साहित्यिक शब्दावली, विधाएँ एवं आंदोलन
साहित्यिक शब्दावली, विधाएँ एवं आंदोलन
शब्दावली से लगभग दो प्रश्न आते हैं और यही वह भाग है जहाँ ऑनर्स स्तर का परीक्षार्थी सबसे मज़बूत होना चाहिए। प्रश्नपत्र या तो परिभाषा देकर शब्द पूछता है या लक्षण देकर आंदोलन, इसलिए हर शब्द को एक उदाहरण के साथ याद करना ही उसे टिकाऊ बनाता है।
संरचना और कथन से जुड़े शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कथानक | घटनाओं का क्रम और संयोजन |
| कथ्य | वह केंद्रीय विचार जिसे कृति खोलती है |
| नायक और प्रतिनायक | केंद्रीय पात्र और विरोधी शक्ति |
| स्वगत कथन | मंच पर अकेले रहकर अपने विचार बोलना |
| जनांतिक | दर्शकों से कही गई वह बात जो अन्य पात्र नहीं सुनते |
| विरेचन | त्रासदी से करुणा और भय का शमन |
| त्रासद दोष | वह दोष जो नायक के पतन का कारण बनता है |
| गुत्थी समाधान | कथानक का अंतिम सुलझाव |
स्वगत कथन और जनांतिक सबसे अधिक भ्रम पैदा करने वाली जोड़ी है। स्वगत कथन में पात्र अकेला होता है और अपने मन की बात कहता है, जबकि जनांतिक में दूसरे पात्र मौजूद तो होते हैं पर सुनते नहीं। Hamlet का प्रसिद्ध एकालाप स्वगत कथन है।
विरेचन और त्रासद दोष दोनों अरस्तू के काव्यशास्त्र से आते हैं, और प्रश्न कभी-कभी अर्थ नहीं बल्कि स्रोत पूछ लेता है।
✗ जनांतिक वह लंबा भाषण है जो मंच पर अकेले दिया जाता है | ✓ वह स्वगत कथन है; जनांतिक एक छोटी टिप्पणी होती है जिसे दूसरे पात्र नहीं सुनते
विधाएँ
- महाकाव्य — वीर विषय पर लंबी आख्यान कविता, जैसे Paradise Lost।
- शोकगीत — मृतक के लिए विलाप, जैसे ग्रे की Elegy।
- संबोधन गीत — किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव को औपचारिक संबोधन, जैसे कीट्स के ode।
- गाथागीत — सरल छंदों में आख्यान कविता, प्रायः अनाम और मौखिक परंपरा से।
- व्यंग्य — उपहास के माध्यम से मूर्खता या दोष उजागर करने वाली रचना।
- रूपक कथा — ऐसी कथा जिसके पात्र और घटनाएँ दूसरा सांकेतिक अर्थ भी रखते हैं।
शोकगीत और संबोधन गीत नियमित रूप से आपस में बदल दिए जाते हैं — शोकगीत विलाप करता है और संबोधन गीत संबोधित या प्रशंसा करता है। दोनों औपचारिक हैं और दोनों कविता हैं, इसीलिए परिभाषा अनुमान से नहीं, बिल्कुल सटीक होनी चाहिए।
आंदोलन
| आंदोलन | केंद्रीय लक्षण | जुड़े नाम |
|---|---|---|
| पुनर्जागरण | शास्त्रीय ज्ञान का पुनरुत्थान | स्पेंसर, मार्लो |
| आध्यात्मिक कविता | बुद्धि, असामान्य उपमा, तर्क | डन, मार्वेल |
| नवशास्त्रीयता | विवेक, व्यवस्था, व्यंग्य | पोप, ड्राइडन |
| स्वच्छंदतावाद | प्रकृति, कल्पना, भावना | वर्ड्सवर्थ, कीट्स |
| यथार्थवाद | साधारण जीवन बिना आदर्शीकरण के | डिकेंस, हार्डी |
| आधुनिकतावाद | प्रयोग और विखंडन | एलियट, जॉयस |
| उत्तर उपनिवेशवाद | साम्राज्य के बाद का लेखन | अचेबे, रुश्दी, रॉय |
