धातु एवं अधातु
Metals and Non-metals
धातु-अधातु से एक प्रश्न लगभग तय है और वह प्रायः अपवादों पर होता है — कौन-सी धातु द्रव है, कौन-सी अधातु चमकीली है, कौन-सी अधातु विद्युत की सुचालक है। सामान्य गुण तो सरल हैं, इसलिए ध्यान अपवादों पर लगाइए।
भौतिक गुण
| गुण | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| चमक | चमकीली | चमकहीन (आयोडीन और ग्रेफ़ाइट अपवाद) |
| आघातवर्ध्यता | पीटकर चादर बनती है | भंगुर, टूट जाती है |
| तन्यता | तार खिंच जाता है | नहीं |
| ऊष्मा-विद्युत चालन | सुचालक | कुचालक (ग्रेफ़ाइट अपवाद) |
| अवस्था | ठोस (पारा अपवाद) | ठोस, द्रव और गैस तीनों |
| ध्वनि | बजने पर खनक | खनक नहीं |
अपवाद ही परीक्षा का असली विषय हैं — पारा एकमात्र द्रव धातु है, ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु, ग्रेफ़ाइट विद्युत की सुचालक अधातु है, और सोडियम तथा पोटैशियम इतनी नरम धातुएँ हैं कि चाकू से काटी जा सकती हैं।
सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं, इसीलिए उनके अत्यंत पतले वर्क बनाए जा सकते हैं। चाँदी ऊष्मा और विद्युत की सबसे अच्छी चालक है, पर महँगी होने के कारण व्यवहार में ताँबे और ऐलुमिनियम का प्रयोग होता है।
✗ सभी धातुएँ ठोस होती हैं | ✓ पारा सामान्य ताप पर द्रव धातु है; अधातुओं में ब्रोमीन द्रव है
रासायनिक व्यवहार
- धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, अधातु के ऑक्साइड अम्लीय।
- धातुएँ अम्ल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस निकालती हैं।
- सोडियम इतनी क्रियाशील है कि उसे मिट्टी के तेल में डुबोकर रखा जाता है।
- फ़ॉस्फ़ोरस को पानी में डुबोकर रखा जाता है, क्योंकि वह हवा में आग पकड़ लेता है।
धातु के ऑक्साइड का घोल लाल लिटमस को नीला करता है और अधातु के ऑक्साइड का घोल नीले लिटमस को लाल — यह पहचान का सीधा तरीका है।
सक्रियता श्रेणी
धातुओं को क्रियाशीलता के घटते क्रम में रखने पर सक्रियता श्रेणी बनती है। ऊपर की धातु नीचे वाली को उसके लवण के घोल से विस्थापित कर देती है।
लोहे की कील को नीले कॉपर सल्फ़ेट के घोल में डालने पर घोल का रंग हरा हो जाता है और कील पर ताँबे की भूरी परत जम जाती है, क्योंकि लोहा ताँबे से अधिक क्रियाशील है। इसका उल्टा नहीं होता — यही प्रयोग सबसे अधिक पूछा जाता है।
उपयोग एवं संक्षारण
| धातु | उपयोग |
|---|---|
| ऐलुमिनियम | हल्का और जंगरोधी; बर्तन, विमान, पन्नी |
| ताँबा | विद्युत तार और बर्तन |
| लोहा | भवन, मशीन, औज़ार |
| सोना-चाँदी | आभूषण, क्योंकि आघातवर्ध्य और चमकीले |
संक्षारण में धातु हवा, नमी और गैसों से क्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होती है। चाँदी काली पड़ जाती है, ताँबे पर हरी परत जमती है और लोहे पर जंग लगता है। ऐलुमिनियम पर बनी पतली ऑक्साइड परत उसे आगे के क्षय से बचा लेती है, इसीलिए वह जंग नहीं पकड़ता।
इस भाग को अपवादों की सूची की तरह पढ़िए। पारा, ब्रोमीन, ग्रेफ़ाइट, आयोडीन, सोडियम और पोटैशियम — यही छह नाम अधिकांश प्रश्नों का उत्तर बन जाते हैं।
TRE संकेत: पारा द्रव धातु और ब्रोमीन द्रव अधातु — यह जोड़ी सबसे अधिक पूछी जाती है। ग्रेफ़ाइट विद्युत की सुचालक अधातु है, यह भी तयशुदा है। सोडियम मिट्टी के तेल में रखा जाता है और लोहा कॉपर सल्फ़ेट से ताँबा विस्थापित करता है — दोनों सीधे आ चुके हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- धातुएँ चमकीली, आघातवर्ध्य, तन्य और सुचालक होती हैं।
- पारा एकमात्र द्रव धातु और ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है।
- ग्रेफ़ाइट अधातु होकर भी विद्युत की सुचालक है।
- धातु के ऑक्साइड क्षारीय और अधातु के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
- अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर देती है।
- सोडियम को मिट्टी के तेल और फ़ॉस्फ़ोरस को पानी में रखा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोडियम को मिट्टी के तेल में क्यों रखा जाता है?
सोडियम अत्यंत क्रियाशील धातु है और हवा में खुला रखने पर वह ऑक्सीजन तथा नमी से तुरंत क्रिया कर लेती है, जिससे आग तक लग सकती है। मिट्टी का तेल उसे हवा और नमी दोनों से अलग रखता है, इसलिए उसे उसी में डुबोकर सुरक्षित रखा जाता है।
ऐलुमिनियम पर जंग क्यों नहीं लगता?
हवा के संपर्क में आते ही ऐलुमिनियम की सतह पर उसके ऑक्साइड की बहुत पतली और मज़बूत परत बन जाती है। यह परत भीतर की धातु तक ऑक्सीजन और नमी नहीं पहुँचने देती, इसलिए क्षय आगे नहीं बढ़ता। लोहे पर बनी जंग की परत भुरभुरी होती है, इसलिए वह ऐसी सुरक्षा नहीं देती।
लोहे की कील कॉपर सल्फ़ेट के घोल में डालने पर क्या होता है?
लोहा ताँबे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए वह घोल में से ताँबे को विस्थापित कर देता है। घोल का नीला रंग हल्का होकर हरा हो जाता है और कील पर ताँबे की भूरी परत जम जाती है। यदि ताँबे की छड़ को फ़ेरस सल्फ़ेट में डाला जाए तो कोई अभिक्रिया नहीं होगी।
बिजली के तार ताँबे के ही क्यों बनाए जाते हैं?
विद्युत की सबसे अच्छी चालक चाँदी है, पर वह बहुत महँगी है। ताँबा उसके बाद सबसे अच्छा चालक है, तन्य है इसलिए उसका पतला तार खिंच जाता है, और कीमत में व्यावहारिक है। लंबी विद्युत लाइनों में हल्का होने के कारण ऐलुमिनियम भी प्रयोग किया जाता है।
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