संविधान निर्माण एवं प्रस्तावना
संविधान निर्माण एवं प्रस्तावना
संविधान निर्माण से प्रश्न लगभग निश्चित है और वह प्रायः तीन बिंदुओं पर होता है — संविधान सभा से जुड़े नाम और तिथियाँ, प्रस्तावना के शब्द, और कौन-सी विशेषता किस देश से ली गई। तीनों सीधे तथ्य हैं, इसलिए यह भाग सबसे सुरक्षित है।
संविधान सभा
- संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के तहत हुआ।
- पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
- डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने, जो बिहार से थे।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए, जो बिहार से थे।
- डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
- संविधान बनने में दो वर्ष ग्यारह माह और अठारह दिन लगे।
संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। दोनों तिथियों का अंतर परीक्षा में जान-बूझकर पूछा जाता है, इसलिए इन्हें अलग-अलग याद रखिए।
बिहार के लिए यह भाग विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अस्थायी और स्थायी दोनों अध्यक्ष इसी राज्य से थे। यह तथ्य राज्य की परीक्षा में बार-बार आता है।
प्रस्तावना
प्रस्तावना संविधान की आत्मा कही जाती है और उसमें भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है।
इनमें समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द मूल प्रस्तावना में नहीं थे — वे बयालीसवें संशोधन, 1976 से जोड़े गए। यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है।
- प्रस्तावना चार आदर्श देती है — न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता।
- उसकी शुरुआत हम भारत के लोग से होती है, जो दिखाता है कि सत्ता का स्रोत जनता है।
- गणराज्य का अर्थ है कि राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है, वंशानुगत नहीं।
✗ पंथनिरपेक्ष शब्द संविधान की मूल प्रस्तावना में था | ✓ वह 1976 के बयालीसवें संशोधन से जोड़ा गया, समाजवादी और अखंडता शब्दों के साथ
स्रोत और प्रमुख विशेषताएँ
| देश | ली गई विशेषता |
|---|---|
| ब्रिटेन | संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता |
| अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, प्रस्तावना |
| आयरलैंड | नीति निर्देशक तत्व, राष्ट्रपति का निर्वाचन |
| कनाडा | संघीय व्यवस्था में मज़बूत केंद्र |
| सोवियत संघ | मौलिक कर्तव्य, न्याय के आदर्श |
| दक्षिण अफ़्रीका | संविधान संशोधन की प्रक्रिया |
| ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची |
भारतीय संविधान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। वह न पूरी तरह कठोर, न पूरी तरह लचीला है, क्योंकि उसमें कुछ भाग साधारण बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत से बदले जा सकते हैं।
स्रोत वाली तालिका को देश के स्वभाव से जोड़िए — ब्रिटेन से संसद, अमेरिका से अधिकार, आयरलैंड से निर्देशक तत्व और कनाडा से मज़बूत केंद्र। जोड़ी बन जाने पर यह तालिका बहुत जल्दी याद हो जाती है।
TRE संकेत: समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द 1976 में जोड़े गए सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा और डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार से जुड़े प्रश्न हैं। 26 नवंबर 1949 और 26 जनवरी 1950 का अंतर भी तयशुदा है।
60 सेकंड का रिवीजन
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
- डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष थे।
- डॉ. आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
- संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द 1976 में जोड़े गए।
- भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रस्तावना को संविधान की आत्मा क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उसमें संविधान का पूरा उद्देश्य कुछ पंक्तियों में आ जाता है — भारत किस प्रकार का राज्य होगा और वह अपने नागरिकों को क्या देना चाहता है। न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता — ये चार आदर्श पूरे संविधान की दिशा तय करते हैं, इसलिए व्याख्या में भी प्रस्तावना का सहारा लिया जाता है।
संविधान के कठोर और लचीले दोनों होने का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि उसे बदलने की एक ही प्रक्रिया नहीं है। कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं, कुछ के लिए विशेष बहुमत चाहिए, और कुछ के लिए विशेष बहुमत के साथ आधे राज्यों की सहमति भी। इसीलिए वह न पूरी तरह कठोर है और न पूरी तरह लचीला।
संविधान बनने में इतना समय क्यों लगा?
क्योंकि संविधान सभा ने हर प्रावधान पर विस्तार से बहस की और अनेक समितियाँ बनाकर काम किया। भारत जैसे विविध देश के लिए भाषा, धर्म, संघीय ढाँचा और अधिकारों जैसे प्रश्न बहुत जटिल थे। कुल दो वर्ष ग्यारह माह और अठारह दिन में यह काम पूरा हुआ।
संविधान निर्माण में बिहार का क्या योगदान है?
संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा और स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोनों बिहार से थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद आगे चलकर भारत के पहले राष्ट्रपति बने। इसीलिए राज्य की परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रश्न लगभग निश्चित रहता है।