आध्यात्मिक उपमा को अलग से समझिए — यह दो अत्यंत असमान वस्तुओं के बीच खींची गई लंबी और चौंकाने वाली तुलना है, जैसे डन का दो प्रेमियों की तुलना परकार की दो भुजाओं से करना। डन से जुड़े प्रश्नों में यह शब्द लगभग हर बार आता है।
गद्य रूप
निबंध किसी एक विषय पर लिखी छोटी गद्य रचना है और कहानी वह संक्षिप्त आख्यान जिसका एक ही प्रभाव हो। फ़्रांसिस बेकन को अंग्रेज़ी निबंध का जनक कहा जाता है और उनकी शैली सूत्रात्मक तथा संक्षिप्त मानी जाती है, जिसमें Of Studies सबसे अधिक उद्धृत है।
शब्दावली रटने के बजाय हर शब्द के साथ एक उदाहरण जोड़िए। परिभाषा भूल जाने पर भी उदाहरण याद रहता है और उसी से अर्थ लौट आता है।
TRE संकेत: स्वगत कथन और जनांतिक तथा शोकगीत और संबोधन गीत — ये दो जोड़ियाँ सबसे अधिक जाल के रूप में आती हैं। विरेचन, त्रासद दोष और आध्यात्मिक उपमा वे शब्द हैं जो ऑनर्स स्तर की पहचान बनते हैं। हर आंदोलन के साथ दो नाम याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- स्वगत कथन अकेले में बोला जाता है, जनांतिक दूसरे पात्र नहीं सुनते।
- विरेचन और त्रासद दोष दोनों अरस्तू के काव्यशास्त्र से आते हैं।
- शोकगीत विलाप करता है और संबोधन गीत संबोधित करता है।
- महाकाव्य लंबा और वीर विषय पर होता है; रूपक कथा दूसरा अर्थ रखती है।
- आध्यात्मिक उपमा दो असमान वस्तुओं की विस्तृत तुलना है।
- बेकन अंग्रेज़ी निबंध के जनक हैं और उनकी शैली सूत्रात्मक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वगत कथन और जनांतिक में क्या अंतर है?
स्वगत कथन में पात्र मंच पर अकेला होता है और अपने मन के विचार ज़ोर से कहता है, जैसे Hamlet का प्रसिद्ध एकालाप। जनांतिक एक छोटी टिप्पणी होती है जो दूसरे पात्रों की उपस्थिति में कही जाती है, जिसे दर्शक सुनते हैं पर मंच के अन्य पात्र नहीं।
आध्यात्मिक उपमा क्या होती है?
दो ऐसी वस्तुओं के बीच लंबी और जान-बूझकर चौंकाने वाली तुलना जो देखने में बिल्कुल असमान लगती हैं, और उस तुलना को विस्तार से निभाया जाता है। डन का दो प्रेमियों की तुलना परकार की दो भुजाओं से करना इसका मानक उदाहरण है, और डन का नाम आते ही यह शब्द पूछा जाता है।
शोकगीत और संबोधन गीत में क्या अंतर है?
शोकगीत किसी मृत व्यक्ति के लिए विलाप है, जैसे ग्रे की Elegy Written in a Country Churchyard। संबोधन गीत किसी व्यक्ति, वस्तु या अमूर्त भाव को दिया गया औपचारिक संबोधन है, जो प्रायः प्रशंसात्मक होता है, जैसे कीट्स की Ode to a Nightingale।
विरेचन और त्रासद दोष कहाँ से आए हैं?
दोनों अरस्तू के काव्यशास्त्र से। विरेचन वह प्रक्रिया है जिसमें त्रासदी देखकर दर्शक के मन की करुणा और भय शांत हो जाते हैं, और त्रासद दोष वह चूक या दोष है जो नायक के पतन का कारण बनता है। प्रश्न कभी-कभी अर्थ के बजाय स्रोत पूछ लेता है।
