सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु
सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु
सूक्ष्मजीवों से प्रश्न लगभग हर बार आता है और वह प्रायः इसी पर होता है कि कौन-सा रोग किस सूक्ष्मजीव से होता है और किसका वाहक कौन है। रोग, कारक और वाहक की तीन-स्तंभ वाली तालिका बना लीजिए, यह भाग सुरक्षित हो जाएगा।
चार समूह
| समूह | उदाहरण | विशेषता |
|---|---|---|
| जीवाणु | लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम | एककोशिकीय, प्रोकैरियोटिक |
| कवक | यीस्ट, मशरूम, ब्रेड की फफूँदी | मृतजीवी या परजीवी |
| शैवाल | क्लैमाइडोमोनास, स्पाइरोगाइरा | हरे, प्रकाश संश्लेषण करने वाले |
| प्रोटोज़ोआ | अमीबा, पैरामीशियम, प्लाज़्मोडियम | एककोशिकीय जंतु जैसे |
विषाणु इन चारों से अलग हैं, क्योंकि वे जीवित कोशिका के भीतर ही गुणन कर सकते हैं और बाहर निर्जीव कणों जैसे रहते हैं। इसीलिए उन्हें सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कहा जाता है।
मित्र सूक्ष्मजीव
- लैक्टोबैसिलस दूध को दही में बदलता है।
- यीस्ट से डबल रोटी फूलती है और किण्वन से अल्कोहल बनता है।
- राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।
- सूक्ष्मजीव मरे हुए जीवों को सड़ाकर मिट्टी में पोषक तत्व लौटाते हैं।
- प्रतिजैविक भी कवक और जीवाणु से ही बनाए जाते हैं।
पेनिसिलिन पहला प्रतिजैविक था, जिसकी खोज एलेक्ज़ेंडर फ़्लेमिंग ने की और वह एक कवक से प्राप्त हुआ था। यह तथ्य परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
शत्रु सूक्ष्मजीव
| रोग | कारक | फैलाव |
|---|---|---|
| हैजा, टाइफ़ॉइड, क्षय | जीवाणु | दूषित जल और भोजन, वायु |
| मलेरिया | प्रोटोज़ोआ | मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर |
| डेंगू, चिकनगुनिया | विषाणु | मादा एडीज़ मच्छर |
| खसरा, पोलियो, हेपेटाइटिस | विषाणु | संपर्क, जल, वायु |
| दाद | कवक | संपर्क |
मलेरिया मादा एनोफ़िलीज़ और डेंगू मादा एडीज़ मच्छर से फैलता है — यह जोड़ी लगभग हर परीक्षा में आती है। मच्छर स्वयं रोग नहीं है, वह केवल वाहक है।
सूक्ष्मजीव भोजन भी खराब करते हैं, इसलिए परिरक्षण किया जाता है। नमक, चीनी, तेल, सिरका मिलाना, पाश्चुरीकरण, सुखाना और प्रशीतन इसके प्रचलित तरीके हैं।
✗ मलेरिया विषाणु से होता है | ✓ मलेरिया प्लाज़्मोडियम नामक प्रोटोज़ोआ से होता है; डेंगू विषाणु से होता है
प्रतिजैविक और उनका दुरुपयोग
प्रतिजैविक जीवाणु पर काम करते हैं, विषाणु पर नहीं। इसीलिए साधारण सर्दी-ज़ुकाम में प्रतिजैविक लेना व्यर्थ है, क्योंकि वह विषाणु से होता है। बिना आवश्यकता के इनका सेवन शरीर के लाभदायक जीवाणुओं को भी मार देता है और जीवाणुओं में प्रतिरोध पैदा कर देता है।
विषाणु जनित रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। चेचक को टीकाकरण से ही पूरी दुनिया से समाप्त किया जा सका।
इस अध्याय का सबसे बड़ा जाल कारक और वाहक का घालमेल है। मच्छर वाहक है, कारक नहीं। मलेरिया का कारक प्लाज़्मोडियम है और मच्छर केवल उसे एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचाता है।
TRE संकेत: मलेरिया एनोफ़िलीज़ और डेंगू एडीज़ से फैलता है — यह जोड़ी तय है। पेनिसिलिन की खोज फ़्लेमिंग ने की, यह सीधे पूछा जाता है। प्रतिजैविक विषाणु पर काम नहीं करते और लैक्टोबैसिलस से दही बनता है — दोनों बार-बार आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- सूक्ष्मजीवों के चार समूह जीवाणु, कवक, शैवाल और प्रोटोज़ोआ हैं।
- विषाणु जीवित कोशिका के भीतर ही गुणन कर सकते हैं।
- लैक्टोबैसिलस से दही और यीस्ट से किण्वन होता है।
- पेनिसिलिन पहला प्रतिजैविक था, जिसकी खोज फ़्लेमिंग ने की।
- मलेरिया एनोफ़िलीज़ और डेंगू एडीज़ मच्छर से फैलता है।
- प्रतिजैविक जीवाणु पर असर करते हैं, विषाणु पर नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्दी-ज़ुकाम में प्रतिजैविक क्यों नहीं देना चाहिए?
साधारण सर्दी-ज़ुकाम विषाणु से होता है और प्रतिजैविक केवल जीवाणुओं पर असर करते हैं। इसलिए दवा से कोई लाभ नहीं होता, उलटे आँतों के लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं और जीवाणुओं में दवा के प्रति प्रतिरोध विकसित हो जाता है, जिससे आगे असली ज़रूरत के समय दवा बेअसर हो सकती है।
दूध से दही कैसे बनता है?
गुनगुने दूध में थोड़ा-सा जामन डालने पर उसमें मौजूद लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध की शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलने लगते हैं। यही अम्ल दूध के प्रोटीन को जमा देता है और दूध गाढ़ा होकर दही बन जाता है। इसीलिए दही में हल्की खटास आ जाती है।
मच्छर को रोग का कारक क्यों नहीं कहते?
क्योंकि रोग वास्तव में मच्छर के भीतर पल रहे सूक्ष्मजीव से होता है। मलेरिया का कारक प्लाज़्मोडियम है और डेंगू का कारक एक विषाणु। मच्छर केवल इन्हें एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचाता है, इसलिए उसे वाहक कहा जाता है। यही अंतर परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
भोजन का परिरक्षण किन तरीकों से किया जाता है?
मूल विचार यह है कि सूक्ष्मजीवों को बढ़ने का अवसर न मिले। इसके लिए अचार में नमक और तेल, मुरब्बे में चीनी, और चटनी में सिरका मिलाया जाता है। दूध को पाश्चुरीकरण से गर्म करके तुरंत ठंडा किया जाता है, और सुखाना तथा प्रशीतन भी प्रचलित तरीके हैं।
