भारत की प्रमुख मृदाएं
Major Soil Types of India
NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Resources and Development" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Soils"
भारत की प्रमुख मृदाएं
मृदा पृथ्वी की पपड़ी की सबसे ऊपरी पतली परत है, जो अपक्षयित चट्टान, ह्यूमस और जीवों से बनी है। इसका प्रकार जनक चट्टान, जलवायु, उच्चावच, वनस्पति और समय पर निर्भर करता है। भारत में छह प्रमुख मृदा समूह हैं, हर एक कुछ विशेष फसलों के अनुकूल है।
जलोढ़ और काली मृदा
- जलोढ़ मृदा भारत की सर्वाधिक विस्तृत मृदा है, जो उत्तरी मैदानों और नदी डेल्टाओं में फैली है।
- इसे सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र लाती हैं; यह पोटाश और चूने में समृद्ध पर प्रायः नाइट्रोजन में कम होती है।
- पुरानी जलोढ़ बांगर कहलाती है और मोटी होकर कंकड़ रखती है; नई जलोढ़ खादर है और अधिक उपजाऊ है।
- जलोढ़ मृदा गेहूं, चावल, गन्ना और दलहन के लिए उपयुक्त है तथा घनी आबादी को सहारा देती है।
- काली मृदा या रेगुर दक्कन ट्रैप के लावा से बनी है और कपास के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
- यह चिकनी है, नमी अच्छी रोकती है, ग्रीष्म में गहरी दरारें डालती है, तथा चूना, लोहा, मैग्नीशिया और पोटाश में समृद्ध है।
लाल, लैटेराइट, शुष्क और वन मृदा
- लाल मृदा पूर्वी और दक्षिणी दक्कन के कम वर्षा वाले भागों में क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टान पर बनती है; इसका रंग लौह ऑक्साइड से आता है।
- लैटेराइट मृदा अधिक वर्षा और अधिक ताप वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन से बनती है; यह पोषक तत्वों में कम है पर खाद देने पर चाय, कॉफी और काजू के अनुकूल है।
- पश्चिमी राजस्थान की शुष्क मृदा बलुई और लवणीय है, ह्यूमस में कम है, और सिंचाई मिलने पर कृषि योग्य हो जाती है।
- वन मृदा पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में मिलती है; घाटियों में दोमट और ऊपरी ढालों पर मोटी होती है।
- मृदा उर्वरता ह्यूमस मात्रा, गठन और गहराई पर निर्भर है, केवल रंग पर नहीं।
- भारतीय मृदाओं में प्रायः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जैविक पदार्थ कम रहते हैं, इसलिए खाद आवश्यक है।
- जल निकासी बिना अधिक सिंचाई मृदा को लवणीय और क्षारीय बना देती है, जो पंजाब और हरियाणा में बढ़ती समस्या है।
| मृदा | मुख्य क्षेत्र | उपयुक्त फसल |
|---|---|---|
| जलोढ़ | उत्तरी मैदान, डेल्टा | गेहूं, चावल, गन्ना |
| काली | दक्कन ट्रैप क्षेत्र | कपास |
| लाल और पीली | पूर्वी और दक्षिणी दक्कन | मोटे अनाज, दलहन |
| लैटेराइट | पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर | चाय, कॉफी, काजू |
| शुष्क | पश्चिमी राजस्थान | सिंचाई से जौ, बाजरा |
निक्षालन (Leaching) — भारी वर्षा से ऊपरी मृदा के घुलनशील पोषक तत्वों का नीचे बह जाना।
Exam me kaise aata hai
- भारत की सर्वाधिक विस्तृत मृदा — जलोढ़
- काली मृदा को और क्या कहते हैं — रेगुर
- काली मृदा किस फसल के लिए सर्वोत्तम है — कपास
- पुरानी जलोढ़ मृदा कहलाती है — बांगर
UPSC/State PSC ke liye
- काली मृदा का स्वतः जुताई (self ploughing) गुण ग्रीष्म में पड़ने वाली गहरी दरारों से आता है, जो ऊपरी परतें मिला देती हैं।
- लैटेराइट मृदा सूखने पर कठोर हो जाती है और दक्षिण-पश्चिमी तट के कुछ भागों में भवन ईंट के रूप में काटी जाती है।
Yahan confuse hote hain
✗ खादर पुरानी जलोढ़ है | खादर नई जलोढ़ है; बांगर पुरानी है | ✓
✗ काली मृदा ह्यूमस के कारण काली है | यह जनक लावा चट्टान और लौह अंश के कारण काली है | ✓
✗ लैटेराइट मृदा पोषक तत्वों में समृद्ध है | निक्षालन इसे पोषक तत्वों में कम बना देता है | ✓
Ek nazar me
- छह मृदाएं: जलोढ़, काली, लाल और पीली, लैटेराइट, शुष्क, वन।
- जलोढ़ सर्वाधिक विस्तृत; बांगर पुरानी और खादर नई।
- काली या रेगुर कपास के अनुकूल और नमी रोकने वाली।
- लैटेराइट निक्षालन से बनती है और बागानी फसलों के अनुकूल है।
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