राष्ट्रीय आंदोलन एवं बिहार का किसान आंदोलन
राष्ट्रीय आंदोलन एवं बिहार का किसान आंदोलन
यह अध्याय बिहार की परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि गांधीजी का पहला सत्याग्रह और देश का पहला बड़ा किसान संगठन दोनों इसी राज्य से जुड़े हैं। प्रश्न प्रायः आंदोलनों के वर्ष और उनके नेतृत्व पर आते हैं।
राष्ट्रीय आंदोलन की रूपरेखा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1885 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना |
| 1905 | बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह |
| 1919 | जलियाँवाला बाग हत्याकांड |
| 1920 | असहयोग आंदोलन |
| 1930 | सविनय अवज्ञा और दांडी मार्च |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन |
कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए. ओ. ह्यूम की पहल पर हुई और उसका पहला अधिवेशन बंबई में हुआ, जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की। 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस नरम दल और गरम दल में बँट गई।
चंपारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था और वह बिहार में हुआ। उन्हें वहाँ बुलाने वाले किसान राजकुमार शुक्ल थे, और यह नाम राज्य की परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
किसान सभा: जो आंदोलन बिहार से शुरू हुआ
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की, और आगे चलकर 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा बनी, जिसके पहले अध्यक्ष वही थे।
- माँगें थीं — ज़मींदारी का अंत, बेदख़ली पर रोक और अवैध वसूली की समाप्ति।
- आंदोलन का आधार स्थायी बंदोबस्त से पैदा हुई किसान की असुरक्षा थी।
- बेगारी और अबवाब के विरुद्ध सीधा संघर्ष चला।
- स्वतंत्रता के बाद बिहार ज़मींदारी उन्मूलन कानून बनाने वाले पहले राज्यों में रहा।
इस आंदोलन का महत्व यह है कि इसने राष्ट्रीय आंदोलन में किसान का प्रश्न केंद्र में लाया और यह दिखाया कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, आर्थिक भी होनी चाहिए।
✗ किसान सभा की शुरुआत स्वतंत्रता के बाद हुई | ✓ बिहार प्रांतीय किसान सभा 1929 में और अखिल भारतीय किसान सभा 1936 में बनी, यानी स्वतंत्रता से पहले
आंदोलन की अन्य धाराएँ
राष्ट्रीय आंदोलन केवल एक धारा का नहीं था। क्रांतिकारी धारा में भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और सूर्य सेन जैसे नाम आते हैं, जिन्होंने सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना।
सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज बनाई और भारत के बाहर से संघर्ष चलाया। श्रमिक और आदिवासी आंदोलन भी साथ-साथ चले, जिनमें बिहार-झारखंड क्षेत्र का बिरसा मुंडा का आंदोलन विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
पूरे आंदोलन में बिहार की जगह
- चंपारण — गांधीजी का पहला सत्याग्रह, 1917।
- किसान सभा — देश का पहला बड़ा संगठित किसान आंदोलन।
- 1942 का भारत छोड़ो — पटना सचिवालय पर झंडा फहराते सात छात्र शहीद हुए।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद — चंपारण से लेकर संविधान सभा तक की भूमिका।
- जयप्रकाश नारायण — 1942 में भूमिगत संघर्ष का नेतृत्व।
इसलिए बिहार राष्ट्रीय आंदोलन का केवल भागीदार नहीं, कई मोड़ों पर उसका आरंभ बिंदु रहा। यही बात इस अध्याय को राज्य की परीक्षा में सबसे अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
बिहार से जुड़े पाँच नाम अलग से याद कीजिए — राजकुमार शुक्ल, स्वामी सहजानंद सरस्वती, कुँवर सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जयप्रकाश नारायण। इनमें से कोई न कोई लगभग हर प्रश्नपत्र में आता है।
TRE संकेत: राजकुमार शुक्ल गांधीजी को चंपारण लाए — यह बिहार से सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। स्वामी सहजानंद और किसान सभा भी तयशुदा है। 1885 कांग्रेस की स्थापना और 1942 में पटना के सात शहीद भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।
- 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस नरम और गरम दल में बँटी।
- चंपारण सत्याग्रह 1917 में गांधीजी का पहला भारतीय सत्याग्रह था।
- राजकुमार शुक्ल गांधीजी को चंपारण लेकर आए।
- स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बिहार में किसान सभा की स्थापना की।
- अखिल भारतीय किसान सभा 1936 में बनी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंपारण सत्याग्रह क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह था और उसी से सत्याग्रह की पद्धति भारतीय राजनीति में स्थापित हुई। इसमें नील की खेती के लिए बाध्य किसानों की समस्या उठाई गई और सरकार को जाँच समिति बनानी पड़ी। इसने यह भी दिखाया कि राष्ट्रीय आंदोलन गाँव तक पहुँच सकता है।
किसान सभा आंदोलन का क्या महत्व है?
इसने पहली बार किसान के आर्थिक प्रश्न को राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र में लाया। स्वामी सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में ज़मींदारी उन्मूलन, बेदख़ली पर रोक और अवैध वसूली की समाप्ति जैसी माँगें उठीं। इससे यह विचार मज़बूत हुआ कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, आर्थिक भी होनी चाहिए।
कांग्रेस नरम और गरम दल में क्यों बँटी?
मतभेद तरीक़े को लेकर था। नरम दल संवैधानिक तरीक़ों, याचिका और क्रमिक सुधार में विश्वास करता था, जबकि गरम दल स्वराज को जन्मसिद्ध अधिकार मानकर सीधे संघर्ष और बहिष्कार का रास्ता चाहता था। यह मतभेद 1907 के सूरत अधिवेशन में खुले विभाजन तक पहुँच गया।
राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार की क्या भूमिका रही?
बिहार कई मोड़ों पर आंदोलन का आरंभ बिंदु रहा। चंपारण से गांधीजी का पहला सत्याग्रह शुरू हुआ, यहीं से देश का पहला बड़ा किसान संगठन खड़ा हुआ, 1942 में पटना सचिवालय पर झंडा फहराते सात छात्र शहीद हुए, और डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा जयप्रकाश नारायण जैसे नेता यहीं से निकले।
