वन्य जीवन और संरक्षण
Wildlife and Conservation
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Natural Vegetation and Wildlife" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Forest and Wildlife Resources"
वन्य जीवन और संरक्षण
भारत अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र में विश्व की ज्ञात प्रजातियों का बहुत बड़ा भाग रखता है, जिससे यह मेगा विविध देशों में गिना जाता है। आवास हानि, शिकार, प्रदूषण और खेती के विस्तार ने कई प्रजातियों को विलुप्ति की ओर धकेला है, इसलिए राज्य संरक्षित क्षेत्रों और प्रजाति परियोजनाओं की स्तरित व्यवस्था चलाता है।
वन और प्रजातियों की श्रेणियां
- आरक्षित वन सर्वाधिक संरक्षित हैं; रक्षित वन सीमित उपयोग देते हैं; अवर्गीकृत वन में निजी और सामुदायिक भूमि के वन आते हैं।
- प्रजातियां सामान्य, संकटग्रस्त, सुभेद्य, दुर्लभ, स्थानिक और विलुप्त में वर्गीकृत हैं।
- संकटग्रस्त प्रजातियां कारण बने रहने पर विलुप्त हो सकती हैं; जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड।
- स्थानिक प्रजातियां केवल एक क्षेत्र में मिलती हैं, जैसे अंडमान का जंगली सूअर।
- एशियाई शेर केवल गुजरात के गिर वन में बचा है।
- एक सींग वाला गैंडा असम के काजीरंगा और पश्चिम बंगाल में मिलता है।
संरक्षित क्षेत्र और परियोजनाएं
- राष्ट्रीय उद्यान सर्वाधिक कठोर संरक्षण देते हैं और चराई या निजी अधिकार की अनुमति नहीं देते।
- वन्यजीव अभयारण्य प्रजातियों की रक्षा करते हैं पर कुछ नियंत्रित मानवीय गतिविधि की छूट देते हैं।
- जीवमंडल निचय (biosphere reserve) पूरे पारितंत्र की रक्षा करते हैं और इनमें क्रोड, बफर तथा संक्रमण क्षेत्र होते हैं।
- प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में बाघ और उसके आवास को बचाने के लिए शुरू हुआ।
- प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में हाथी गलियारों और आवास के लिए शुरू हुआ।
- संयुक्त वन प्रबंधन गांव समुदायों को वन रक्षा और उपज में भागीदार बनाता है, जिसकी शुरुआत ओडिशा में 1988 में हुई।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 ने राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों का विधिक आधार बनाया।
- राजस्थान के बिश्नोई गांवों के पास सामुदायिक संरक्षण पीढ़ियों से काले हिरण की रक्षा करता आया है।
- आवास गलियारों की हानि अब सीधे शिकार जितनी ही गंभीर संकट बन चुकी है।
| संरक्षित क्षेत्र | संरक्षण स्तर | उदाहरण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय उद्यान | सर्वाधिक कठोर | काजीरंगा, असम |
| वन्यजीव अभयारण्य | नियंत्रित उपयोग की छूट | अनेक राज्यों में |
| जीवमंडल निचय | पूरा पारितंत्र | नीलगिरि, सुंदरबन |
| बाघ आरक्षित क्षेत्र | प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत | वाल्मीकि, बिहार |
जीवमंडल निचय — क्रोड, बफर और संक्रमण क्षेत्र वाला बड़ा संरक्षित क्षेत्र जो पूरे पारितंत्र और स्थानीय जीविका दोनों की रक्षा करता है।
Exam me kaise aata hai
- प्रोजेक्ट टाइगर कब शुरू हुआ — 1973
- एशियाई शेर कहां मिलता है — गिर वन, गुजरात
- एक सींग वाला गैंडा कहां मिलता है — काजीरंगा, असम
- प्रोजेक्ट एलिफेंट कब शुरू हुआ — 1992
UPSC/State PSC ke liye
- जीवमंडल निचय के क्रोड क्षेत्र में मानवीय गतिविधि वर्जित है, बफर में शोध और शिक्षा की छूट है, तथा संक्रमण क्षेत्र में नियंत्रित बसाव और खेती की अनुमति है।
- संयुक्त वन प्रबंधन इसलिए सफल है कि यह सामुदायिक आय को वन की कटाई से नहीं, वन के स्वास्थ्य से जोड़ता है।
Yahan confuse hote hain
✗ अभयारण्य का संरक्षण राष्ट्रीय उद्यान से कठोर है | राष्ट्रीय उद्यान अधिक कठोर है | ✓
✗ प्रोजेक्ट टाइगर 1992 में शुरू हुआ | प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में; प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में | ✓
✗ एशियाई शेर राजस्थान में मिलता है | यह गुजरात के गिर में मिलता है | ✓
Ek nazar me
- वन: आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत।
- प्रजाति श्रेणियां: सामान्य, संकटग्रस्त, सुभेद्य, दुर्लभ, स्थानिक, विलुप्त।
- राष्ट्रीय उद्यान सर्वाधिक कठोर, फिर अभयारण्य, फिर पूरे पारितंत्र के लिए जीवमंडल निचय।
- प्रोजेक्ट टाइगर 1973, प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992, संयुक्त वन प्रबंधन ओडिशा से।
Ab practice karein
Mitti, van aur wildlife se har exam me seedhe factual questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi practice karein.
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