लिंग, वचन एवं पुरुष
Gender, Number and Person
इस विषय से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और ये प्रायः स्त्रीलिंग रूप या बहुवचन बनाने के होते हैं। हिंदी में लिंग निर्धारण के नियम पूरी तरह तार्किक नहीं हैं, इसलिए यहाँ नियम के साथ अपवाद भी याद करने पड़ते हैं।
लिंग
हिंदी में केवल दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत का नपुंसक लिंग हिंदी में नहीं चलता, और यह बात अक्सर प्रश्न बनती है।
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| आ, आव, पन, पा से अंत — पुल्लिंग | मोटापा, बहाव, बचपन |
| ई, इया, आई, आवट से अंत — स्त्रीलिंग | लड़की, डिबिया, चढ़ाई, सजावट |
| नदियों के नाम — प्रायः स्त्रीलिंग | गंगा, यमुना, सरस्वती |
| पर्वतों के नाम — पुल्लिंग | हिमालय, विंध्य |
| ग्रहों के नाम — पुल्लिंग | सूर्य, चंद्र, मंगल |
अपवाद भी याद रखिए — सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियाँ होकर भी पुल्लिंग हैं, और दही, मोती, पानी ई में समाप्त होकर भी पुल्लिंग हैं। परीक्षा प्रायः अपवाद से ही प्रश्न बनाती है।
✗ ब्रह्मपुत्र स्त्रीलिंग है क्योंकि यह नदी है | ✓ यह पुल्लिंग है और सिंधु के साथ यह मानक अपवाद है
स्त्रीलिंग बनाने के प्रत्यय
- ई — लड़का से लड़की, घोड़ा से घोड़ी।
- इन — धोबी से धोबिन, माली से मालिन।
- आनी — देवर से देवरानी, जेठ से जेठानी।
- इया — बेटा से बिटिया, डिब्बा से डिबिया।
- आइन — ठाकुर से ठकुराइन, पंडित से पंडिताइन।
कुछ शब्दों के स्त्रीलिंग बिलकुल अलग शब्द होते हैं — राजा से रानी, पिता से माता, विद्वान से विदुषी, कवि से कवयित्री। विदुषी और कवयित्री सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
वचन एवं पुरुष
हिंदी में दो वचन हैं — एकवचन और बहुवचन। आकारांत पुल्लिंग शब्द में आ का ए हो जाता है (लड़का से लड़के), और आकारांत स्त्रीलिंग में एँ जुड़ता है (माता से माताएँ)।
| पुरुष | सर्वनाम |
|---|---|
| उत्तम पुरुष | मैं, हम |
| मध्यम पुरुष | तू, तुम, आप |
| अन्य पुरुष | वह, वे, यह, ये |
आसान नियम: बहुवचन बनाते समय पहले लिंग देखिए। पुल्लिंग आकारांत में आ का ए, स्त्रीलिंग आकारांत में एँ, और ई से अंत होने वाले स्त्रीलिंग में इयाँ — लड़की से लड़कियाँ।
TRE संकेत: अपवाद ही प्रश्न बनते हैं — सिंधु और ब्रह्मपुत्र पुल्लिंग, दही और मोती पुल्लिंग। विदुषी और कवयित्री लगभग तय प्रश्न हैं। बहुवचन में पहले लिंग देखिए, फिर अंत्य स्वर — यही क्रम सही उत्तर तक ले जाता है। हिंदी में नपुंसक लिंग नहीं होता, यह भी पूछा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- हिंदी में केवल दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग।
- आ, आव, पन से अंत पुल्लिंग; ई, इया, आवट से अंत स्त्रीलिंग।
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी होकर भी पुल्लिंग हैं।
- विद्वान का स्त्रीलिंग विदुषी और कवि का कवयित्री है।
- पुल्लिंग आकारांत में आ का ए, स्त्रीलिंग आकारांत में एँ जुड़ता है।
- पुरुष तीन — उत्तम, मध्यम और अन्य।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदी में कितने लिंग होते हैं?
केवल दो — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत में तीसरा नपुंसक लिंग होता है, पर हिंदी ने उसे नहीं अपनाया। परीक्षा में यह प्रश्न सीधे पूछा जाता है और विकल्पों में तीन का उत्तर रखा जाता है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।
विद्वान और कवि का स्त्रीलिंग क्या है?
विद्वान का स्त्रीलिंग विदुषी है और कवि का कवयित्री। ये संस्कृत से आए शब्द हैं, इसलिए इनमें साधारण प्रत्यय नहीं लगता बल्कि रूप ही बदल जाता है। दोनों शब्द परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें अलग से याद रखना चाहिए।
नदी के नाम स्त्रीलिंग होते हैं तो सिंधु पुल्लिंग क्यों है?
क्योंकि हिंदी में लिंग निर्धारण पूरी तरह अर्थ पर नहीं, परंपरा और प्रयोग पर भी टिका है। सिंधु और ब्रह्मपुत्र इस नियम के मानक अपवाद हैं और इसी कारण परीक्षा इन्हीं से प्रश्न बनाती है, सामान्य नदियों से नहीं।
बहुवचन बनाने का सामान्य नियम क्या है?
पहले शब्द का लिंग देखिए, फिर उसका अंतिम स्वर। पुल्लिंग आकारांत में आ का ए होता है, जैसे लड़का से लड़के। स्त्रीलिंग आकारांत में एँ जुड़ता है, जैसे माता से माताएँ। ईकारांत स्त्रीलिंग में इयाँ आता है, जैसे लड़की से लड़कियाँ।
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