मुद्रा, बैंकिंग, उपभोक्ता अधिकार एवं बिहार की अर्थव्यवस्था
Money, Banking, Consumer Rights and the Bihar Economy
यह अध्याय अर्थशास्त्र खंड को पूरा करता है और इससे प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — रिज़र्व बैंक की भूमिका, उपभोक्ता अधिकार, और बिहार की अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ। तीनों व्यावहारिक हैं और रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े हैं।
मुद्रा और बैंकिंग
मुद्रा वस्तु विनिमय की कठिनाइयों से निकलने का उपाय है। वस्तु विनिमय में दोहरे संयोग की समस्या आती थी, यानी दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए हो, तभी अदला-बदली संभव थी।
| मुद्रा का कार्य | अर्थ |
|---|---|
| विनिमय का माध्यम | लेन-देन आसान बनाना |
| मूल्य का मापक | हर वस्तु का मूल्य एक इकाई में |
| मूल्य का संचय | धन बचाकर रखना |
| स्थगित भुगतान का मानक | उधार और किश्त संभव बनाना |
भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है, जिसकी स्थापना 1935 में हुई। वह नोट जारी करता है, बैंकों का नियमन करता है, सरकार का बैंकर है और मौद्रिक नीति चलाता है। ध्यान दीजिए कि एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है — यह अपवाद सीधे पूछा जाता है।
बैंक जमा स्वीकार करते हैं और ऋण देते हैं, और इसी से साख सृजन होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
✗ भारत में सभी नोट रिज़र्व बैंक जारी करता है | ✓ एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है; शेष सभी नोट रिज़र्व बैंक
उपभोक्ता अधिकार
उपभोक्ता संरक्षण के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बना, जिसका पहला रूप 1986 में आया और नया अधिनियम 2019 में। 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
- सुरक्षा का अधिकार — हानिकारक वस्तुओं से बचाव।
- सूचना का अधिकार — मूल्य, मात्रा और गुणवत्ता की जानकारी।
- चुनने का अधिकार — विकल्प उपलब्ध होना।
- सुने जाने का अधिकार — शिकायत दर्ज कराने की सुविधा।
- निवारण का अधिकार — क्षतिपूर्ति पाना।
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार — अपने अधिकार जानना।
गुणवत्ता के प्रमाण चिह्न भी याद रखिए — आईएसआई औद्योगिक वस्तुओं के लिए, एगमार्क कृषि उत्पादों के लिए और हॉलमार्क सोने के आभूषणों के लिए।
बिहार की अर्थव्यवस्था
बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है और यहाँ की बड़ी आबादी सीधे या परोक्ष रूप से खेती से जुड़ी है। नवंबर 2000 में झारखंड के अलग होने से राज्य की खनिज पेटी और अधिकांश भारी उद्योग बाहर चले गए।
- धान, गेहूँ, मक्का और गन्ना प्रमुख फ़सलें हैं।
- लीची, मखाना और आम राज्य की पहचान वाली उपज हैं।
- चीनी, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे उद्योग मुख्य औद्योगिक क्षेत्र हैं।
- प्रवास से आने वाला धन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा सहारा है।
- बाढ़ हर वर्ष कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है।
राज्य की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी युवा आबादी है, और उसी कारण शिक्षा तथा कौशल विकास को यहाँ सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। शिक्षक भर्ती को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए — वह केवल एक नौकरी नहीं, राज्य की सबसे बड़ी दीर्घकालिक निवेश नीति का हिस्सा है।
इस अध्याय के तीनों भाग रोज़मर्रा से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें उदाहरण से याद कीजिए — बैंक की पासबुक, दुकान से मिला बिल, और अपने ज़िले की मुख्य फ़सल। इन उदाहरणों से तथ्य अपने आप जुड़ जाते हैं।
TRE संकेत: एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है सबसे अधिक पूछा जाने वाला अपवाद है। रिज़र्व बैंक की स्थापना 1935 भी तयशुदा है। 24 दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस और एगमार्क कृषि उत्पादों के लिए भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- मुद्रा के चार मुख्य कार्य हैं।
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1935 में हुई।
- एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसंबर को मनाया जाता है।
- एगमार्क कृषि उत्पादों और हॉलमार्क सोने के लिए है।
- बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वस्तु विनिमय की मुख्य कठिनाई क्या थी?
दोहरे संयोग की समस्या। अदला-बदली तभी हो सकती थी जब दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए हो। इसके अलावा मूल्य मापने की कोई साझी इकाई नहीं थी और मूल्य को लंबे समय तक संचित करना भी कठिन था। मुद्रा ने इन तीनों कठिनाइयों का समाधान किया।
रिज़र्व बैंक के मुख्य कार्य क्या हैं?
वह नोट जारी करता है, बैंकों का नियमन और निरीक्षण करता है, सरकार के बैंकर की भूमिका निभाता है, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करता है और मौद्रिक नीति के माध्यम से मुद्रास्फीति तथा साख को नियंत्रित करता है। एक रुपये का नोट अपवाद है, जो वित्त मंत्रालय जारी करता है।
उपभोक्ता के प्रमुख अधिकार कौन-से हैं?
सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुने जाने का अधिकार, निवारण का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार। इनका उद्देश्य यह है कि खरीदार को वस्तु के बारे में पूरी जानकारी मिले, विकल्प उपलब्ध हों और ठगे जाने पर उसे क्षतिपूर्ति का रास्ता मिले।
झारखंड के अलग होने का बिहार की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
नवंबर 2000 में झारखंड बनने के साथ राज्य की खनिज पेटी और उस पर आधारित अधिकांश भारी उद्योग बिहार से बाहर चले गए। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह कृषि पर केंद्रित हो गई। तब से खाद्य प्रसंस्करण, छोटे उद्योग और मानव संसाधन विकास पर ज़ोर बढ़ा है।
Checking your account…
It takes a minute with your WhatsApp number. Reading is free.
Done with this topic?
Lock it in with a quick Practice Set, then move on.