सूचना, प्रतिवेदन एवं लेख लेखन
सूचना, प्रतिवेदन एवं लेख लेखन
ये तीनों रूप विद्यालय के काम से सीधे जुड़े हैं, इसलिए शिक्षक भर्ती परीक्षा में इनसे प्रश्न आना स्वाभाविक है। तीनों का प्रारूप अलग है और परीक्षा प्रायः यही पूछती है कि किस रूप में क्या-क्या अनिवार्य होता है।
सूचना
सूचना बहुत संक्षिप्त होती है और उसका काम केवल जानकारी देना है। उसमें पाँच बातें अनिवार्य हैं — क्या, कब, कहाँ, किसके लिए और किसकी ओर से।
- ऊपर संस्था का नाम और उसके नीचे बड़े अक्षरों में NOTICE।
- तिथि बाईं ओर।
- शीर्षक जो विषय बता दे।
- मुख्य भाग तीस से पचास शब्दों में।
- अंत में नाम और पद।
सूचना में पूरे वाक्य लिखे जाते हैं पर भाषा बिल्कुल सीधी रहती है। उसमें कोई भाव, कोई राय और कोई विवरण नहीं आता — केवल तथ्य। यही उसे पत्र और लेख से अलग करता है।
✗ सूचना में अपनी राय या अपील जोड़ देना | ✓ सूचना केवल तथ्य देती है; अपील और राय लेख या पत्र का काम है
प्रतिवेदन
प्रतिवेदन किसी घटी हुई घटना का लिखित विवरण है, इसलिए वह प्रायः भूतकाल और कर्मवाच्य में लिखा जाता है। विद्यालय में खेल दिवस, विज्ञान प्रदर्शनी या वृक्षारोपण कार्यक्रम के प्रतिवेदन सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
- शीर्षक — घटना का नाम।
- पंक्ति — रिपोर्ट लिखने वाले का नाम और स्थान।
- प्रारंभिक अनुच्छेद — कब, कहाँ और क्या हुआ।
- मुख्य भाग — क्रम से पूरा विवरण।
- समापन — परिणाम या धन्यवाद ज्ञापन।
प्रतिवेदन में अन्य पुरुष का प्रयोग होता है और मैं नहीं आता, क्योंकि वह व्यक्तिगत अनुभव नहीं बल्कि तथ्यात्मक विवरण है। यह बिंदु सीधे पूछा जाता है।
लेख
लेख किसी विषय पर लिखी वह रचना है जिसमें तथ्य और राय दोनों होते हैं। वह समाचार पत्र या पत्रिका के लिए लिखा जाता है, इसलिए उसमें पाठक को जोड़ने वाली शैली चाहिए।
| भाग | क्या हो |
|---|---|
| शीर्षक | आकर्षक और विषय बताने वाला |
| लेखक का नाम | शीर्षक के नीचे |
| प्रस्तावना | विषय की गंभीरता या रोचकता |
| मुख्य भाग | कारण, प्रभाव और उदाहरण |
| उपसंहार | सुझाव और निष्कर्ष |
लेख और प्रतिवेदन का अंतर स्पष्ट रखिए — प्रतिवेदन बताता है कि क्या हुआ, जबकि लेख बताता है कि उसके बारे में क्या सोचा जाना चाहिए। यही अंतर परीक्षा में पूछा जाता है।
तीनों रूपों को एक पंक्ति में अलग कीजिए — सूचना केवल सूचित करती है, प्रतिवेदन घटी हुई बात का विवरण देता है, और लेख विषय पर विचार रखता है। प्रश्न में जो माँगा जाए, वही रूप दीजिए।
TRE संकेत: सूचना में पाँच अनिवार्य बातें सीधे पूछी जाती हैं। प्रतिवेदन अन्य पुरुष में लिखा जाता है यह भी तयशुदा है। प्रतिवेदन और लेख का अंतर तथा सूचना की शब्द सीमा भी बार-बार आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- सूचना में क्या, कब, कहाँ, किसके लिए और किसकी ओर से — पाँचों होना चाहिए।
- सूचना केवल तथ्य देती है, राय नहीं।
- प्रतिवेदन घटी हुई घटना का विवरण है और भूतकाल में लिखा जाता है।
- प्रतिवेदन अन्य पुरुष में लिखा जाता है, मैं का प्रयोग नहीं होता।
- लेख में तथ्य के साथ लेखक की राय भी आती है।
- प्रतिवेदन बताता है क्या हुआ, लेख बताता है क्या सोचा जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूचना में कौन-सी बातें अनिवार्य हैं?
पाँच बातें — क्या हो रहा है, कब हो रहा है, कहाँ हो रहा है, किसके लिए है, और किसकी ओर से जारी की गई है। इनमें से एक भी छूट जाए तो सूचना अधूरी मानी जाती है। साथ ही ऊपर संस्था का नाम, तिथि, शीर्षक और अंत में नाम तथा पद भी होना चाहिए।
प्रतिवेदन में मैं का प्रयोग क्यों नहीं होता?
क्योंकि प्रतिवेदन व्यक्तिगत अनुभव नहीं, किसी घटना का तथ्यात्मक विवरण है। उसे पढ़ने वाला यह जानना चाहता है कि क्या हुआ, न कि लिखने वाले को कैसा लगा। इसीलिए वह अन्य पुरुष में और प्रायः कर्मवाच्य में लिखा जाता है, जिससे ध्यान घटना पर रहे।
लेख और प्रतिवेदन में मूल अंतर क्या है?
प्रतिवेदन बताता है कि क्या हुआ, और उसमें लेखक की राय नहीं आती। लेख किसी विषय पर विचार रखता है, उसमें तथ्य के साथ कारण, प्रभाव और सुझाव भी होते हैं। एक ही घटना पर दोनों लिखे जा सकते हैं, पर उनका उद्देश्य और शैली अलग रहेगी।
सूचना कितनी लंबी होनी चाहिए?
मुख्य भाग सामान्यतः तीस से पचास शब्दों में पूरा हो जाना चाहिए। सूचना का काम ध्यान खींचना और जानकारी देना है, इसलिए उसे एक नज़र में पढ़ा जा सकने लायक होना चाहिए। लंबी सूचना अपना उद्देश्य ही खो देती है और परीक्षा में उसके अंक भी कटते हैं।
