पादपों में पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण
पादपों में पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण से प्रश्न लगभग हर बार आता है और वह प्रायः तीन में से एक होता है — क्रिया के लिए क्या-क्या आवश्यक है, वह पत्ती के किस भाग में होती है, या पोषण की किस विधि का कौन-सा उदाहरण है। तीनों बिंदु उदाहरण सहित पक्के कर लीजिए।
पोषण की विधियाँ
| विधि | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वपोषी | स्वयं भोजन बनाना | हरे पौधे |
| परजीवी | दूसरे जीवित पौधे से भोजन लेना | अमरबेल, अमरलता |
| मृतजीवी | सड़े-गले पदार्थ से भोजन लेना | कवक, मशरूम |
| सहजीवी | दोनों का पारस्परिक लाभ | लाइकेन, राइजोबियम |
| कीटभक्षी | कीट पकड़कर नाइट्रोजन लेना | घटपर्णी, ड्रॉसेरा |
कीटभक्षी पौधे हरे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण भी करते हैं, पर वे उस मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन की कमी होती है, इसलिए कीट पकड़कर नाइट्रोजन की भरपाई करते हैं। यह बारीकी परीक्षा में पूछी जाती है।
राइजोबियम जीवाणु दलहनी पौधों की जड़ की ग्रंथियों में रहता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधे के उपयोग लायक बना देता है, बदले में पौधे से भोजन और आश्रय पाता है। इसीलिए दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं।
प्रकाश संश्लेषण
कार्बन डाइऑक्साइड + जल → (सूर्य प्रकाश, पर्णहरित) → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
इस क्रिया के लिए चार चीज़ें आवश्यक हैं — कार्बन डाइऑक्साइड, जल, सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित। इनमें से एक भी न हो तो क्रिया नहीं होगी। कार्बन डाइऑक्साइड रंध्रों से आती है और जल जड़ों द्वारा सोखा जाता है।
यह क्रिया पत्ती की कोशिकाओं में स्थित हरितलवक में होती है, इसीलिए पत्ती को पौधे का रसोईघर कहा जाता है। बना हुआ भोजन मंड के रूप में संचित होता है, और आयोडीन की एक बूँद डालने पर पत्ती का नीला-काला हो जाना इसी की जाँच है।
कुछ पत्तियाँ लाल या भूरी होती हैं, फिर भी उनमें प्रकाश संश्लेषण होता है, क्योंकि पर्णहरित उपस्थित तो होता है पर दूसरे वर्णकों से ढक जाता है। यह जाल परीक्षा में आ चुका है।
✗ प्रकाश संश्लेषण केवल हरी पत्तियों में ही संभव है | ✓ लाल या भूरी पत्तियों में भी पर्णहरित रहता है, वह केवल दूसरे वर्णकों से ढका होता है
प्रकाश संश्लेषण और श्वसन साथ-साथ
| बिंदु | प्रकाश संश्लेषण | श्वसन |
|---|---|---|
| कब | केवल दिन में | दिन और रात दोनों |
| गैस ली जाती है | कार्बन डाइऑक्साइड | ऑक्सीजन |
| गैस छोड़ी जाती है | ऑक्सीजन | कार्बन डाइऑक्साइड |
| ऊर्जा | संचित होती है | मुक्त होती है |
पौधा दिन-रात श्वसन करता है, पर दिन में प्रकाश संश्लेषण की दर श्वसन से कहीं अधिक होती है, इसलिए कुल मिलाकर ऑक्सीजन ही निकलती दिखती है। रात में केवल श्वसन चलता है, इसीलिए घने पेड़ के नीचे रात में सोना उचित नहीं माना जाता।
पौधे से आगे का महत्व
- पृथ्वी पर सारा भोजन अंततः पौधों से ही आता है।
- वायुमंडल की ऑक्सीजन इसी क्रिया से बनी है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर संतुलित रहता है।
- कोयला और पेट्रोलियम भी करोड़ों वर्ष पुरानी इसी क्रिया की उपज हैं।
प्रकाश संश्लेषण के प्रश्न में सबसे पहले यह देखिए कि चारों आवश्यक चीज़ों में से किसे हटाया गया है। प्रयोग वाले प्रश्न इसी तर्क पर बनते हैं — पत्ती को काग़ज़ से ढकना प्रकाश हटाना है और क्षार रखना कार्बन डाइऑक्साइड हटाना।
TRE संकेत: पत्ती को पौधे का रसोईघर कहते हैं और मंड की जाँच आयोडीन से होती है — दोनों तय प्रश्न हैं। अमरबेल परजीवी और घटपर्णी कीटभक्षी है, यह जोड़ी सीधे पूछी जाती है। राइजोबियम सहजीवी है वाला बिंदु भी बार-बार आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- हरे पौधे स्वपोषी होते हैं और अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- अमरबेल परजीवी, कवक मृतजीवी और घटपर्णी कीटभक्षी पौधा है।
- प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, जल, प्रकाश और पर्णहरित आवश्यक हैं।
- यह क्रिया पत्ती के हरितलवक में होती है।
- बना भोजन मंड के रूप में संचित होता है, जिसकी जाँच आयोडीन से होती है।
- श्वसन दिन-रात चलता है, जबकि प्रकाश संश्लेषण केवल दिन में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कीटभक्षी पौधे कीट क्यों पकड़ते हैं?
वे हरे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन बना लेते हैं, इसलिए कीट उन्हें ऊर्जा के लिए नहीं चाहिए। समस्या नाइट्रोजन की है, क्योंकि वे दलदली मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन बहुत कम होती है। कीटों को पचाकर वे यही कमी पूरी करते हैं।
रात में पेड़ के नीचे सोने से क्यों मना किया जाता है?
पौधे दिन और रात दोनों समय श्वसन करते हैं, पर प्रकाश संश्लेषण केवल दिन में होता है। इसलिए रात में पेड़ केवल ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है। घने पेड़ के नीचे बंद जगह में इससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ सकती है।
पत्ती में मंड की जाँच कैसे करते हैं?
पहले पत्ती को अल्कोहल में उबालकर उसका हरा रंग हटाया जाता है, फिर उस पर आयोडीन की कुछ बूँदें डाली जाती हैं। जहाँ मंड बना है वह भाग नीला-काला हो जाता है और जहाँ नहीं बना वह भूरा ही रहता है। यही प्रयोग सिद्ध करता है कि प्रकाश संश्लेषण हुआ या नहीं।
दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता कैसे बढ़ाती हैं?
दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में राइजोबियम नामक जीवाणु रहता है, जो वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधे के काम आने वाले यौगिकों में बदल देता है। फसल कटने के बाद यह नाइट्रोजन मिट्टी में रह जाती है, इसलिए किसान फसल चक्र में दलहन को शामिल करते हैं।
