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प्राकृत, पूर्ण एवं पूर्णांक संख्याएँ

By ExamAtlas · 29/8/2026

प्राकृत, पूर्ण एवं पूर्णांक संख्याएँ

भाग-III गणित एवं विज्ञान 80 प्रश्नों का है और उसमें गणित का हिस्सा बड़ा है, इसलिए संख्या पद्धति से 2 से 3 प्रश्न लगभग तय हैं। स्तर स्नातक है पर आधार कक्षा 6 से 8 का ही रहता है, इसलिए यहाँ नियम और उनके अपवाद दोनों याद रखने पड़ते हैं।

संख्याओं के परिवार

समुच्चयसंकेतसदस्य
प्राकृत संख्याएँN1, 2, 3, ...
पूर्ण संख्याएँW0, 1, 2, 3, ...
पूर्णांकZ..., -2, -1, 0, 1, 2, ...
परिमेय संख्याएँQp/q रूप, q ≠ 0
वास्तविक संख्याएँRपरिमेय + अपरिमेय

हर परिवार अगले का उपसमुच्चय है — N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R। इसीलिए हर प्राकृत संख्या पूर्णांक भी है, पर हर पूर्णांक प्राकृत नहीं। यह दिशा वाला प्रश्न सीधे पूछा जाता है।

शून्य एक प्राकृत संख्या है  |   शून्य पूर्ण संख्या है, प्राकृत नहीं; प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होती हैं

संक्रियाओं के गुण

गुणजोड़गुणाघटाव
क्रम विनिमेयलागूलागूलागू नहीं
साहचर्यलागूलागूलागू नहीं
तत्समक अवयव01

घटाव और भाग में क्रम विनिमेय नियम नहीं चलता — 5 घटा 3 और 3 घटा 5 अलग हैं। यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला गुण-आधारित प्रश्न है। वितरण नियम गुणा को जोड़ पर बाँटता है — a(b + c) = ab + ac।

शून्य, और उससे भाग क्यों नहीं होता

शून्य के तीन व्यवहार याद रखिए — किसी संख्या में शून्य जोड़ने पर वही संख्या, शून्य से गुणा करने पर शून्य, और शून्य से भाग अपरिभाषित

भाग असल में यह पूछता है कि किस संख्या से गुणा करने पर भाज्य मिलेगा। 5 ÷ 0 का अर्थ है — किस संख्या को 0 से गुणा करने पर 5 मिलेगा। ऐसी कोई संख्या है ही नहीं, क्योंकि शून्य से गुणा करने पर हमेशा शून्य ही आता है। इसीलिए यह अपरिभाषित है, अनंत नहीं।

और 0 ÷ 0 भी अपरिभाषित है, क्योंकि वहाँ हर संख्या उत्तर बन सकती है — उत्तर एक नहीं रह जाता। यह कारण-आधारित प्रश्न स्नातक स्तर पर पूछा जाता है।

संख्या रेखा पर पूर्णांक

  • दाईं ओर बढ़ने पर संख्या बढ़ती है, बाईं ओर घटती है।
  • इसलिए -2, -5 से बड़ा है, यद्यपि 2, 5 से छोटा है।
  • जोड़ का अर्थ है दाईं ओर चलना, घटाव का अर्थ बाईं ओर।
  • दो ऋणात्मक संख्याओं का गुणनफल धनात्मक होता है।

(−) × (−) = (+) | (−) × (+) = (−)

चिह्न का नियम गिनकर देखिए — यदि ऋण चिह्नों की संख्या सम है तो उत्तर धनात्मक, विषम है तो ऋणात्मक। यह लंबे गुणनफल में तुरंत काम आता है।

TRE संकेत: शून्य से भाग अपरिभाषित है, अनंत नहीं — यह स्नातक स्तर का पसंदीदा प्रश्न है और विकल्प में अनंत ज़रूर रखा जाता है। शून्य प्राकृत नहीं, पूर्ण है दूसरा तय जाल है। ऋणात्मक संख्याओं की तुलना में संख्या रेखा का सहारा लीजिए — बाईं ओर की संख्या हमेशा छोटी होती है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • प्राकृत 1 से, पूर्ण 0 से और पूर्णांक ऋणात्मक सहित शुरू होते हैं।
  • N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R — हर परिवार अगले का उपसमुच्चय है।
  • घटाव और भाग में क्रम विनिमेय नियम लागू नहीं होता।
  • जोड़ का तत्समक अवयव 0 और गुणा का 1 है।
  • शून्य से भाग अपरिभाषित है, अनंत नहीं।
  • ऋण चिह्नों की संख्या सम हो तो गुणनफल धनात्मक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शून्य से भाग क्यों नहीं किया जा सकता?

क्योंकि भाग असल में यह पूछता है कि किस संख्या को भाजक से गुणा करने पर भाज्य मिलेगा। पाँच बटा शून्य का अर्थ हुआ कि किस संख्या को शून्य से गुणा करने पर पाँच मिले, और ऐसी कोई संख्या नहीं है क्योंकि शून्य से गुणा करने पर सदा शून्य ही आता है। इसीलिए इसे अपरिभाषित कहा जाता है, अनंत नहीं।

क्या शून्य प्राकृत संख्या है?

नहीं। प्राकृत संख्याएँ एक से शुरू होती हैं और गिनती की संख्याएँ कहलाती हैं। शून्य को जोड़ने पर वह समुच्चय पूर्ण संख्याओं का बन जाता है। इसलिए शून्य पूर्ण संख्या है, प्राकृत नहीं, और यही भेद परीक्षा में पूछा जाता है।

ऋणात्मक संख्याओं में बड़ी संख्या कैसे पहचानें?

संख्या रेखा पर जो दाईं ओर हो वही बड़ी होती है। इसलिए ऋण दो, ऋण पाँच से बड़ा है, यद्यपि बिना चिह्न के दो पाँच से छोटा है। ऋणात्मक संख्याओं में जिसका संख्यात्मक मान बड़ा हो, वह वास्तव में छोटी होती है।

वितरण नियम क्या कहता है?

वह गुणा को जोड़ पर बाँटने की अनुमति देता है, यानी a गुणा कोष्ठक b जोड़ c बराबर होता है ab जोड़ ac। यह नियम मानसिक गणना में बहुत काम आता है और बीजगणित में सर्वसमिकाओं का आधार भी यही है।