असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं नमक सत्याग्रह
असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं नमक सत्याग्रह
यह विषय 1 से 2 प्रश्न देता है और इसमें तिथियों का क्रम ही सब कुछ है। असहयोग से लेकर दांडी तक की घटनाएँ एक रेखा में जुड़ी हुई हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग नहीं, क्रम में याद कीजिए।
असहयोग तक का रास्ता
- रौलट अधिनियम, 1919 — बिना मुकदमे के गिरफ़्तारी का अधिकार; इसके विरोध में देशव्यापी हड़ताल हुई।
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड — 13 अप्रैल 1919, अमृतसर; जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर गोली चलवाई।
- खिलाफ़त आंदोलन — तुर्की के ख़लीफ़ा के प्रश्न पर, जिसे गांधी जी ने असहयोग से जोड़ा।
जलियाँवाला बाग के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी — यह एक पंक्ति सीधे पूछी जाती है।
असहयोग आंदोलन, 1920 से 1922
आंदोलन का आधार यह था कि ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से चलता है, इसलिए सहयोग वापस लेने पर वह टिक नहीं पाएगा। इसमें उपाधियों की वापसी, विद्यालयों-न्यायालयों का बहिष्कार और विदेशी वस्तुओं का त्याग शामिल था।
आंदोलन फ़रवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के बाद वापस ले लिया गया, जहाँ भीड़ ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। गांधी जी ने हिंसा के कारण आंदोलन स्थगित कर दिया — यह निर्णय सीधे पूछा जाता है।
✗ असहयोग आंदोलन जलियाँवाला बाग के कारण वापस लिया गया | ✓ वह चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद 1922 में वापस लिया गया
साइमन कमीशन एवं पूर्ण स्वराज
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1927 | साइमन कमीशन की घोषणा; इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था |
| 1928 | कमीशन भारत आया; साइमन वापस जाओ का नारा |
| 1929 | लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव |
| 1930 | 26 जनवरी को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया |
26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, और इसी कारण आगे चलकर संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। दोनों तिथियों का यह संबंध पूछा जाता है।
सविनय अवज्ञा एवं दांडी यात्रा
आंदोलन 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक की यात्रा से आरंभ हुआ। लगभग 240 मील की यह यात्रा 24 दिन चली और 6 अप्रैल 1930 को गांधी जी ने समुद्र तट पर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा।
नमक इसलिए चुना गया कि वह सबसे ग़रीब से लेकर सबसे अमीर तक हर घर की ज़रूरत थी, इसलिए उस पर लगा कर हर व्यक्ति को अन्यायपूर्ण लगता था। यह चुनाव का कारण भी पूछा जाता है।
पूरी रेखा एक साथ रखिए — 1919 रौलट और जलियाँवाला, 1920 असहयोग, 1922 चौरी-चौरा, 1927 साइमन, 1929 पूर्ण स्वराज, 1930 दांडी।
TRE संकेत: चौरी-चौरा के कारण असहयोग की वापसी तयशुदा प्रश्न है, जलियाँवाला के कारण नहीं। 13 अप्रैल 1919 जलियाँवाला और 6 अप्रैल 1930 नमक कानून दोनों तिथियाँ अलग-अलग याद रखिए। 26 जनवरी 1930 का पहला स्वतंत्रता दिवस और 1950 में संविधान लागू होने का संबंध भी पूछा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- रौलट अधिनियम 1919 में आया; जलियाँवाला बाग 13 अप्रैल 1919 को हुआ।
- टैगोर ने विरोध में नाइटहुड की उपाधि लौटा दी।
- असहयोग आंदोलन 1920 में शुरू और 1922 में चौरी-चौरा के बाद वापस लिया गया।
- साइमन कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था।
- 1929 लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ।
- दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को शुरू हुई और 6 अप्रैल को नमक कानून टूटा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?
फ़रवरी 1922 की चौरी-चौरा घटना के कारण, जहाँ आंदोलनकारी भीड़ ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी और कई पुलिसकर्मी मारे गए। गांधी जी अहिंसा पर अडिग थे, इसलिए उन्होंने हिंसा होते ही पूरा आंदोलन स्थगित कर दिया।
दांडी यात्रा में नमक ही क्यों चुना गया?
क्योंकि नमक हर घर की आवश्यकता थी, चाहे परिवार ग़रीब हो या अमीर। उस पर लगा कर हर व्यक्ति को सीधे प्रभावित करता था, इसलिए उसे तोड़ना पूरे देश को जोड़ने वाला प्रतीक बन गया। यही कारण उसकी सफलता का आधार बना।
साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?
क्योंकि उसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, जबकि वह भारत के संवैधानिक सुधारों पर सिफ़ारिश देने आया था। इसी कारण 1928 में उसके भारत आने पर साइमन वापस जाओ के नारों के साथ देशव्यापी विरोध हुआ।
26 जनवरी की तिथि का क्या महत्व है?
1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित होने के बाद 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी स्मृति में आगे चलकर संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।
