नोट्स बनाना एवं सारांश लेखन
Note-Making and Summarising
यह कौशल परीक्षा और कक्षा दोनों में काम आता है। परीक्षा में इससे सीधे प्रश्न आ सकते हैं, और शिक्षक बनने के बाद यही कौशल पाठ को संक्षेप में समझाने के काम आता है। इसलिए इसे केवल अंक की दृष्टि से मत देखिए।
सारांश में क्या होना चाहिए
अच्छा सारांश तीन शर्तें पूरी करता है — वह मूल के मुख्य विचार रखता है, अपने शब्दों में होता है, और मूल का लगभग एक तिहाई होता है।
- उसमें कोई नई बात नहीं जोड़ी जाती।
- उसमें अपनी राय नहीं आती।
- उदाहरण, दोहराव और अलंकार हटा दिए जाते हैं।
- वह अन्य पुरुष में और एक ही अनुच्छेद में लिखा जाता है।
सबसे आम भूल यह होती है कि परीक्षार्थी मूल की पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उठा लेता है। यह सारांश नहीं, केवल छोटा किया गया अंश होता है और उसके अंक कट जाते हैं।
विधि
- पूरा अंश एक बार पढ़िए और मुख्य विचार समझिए।
- दूसरी बार पढ़ते हुए मुख्य बिंदु रेखांकित कीजिए।
- अब मूल को बंद कर दीजिए और अपने शब्दों में बिंदु लिखिए।
- उन्हें जोड़कर एक प्रवाहमय अनुच्छेद बनाइए।
- अंत में शब्द गिनिए और एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
तीसरा कदम सबसे महत्वपूर्ण है। मूल सामने रखकर लिखने से भाषा अपने आप उसी की हो जाती है, इसलिए उसे बंद करके लिखना ही सबसे भरोसेमंद तरीका है।
✗ सारांश में मूल अंश की पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उतार देना | ✓ मूल को बंद करके अपने शब्दों में लिखिए, यही सारांश की मूल शर्त है
नोट्स का प्रारूप
नोट्स सारांश से अलग होते हैं। वे पूरे वाक्यों में नहीं, शीर्षक और उपशीर्षक के रूप में लिखे जाते हैं और उनमें संक्षेपाक्षर चल जाते हैं।
- ऊपर एक शीर्षक दीजिए।
- मुख्य बिंदु को संख्या और उपबिंदु को अक्षर दीजिए।
- क्रियापद और आर्टिकल हटा दीजिए।
- अंत में प्रयुक्त संक्षेपाक्षरों की सूची दीजिए।
नोट्स का उद्देश्य यह है कि बाद में एक नज़र में पूरा विषय याद आ जाए, इसलिए उनमें सुंदर भाषा नहीं, स्पष्ट ढाँचा चाहिए।
अंक से आगे इसका महत्व
शिक्षक के लिए यह कौशल रोज़ काम आता है — पाठ का सार बोर्ड पर लिखना, बच्चों को अध्याय का ढाँचा दिखाना, और लंबे पाठ को छोटे बिंदुओं में बाँटना। इसीलिए शिक्षक भर्ती परीक्षा में यह भाग रखा जाता है।
सारांश और नोट्स में अंतर याद रखिए — सारांश प्रवाहमय अनुच्छेद है और नोट्स बिंदुवार ढाँचा। प्रश्न में जो माँगा गया हो वही दीजिए, दोनों को मिला देने पर अंक कटते हैं।
TRE संकेत: सारांश मूल का लगभग एक तिहाई होना चाहिए — यह सीधे पूछा जाता है। सारांश में अपनी राय नहीं आती, यह भी तयशुदा है। नोट्स बिंदुवार और सारांश अनुच्छेद रूप में होते हैं, यह अंतर भी बार-बार आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- सारांश मूल के मुख्य विचार अपने शब्दों में रखता है।
- उसकी लंबाई मूल की लगभग एक तिहाई होनी चाहिए।
- उसमें नई बात या अपनी राय नहीं जोड़ी जाती।
- मूल को बंद करके लिखना सबसे भरोसेमंद तरीका है।
- नोट्स पूरे वाक्यों में नहीं, बिंदुवार लिखे जाते हैं।
- नोट्स के अंत में संक्षेपाक्षरों की सूची दी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सारांश कितना लंबा होना चाहिए?
सामान्य नियम यह है कि वह मूल अंश का लगभग एक तिहाई हो। यदि प्रश्न में शब्द सीमा दी गई हो तो वही मानिए, क्योंकि सीमा से बहुत अधिक या बहुत कम लिखने पर अंक कटते हैं। लिखने के बाद शब्द गिन लेना एक अच्छी आदत है।
सारांश में अपनी राय क्यों नहीं देनी चाहिए?
क्योंकि सारांश का काम मूल लेखक की बात संक्षेप में रखना है, अपनी बात कहना नहीं। अपनी राय जोड़ते ही वह सारांश न रहकर टिप्पणी बन जाता है। इसी तरह कोई नया उदाहरण या नया तथ्य भी नहीं जोड़ा जाता, चाहे वह कितना ही उपयुक्त क्यों न लगे।
नोट्स और सारांश में क्या अंतर है?
सारांश पूरे वाक्यों में और प्रवाहमय अनुच्छेद के रूप में लिखा जाता है। नोट्स शीर्षक और उपशीर्षक के ढाँचे में लिखे जाते हैं, जिनमें पूरे वाक्य ज़रूरी नहीं और संक्षेपाक्षर चल जाते हैं। सारांश पढ़ने के लिए है और नोट्स याद दिलाने के लिए।
यह कौशल शिक्षक के लिए क्यों उपयोगी है?
क्योंकि कक्षा में लंबे पाठ को कम समय में समझाना पड़ता है। जो शिक्षक अध्याय का सार कुछ बिंदुओं में रख सकता है, वह बच्चों को विषय का ढाँचा दिखा देता है और उन्हें दोहराने में भी सुविधा होती है। इसीलिए भर्ती परीक्षा में यह भाग शामिल किया जाता है।
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