पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
सामान्य जागरूकता से आने वाले लगभग 8 प्रश्नों में से 1 से 2 इसी विषय से रहते हैं, और बिहार के पत्र में इसकी संभावना और बढ़ जाती है। दो संशोधन, तीन स्तर और आरक्षण — इन तीनों की संख्याएँ सीधे पूछी जाती हैं, इसलिए इन्हें तालिका की तरह याद कीजिए।
73वाँ एवं 74वाँ संशोधन
| बिंदु | 73वाँ संशोधन | 74वाँ संशोधन |
|---|---|---|
| पारित | 1992 | 1992 |
| लागू | 24 अप्रैल 1993 | 1 जून 1993 |
| क्षेत्र | ग्रामीण, पंचायती राज | नगरीय निकाय |
| भाग जोड़ा | IX | IXA |
| अनुसूची | ग्यारहवीं, 29 विषय | बारहवीं, 18 विषय |
पारित होने का वर्ष और लागू होने की तिथि अलग-अलग हैं — यही सबसे आम भ्रम है। 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है, क्योंकि उसी दिन 73वाँ संशोधन लागू हुआ।
✗ 73वाँ संशोधन 1993 में पारित हुआ | ✓ पारित 1992 में हुआ; लागू 24 अप्रैल 1993 को हुआ
यह संशोधन अनुच्छेद 40 को लागू करता है, जो एक नीति निर्देशक तत्व है और राज्य से ग्राम पंचायतों के गठन की अपेक्षा करता है।
तीन स्तर
- ग्राम पंचायत — गाँव स्तर पर, जिसका आधार ग्राम सभा है।
- पंचायत समिति — प्रखंड यानी मध्यवर्ती स्तर पर।
- जिला परिषद — जिला स्तर पर।
तीन स्तर वाली व्यवस्था बीस लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों के लिए अनिवार्य है। हर निकाय का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है और समय से पहले भंग होने पर छह माह के भीतर चुनाव कराना पड़ता है।
ग्राम सभा चुनी हुई नहीं होती — वह गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सभा है और इस ढाँचे की अकेली स्थायी इकाई है। इसे चुनी हुई परिषद समझ लेना बहुत आम गलती है।
आरक्षण एवं बिहार की पहल
संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए जनसंख्या के अनुपात में तथा महिलाओं के लिए कम से कम एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है। राज्य इससे आगे भी जा सकते हैं।
बिहार ने यही किया। 2006 में बिहार ने पंचायत की 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कीं और ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना। यह पूरे विषय का सबसे राज्य-विशिष्ट तथ्य है और बिहार के पत्र में इसकी संभावना सबसे अधिक है।
सहायक संवैधानिक तंत्र
- राज्य निर्वाचन आयोग — पंचायत और नगर निकाय के चुनाव कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं।
- राज्य वित्त आयोग — हर पाँच वर्ष पर इनकी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
- नगरीय निकाय तीन प्रकार के — नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम।
जोड़े में याद कीजिए — 73वाँ के साथ ग्रामीण, ग्यारहवीं अनुसूची, 29 विषय; और 74वाँ के साथ नगरीय, बारहवीं अनुसूची, 18 विषय। एक जोड़ा याद रहने पर दूसरा अपने आप याद आ जाता है।
TRE संकेत: बिहार 2006 में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण, देश का पहला राज्य — यह इस विषय का सबसे तय प्रश्न है। पारित 1992, लागू 1993 का अंतर याद रखिए और 24 अप्रैल राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस भी। तीसरा जाल यह है कि पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं।
60 सेकंड का रिवीजन
- 73वाँ और 74वाँ संशोधन 1992 में पारित, 1993 में लागू हुए।
- 73वाँ ने भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय जोड़े।
- 74वाँ ने भाग IXA और बारहवीं अनुसूची में 18 विषय जोड़े।
- तीन स्तर — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद, कार्यकाल पाँच वर्ष।
- ग्राम सभा चुनी हुई नहीं, वह गाँव के सभी मतदाताओं की सभा है।
- बिहार ने 2006 में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण दिया, देश में पहला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचायत में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण देने वाला पहला राज्य कौन है?
बिहार, वर्ष 2006 में। संविधान कम से कम एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने को कहता है, और बिहार उससे आगे जाकर पचास प्रतिशत तक गया। बाद में कई अन्य राज्यों ने भी यही अनुपात अपनाया।
ग्राम सभा और ग्राम पंचायत में क्या अंतर है?
ग्राम सभा गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सभा है और वह चुनी नहीं जाती। ग्राम पंचायत उन्हीं मतदाताओं द्वारा पाँच वर्ष के लिए चुनी गई परिषद है। सभा स्थायी होती है और अपनी बैठकों के माध्यम से पंचायत से जवाब माँगती है।
पंचायत चुनाव कौन कराता है?
हर राज्य का राज्य निर्वाचन आयोग, जिसका गठन 73वें और 74वें संशोधन से हुआ। भारत निर्वाचन आयोग केवल संसद, विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराता है। यह अंतर परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस क्यों मनाया जाता है?
क्योंकि 73वाँ संविधान संशोधन, जिसने पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया, 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ था। संशोधन स्वयं 1992 में पारित हुआ था, इसलिए पारित होने का वर्ष और लागू होने की तिथि अलग-अलग हैं।
