लोकोक्तियाँ एवं वर्तनी शुद्धि
Proverbs and Correct Spelling
यह विषय दो हिस्सों में 2 प्रश्न देता है। लोकोक्तियाँ पूरी सीख देने वाले वाक्य हैं, और वर्तनी में यह पहचानना होता है कि दिए गए विकल्पों में शुद्ध रूप कौन-सा है। दोनों में जल्दबाज़ी सबसे बड़ी गलती है।
प्रमुख लोकोक्तियाँ
| लोकोक्ति | अर्थ |
|---|---|
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | काम न आने पर बहाना बनाना |
| अंधों में काना राजा | अयोग्यों में थोड़ा योग्य |
| ऊँट के मुँह में जीरा | आवश्यकता से बहुत कम |
| दूर के ढोल सुहावने | दूर की चीज़ अच्छी लगना |
| अपनी करनी पार उतरनी | अपने कर्म का ही फल |
| एक अनार सौ बीमार | वस्तु कम, चाहने वाले अधिक |
अंतर याद रखिए — लोकोक्ति अपने आप में पूरा वाक्य है और कोई सीख देती है, जबकि मुहावरा वाक्यांश है और वाक्य में जुड़कर ही अर्थ देता है।
✗ नौ दो ग्यारह होना एक लोकोक्ति है | ✓ यह मुहावरा है; लोकोक्ति पूरा वाक्य होती है और सीख देती है
वर्तनी की सामान्य अशुद्धियाँ
| अशुद्ध | शुद्ध | अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|---|---|
| अनुगृह | अनुग्रह | आर्शीवाद | आशीर्वाद |
| उज्जवल | उज्ज्वल | परिक्षा | परीक्षा |
| श्रृंगार | शृंगार | पुज्य | पूज्य |
| सम्मान्य | सम्माननीय | अहिल्या | अहल्या |
| ब्राम्हण | ब्राह्मण | निरिक्षण | निरीक्षण |
सबसे अधिक गलत लिखे जाने वाले तीन शब्द आशीर्वाद, उज्ज्वल और शृंगार हैं। ध्यान दीजिए कि शृंगार में श के नीचे ऋ लगता है, श्र नहीं — यह अंतर विकल्पों में जान-बूझकर रखा जाता है।
ध्यान देने योग्य नियम
- परीक्षा, निरीक्षण, समीक्षा — इन सबमें ई की मात्रा दीर्घ है।
- अनुग्रह, विग्रह, परिग्रह — इनमें ग्रह है, गृह नहीं।
- ब्राह्मण में ह्म है, म्ह नहीं।
- उज्ज्वल में ज्ज्व है, ज्जव नहीं।
आसान जाँच: शब्द को धीरे-धीरे बोलकर देखिए कि कौन-सी ध्वनि लंबी है और कौन-सी छोटी। परीक्षा में ई दीर्घ है, इसलिए वह परिक्षा नहीं हो सकता।
TRE संकेत: मुहावरा और लोकोक्ति का अंतर लगभग हर वर्ष पूछा जाता है — लोकोक्ति पूरा वाक्य, मुहावरा वाक्यांश। वर्तनी में आशीर्वाद, उज्ज्वल, शृंगार, ब्राह्मण चार सबसे तय शब्द हैं। शिक्षक भर्ती के पत्र में शुद्ध वर्तनी को अतिरिक्त महत्व मिलता है, क्योंकि यही कक्षा में सीधे काम आती है।
60 सेकंड का रिवीजन
- लोकोक्ति पूरा वाक्य है और सीख देती है; मुहावरा वाक्यांश है।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा — काम न आने पर बहाना बनाना।
- ऊँट के मुँह में जीरा — आवश्यकता से बहुत कम।
- शुद्ध रूप — आशीर्वाद, उज्ज्वल, शृंगार, ब्राह्मण।
- परीक्षा, निरीक्षण और समीक्षा में ई दीर्घ है।
- अनुग्रह में ग्रह है, गृह नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लोकोक्ति की पहचान क्या है?
वह अपने आप में एक पूरा वाक्य होती है, किसी अनुभव या सीख को व्यक्त करती है और उसे वाक्य में जोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। नाच न जाने आँगन टेढ़ा और अंधों में काना राजा इसके उदाहरण हैं। मुहावरा इसके विपरीत अधूरा वाक्यांश रहता है।
शृंगार की शुद्ध वर्तनी क्या है?
शृंगार, जिसमें श के नीचे ऋ की मात्रा लगती है। श्रृंगार लिखना अशुद्ध है, क्योंकि उसमें श्र और ऋ दोनों आ जाते हैं। विकल्पों में दोनों रूप साथ रखे जाते हैं, इसलिए यह अंतर पहले से पक्का कर लेना चाहिए।
अनुग्रह और गृह में क्या अंतर है?
अनुग्रह में ग्रह है, जिसका अर्थ ग्रहण करने से जुड़ा है, और पूरे शब्द का अर्थ कृपा होता है। गृह अलग शब्द है जिसका अर्थ घर होता है। इसी कारण अनुगृह लिखना अशुद्ध माना जाता है और परीक्षा में यह अंतर पूछा जाता है।
वर्तनी के प्रश्न में गलती से कैसे बचें?
शब्द को धीरे-धीरे बोलकर मात्रा की लंबाई जाँचिए और फिर विकल्पों को एक-एक करके काटिए। परीक्षा, निरीक्षण और समीक्षा में ई दीर्घ है, इसलिए छोटी इ वाला विकल्प तुरंत हट जाता है। यही विधि अधिकांश प्रश्नों में काम करती है।
अगला कदम: शब्द भंडार में अंक तभी बनते हैं जब उत्तर याद हो, सोचना न पड़े। इस अध्याय को ExamAtlas के BPSC TRE 4.0 मॉक टेस्ट में परखिए — पाँच विकल्प, −1/3 ऋणात्मक अंकन, हिंदी माध्यम।
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