथ पकड़ लेने पर यह पूरा भाग सरल हो जाता है।
क्रिया के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक | कर्म होता है | राम पत्र लिखता है |
| अकर्मक | कर्म नहीं होता | राम हँसता है |
| प्रेरणार्थक | किसी और से कराना | राम ने पत्र लिखवाया |
| संयुक्त | दो क्रियाओं का मेल | वह पढ़ने लगा |
पहचान का सूत्र सरल है — क्रिया के साथ क्या या किसको पूछिए। उत्तर मिले तो सकर्मक, न मिले तो अकर्मक। हँसना, रोना, सोना, दौड़ना सामान्यतः अकर्मक हैं।
✗ सोना सकर्मक क्रिया है | ✓ यह अकर्मक है, क्योंकि इसके साथ क्या पूछने पर कोई कर्म नहीं मिलता
काल के भेद
| काल | उपभेद | उदाहरण |
|---|---|---|
| भूतकाल | सामान्य, आसन्न, पूर्ण, अपूर्ण, संदिग्ध, हेतुहेतुमद् | वह गया, वह गया है |
| वर्तमान | सामान्य, अपूर्ण, संदिग्ध | वह जाता है, वह जा रहा है |
| भविष्यत् | सामान्य, संभाव्य, हेतुहेतुमद् | वह जाएगा, वह जाए शायद |
भूतकाल के छह उपभेद हैं, यह संख्या स्वयं प्रश्न बनती है। हेतुहेतुमद् भूत वह है जिसमें एक काम का न होना दूसरे पर निर्भर हो — यदि वह आता तो मैं जाता।
वाच्य के तीन भेद
| वाच्य | प्रधानता | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृवाच्य | कर्ता की | राम पत्र लिखता है |
| कर्मवाच्य | कर्म की | राम द्वारा पत्र लिखा जाता है |
| भाववाच्य | भाव की | मुझसे चला नहीं जाता |
भाववाच्य केवल अकर्मक क्रिया से बनता है और प्रायः असमर्थता या निषेध का भाव देता है — मुझसे उठा नहीं जाता, अब सोया नहीं जाता। यही इसकी सबसे भरोसेमंद पहचान है।
आसान पहचान: वाक्य में द्वारा या से आए और क्रिया जाना के रूप के साथ हो, तो वह कर्मवाच्य या भाववाच्य है; कर्म हो तो कर्मवाच्य, न हो तो भाववाच्य।
अव्यय
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल से नहीं बदलता, वे अव्यय कहलाते हैं। इनके चार भेद हैं — क्रियाविशेषण (धीरे, आज), संबंधबोधक (के ऊपर, के बिना), समुच्चयबोधक (और, किंतु) और विस्मयादिबोधक (अरे, वाह)।
TRE संकेत: भाववाच्य केवल अकर्मक क्रिया से बनता है — यह एक वाक्य कई प्रश्नों का उत्तर दे देता है। भूतकाल के छह उपभेद की संख्या याद रखिए। सकर्मक-अकर्मक के लिए क्रिया से क्या पूछने की आदत डालिए। अव्यय की परिभाषा में मुख्य शब्द है — रूप नहीं बदलता।
60 सेकंड का रिवीजन
- क्रिया से क्या पूछकर सकर्मक और अकर्मक का भेद तय होता है।
- प्रेरणार्थक क्रिया में काम किसी और से कराया जाता है।
- भूतकाल के छह, वर्तमान के तीन और भविष्यत् के तीन उपभेद हैं।
- वाच्य तीन — कर्तृ, कर्म और भाव।
- भाववाच्य केवल अकर्मक क्रिया से बनता है और असमर्थता दिखाता है।
- अव्यय का रूप लिंग, वचन, कारक या काल से नहीं बदलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सकर्मक और अकर्मक क्रिया कैसे पहचानें?
क्रिया के साथ क्या या किसको पूछिए। यदि उत्तर मिल जाए तो क्रिया सकर्मक है, जैसे राम पत्र लिखता है में क्या लिखता है का उत्तर पत्र मिलता है। उत्तर न मिले तो अकर्मक है, जैसे राम हँसता है।
भाववाच्य कब बनता है?
केवल अकर्मक क्रिया से, और प्रायः असमर्थता या निषेध के अर्थ में। मुझसे चला नहीं जाता तथा अब बैठा नहीं जाता इसके मानक उदाहरण हैं। इसमें न कर्ता की प्रधानता होती है, न कर्म की, बल्कि भाव की होती है।
हेतुहेतुमद् भूतकाल क्या है?
वह भूतकाल जिसमें एक काम का होना या न होना दूसरे काम पर निर्भर हो। यदि वह आता तो मैं जाता, इसका उदाहरण है। इसमें शर्त का भाव रहता है और दोनों क्रियाएँ आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिए इसका नाम भी जोड़ा हुआ है।
अव्यय की पहचान क्या है?
अव्यय वह शब्द है जिसका रूप लिंग, वचन, कारक या काल बदलने पर भी नहीं बदलता। धीरे, आज, और, किंतु, अरे — ये सब अव्यय हैं। इनके चार भेद हैं — क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
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