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महाजनपद, बौद्ध एवं जैन धर्म

Mahajanapadas, Buddhism and Jainism

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यह अध्याय बिहार की परीक्षा के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि बौद्ध और जैन दोनों धर्मों का उदय इसी क्षेत्र में हुआ। प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — महाजनपदों की संख्या, दोनों धर्मों के मूल सिद्धांत, और बौद्ध संगीतियाँ कहाँ हुईं।

सोलह महाजनपद

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत सोलह महाजनपदों में बँटा था, जिनका उल्लेख बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में मिलता है। इनमें मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा।

  • मगध की राजधानी पहले राजगृह और बाद में पाटलिपुत्र रही।
  • मगध की शक्ति के कारण थे — उपजाऊ भूमि, लोहे की खानें, हाथी और नदियों से घिरी सुरक्षित स्थिति।
  • अन्य प्रमुख महाजनपद थे कोसल, वत्स, अवंति, अंग और वज्जि।
  • वज्जि संघ गणतंत्रात्मक व्यवस्था का उदाहरण था।

बौद्ध धर्म

गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ, ज्ञान की प्राप्ति बोधगया में, पहला उपदेश सारनाथ में दिया और महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ। ये चार स्थान सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

सिद्धांतसार
चार आर्य सत्यदुख है, उसका कारण है, उसका अंत संभव है, उसका मार्ग है
अष्टांगिक मार्गसम्यक दृष्टि से सम्यक समाधि तक आठ अंग
मध्यम मार्गन अति भोग, न अति तप
त्रिरत्नबुद्ध, धम्म, संघ

बुद्ध ने अपने उपदेश पालि भाषा में दिए, जो जनसाधारण की भाषा थी। उन्होंने वेदों की सत्ता और यज्ञ को अस्वीकार किया और जाति के आधार पर भेद नहीं माना, इसीलिए यह धर्म तेज़ी से फैला।

जैन धर्म

जैन परंपरा में चौबीस तीर्थंकर माने जाते हैं, जिनमें पहले ऋषभदेव और अंतिम महावीर थे। महावीर का जन्म कुंडग्राम, वैशाली में हुआ और उन्हें कैवल्य जृंभिकग्राम में प्राप्त हुआ।

  • त्रिरत्न — सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र।
  • पाँच महाव्रत — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य।
  • अंतिम व्रत ब्रह्मचर्य महावीर ने जोड़ा; पहले चार पार्श्वनाथ के थे।
  • जैन धर्म प्राकृत भाषा में फैला और आगे चलकर श्वेतांबर तथा दिगंबर में बँटा।

दोनों धर्मों में सबसे बड़ा अंतर अहिंसा की कठोरता का है — जैन धर्म में वह कहीं अधिक कड़ी है, जबकि बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग पर बल देता है। यह अंतर सीधे पूछा जाता है।

✗ महावीर जैन धर्म के संस्थापक थे  |  ✓ वे चौबीसवें तीर्थंकर थे; परंपरा उनसे बहुत पहले से चली आ रही थी

बौद्ध संगीतियाँ

संगीतिस्थानशासक
प्रथमराजगृहअजातशत्रु
द्वितीयवैशालीकालाशोक
तृतीयपाटलिपुत्रअशोक
चतुर्थकश्मीरकनिष्क

पहली तीन संगीतियाँ बिहार में हुईं, इसलिए यह तालिका राज्य की परीक्षा में विशेष महत्व रखती है। चौथी संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में बँट गया।

बुद्ध से जुड़े चार स्थान और चार संगीतियों की जोड़ी — ये दो तालिकाएँ इस पूरे अध्याय के अधिकांश प्रश्न घेर लेती हैं। इन्हें मानचित्र पर देखकर याद कीजिए।

TRE संकेत: बोधगया में ज्ञान और सारनाथ में पहला उपदेश — यह जोड़ी लगभग हर बार आती है। पहली तीन संगीतियाँ बिहार में भी तयशुदा है। महावीर चौबीसवें तीर्थंकर और बुद्ध ने पालि में उपदेश दिए भी सीधे पूछे गए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • छठी शताब्दी ईसा पूर्व में सोलह महाजनपद थे।
  • मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बना।
  • बुद्ध को ज्ञान बोधगया में मिला और पहला उपदेश सारनाथ में दिया।
  • चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म के मूल हैं।
  • महावीर चौबीसवें तीर्थंकर थे और उनका जन्म वैशाली में हुआ।
  • पहली तीन बौद्ध संगीतियाँ बिहार में हुईं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद क्यों बना?

इसके कई कारण मिलकर काम कर रहे थे। गंगा घाटी की उपजाऊ भूमि से अधिक अन्न मिलता था, आसपास लोहे की खानें थीं जिनसे बेहतर हथियार बने, जंगलों से हाथी मिलते थे जो युद्ध में निर्णायक होते थे, और राजगृह पहाड़ियों से तथा पाटलिपुत्र नदियों से घिरा होने के कारण सुरक्षित था।

बौद्ध और जैन धर्म में मुख्य अंतर क्या है?

बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग पर बल देता है, यानी न अत्यधिक भोग और न अत्यधिक तप। जैन धर्म कठोर तप और अत्यंत कड़ी अहिंसा पर बल देता है। दोनों ने वेदों की सत्ता और यज्ञ को अस्वीकार किया, जनभाषा में उपदेश दिए और जाति भेद को महत्व नहीं दिया।

बौद्ध संगीतियाँ क्यों बुलाई गईं?

बुद्ध के उपदेशों को संकलित करने, उनमें आई भिन्नताओं को सुलझाने और संघ के नियम तय करने के लिए। पहली राजगृह में अजातशत्रु के समय, दूसरी वैशाली में, तीसरी पाटलिपुत्र में अशोक के समय और चौथी कश्मीर में कनिष्क के समय हुई, जिसमें धर्म हीनयान और महायान में बँट गया।

क्या महावीर ने जैन धर्म की स्थापना की थी?

नहीं। जैन परंपरा में चौबीस तीर्थंकर माने जाते हैं और महावीर उनमें अंतिम थे। उनसे पहले तेइसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे, जिनके चार व्रतों में महावीर ने पाँचवाँ ब्रह्मचर्य जोड़ा। इसलिए वे संस्थापक नहीं, बल्कि परंपरा को अंतिम रूप देने वाले माने जाते हैं।

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Mahajanapadas, Buddhism and Jainism | BPSC TRE 4.0 — ExamAtlas