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लिंग, वचन, कारक एवं काल

By ExamAtlas · 29/8/2026

लिंग, वचन, कारक एवं काल

इस विषय से 2 प्रश्न आते हैं और अर्हता स्तर पर प्रश्न सीधे रूप बनाने के होते हैं — स्त्रीलिंग बनाइए, बहुवचन बनाइए, कारक बताइए। नियम कम हैं और अपवाद भी सीमित, इसलिए यहाँ तैयारी का प्रतिफल तेज़ी से मिलता है।

लिंग

हिंदी में केवल दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत का नपुंसक लिंग हिंदी में नहीं चलता, और यह बात सीधे पूछी जाती है।

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
लड़कालड़कीराजारानी
शिक्षकशिक्षिकापितामाता
धोबीधोबिनदेवरदेवरानी
नरनारीविद्वानविदुषी

अपवाद भी याद रखिए — सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी होकर भी पुल्लिंग हैं, और दही, मोती, पानी ई में समाप्त होकर भी पुल्लिंग। प्रश्न प्रायः अपवाद से ही बनता है।

हिंदी में तीन लिंग होते हैं  |   हिंदी में केवल दो — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग; नपुंसक लिंग संस्कृत में है

वचन

नियमएकवचनबहुवचन
आकारांत पुल्लिंग: आ का एलड़कालड़के
ईकारांत स्त्रीलिंग: इयाँलड़कीलड़कियाँ
आकारांत स्त्रीलिंग: एँमातामाताएँ
अन्य स्त्रीलिंग: एँपुस्तकपुस्तकें

बहुवचन बनाते समय क्रम यह रखिए — पहले लिंग देखिए, फिर अंतिम स्वर। यही दो कदम लगभग हर प्रश्न का उत्तर दे देते हैं।

कारक

कारकचिह्नउदाहरण
कर्तानेराम ने लिखा
कर्मकोश्याम को बुलाओ
करणसे (साधन)कलम से लिखा
अपादानसे (अलग होना)पेड़ से पत्ता गिरा
संबंधका, के, कीराम का घर
अधिकरणमें, परघर में, मेज़ पर

अर्हता स्तर पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला भेद करण और अपादान का है, क्योंकि दोनों का चिह्न से है। साधन का भाव हो तो करण, अलग होने का भाव हो तो अपादान।

काल

तीन काल हैं — भूत, वर्तमान और भविष्यत्। अर्हता पत्र में उपभेदों की गहराई नहीं पूछी जाती, केवल यह कि दिया गया वाक्य किस काल का है। वह गया — भूत; वह जाता है — वर्तमान; वह जाएगा — भविष्यत्।

आसान क्रम: लिंग देखिए, फिर वचन, फिर कारक चिह्न, फिर काल। यही क्रम आगे वाक्य शुद्धि में भी काम आता है, इसलिए इसे आदत बना लीजिए।

TRE संकेत: हिंदी में केवल दो लिंग — यह सीधा प्रश्न है और विकल्प में तीन भी रखा जाता है। सिंधु और ब्रह्मपुत्र पुल्लिंग तथा विद्वान से विदुषी दो तय अपवाद हैं। कारक में करण बनाम अपादान का भेद याद रखिए — साधन बनाम अलगाव। बहुवचन में पहले लिंग, फिर अंतिम स्वर।

60 सेकंड का रिवीजन

  • हिंदी में केवल दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग।
  • सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी होकर भी पुल्लिंग हैं।
  • विद्वान का स्त्रीलिंग विदुषी और राजा का रानी है।
  • बहुवचन में पहले लिंग देखिए, फिर अंतिम स्वर।
  • करण और अपादान दोनों का चिह्न से है; साधन बनाम अलगाव से भेद होता है।
  • तीन काल — भूत, वर्तमान और भविष्यत्।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी में कितने लिंग होते हैं?

केवल दो — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत में तीसरा नपुंसक लिंग होता है, पर हिंदी ने उसे नहीं अपनाया। परीक्षा में यह प्रश्न सीधे पूछा जाता है और विकल्पों में तीन का उत्तर भी रखा जाता है, इसलिए सावधानी चाहिए।

करण और अपादान कारक में अंतर कैसे करें?

दोनों का चिह्न से है, इसलिए अर्थ देखना पड़ता है। यदि से किसी साधन की ओर संकेत करे तो करण कारक है, जैसे कलम से लिखा। यदि अलग होने का भाव हो तो अपादान कारक है, जैसे पेड़ से पत्ता गिरा।

बहुवचन बनाने का नियम क्या है?

पहले शब्द का लिंग देखिए, फिर उसका अंतिम स्वर। आकारांत पुल्लिंग में आ का ए होता है, जैसे लड़का से लड़के। ईकारांत स्त्रीलिंग में इयाँ आता है, जैसे लड़की से लड़कियाँ। आकारांत स्त्रीलिंग में एँ जुड़ता है, जैसे माता से माताएँ।

कौन-से अपवाद सबसे अधिक पूछे जाते हैं?

सिंधु और ब्रह्मपुत्र, जो नदी होकर भी पुल्लिंग हैं, तथा दही, मोती और पानी, जो ई में समाप्त होकर भी पुल्लिंग हैं। स्त्रीलिंग में विद्वान से विदुषी और कवि से कवयित्री सबसे अधिक पूछे जाने वाले रूप हैं।