स्थानीय स्वशासन: पंचायती राज एवं नगरीय निकाय
स्थानीय स्वशासन: पंचायती राज एवं नगरीय निकाय
स्थानीय स्वशासन से प्रश्न लगभग निश्चित है, क्योंकि बिहार ने इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहल की है। प्रश्न प्रायः दो संशोधनों, तीन स्तरों और आरक्षण की व्यवस्था पर आते हैं, इसलिए तीनों को अलग-अलग पक्का कीजिए।
दो संशोधन
| संशोधन | वर्ष | विषय | अनुसूची |
|---|---|---|---|
| तिहत्तरवाँ | 1992 | पंचायती राज | ग्यारहवीं |
| चौहत्तरवाँ | 1992 | नगरीय निकाय | बारहवीं |
दोनों संशोधन 1992 में पारित हुए और 1993 में लागू। इनसे पहले पंचायतें राज्यों की मर्ज़ी पर चलती थीं, पर अब उन्हें संवैधानिक दर्जा मिल गया और हर पाँच वर्ष में चुनाव अनिवार्य हो गया।
ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के लिए उनतीस विषय और बारहवीं अनुसूची में नगरीय निकायों के लिए अठारह विषय दिए गए हैं। इन दोनों संख्याओं और अनुसूचियों को आपस में मत मिलाइए, क्योंकि विकल्पों में यही जाल रखा जाता है।
तीन स्तर
| स्तर | संस्था | प्रमुख |
|---|---|---|
| ग्राम | ग्राम पंचायत | मुखिया या सरपंच |
| प्रखंड | पंचायत समिति | प्रमुख |
| ज़िला | ज़िला परिषद | अध्यक्ष |
ग्राम सभा गाँव के सभी मतदाताओं की सभा है और वह पंचायती राज की आधार इकाई है। ध्यान दीजिए कि ग्राम सभा निर्वाचित संस्था नहीं है, उसमें गाँव का हर मतदाता स्वयं सदस्य होता है — यह अंतर सीधे पूछा जाता है।
बीस लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में दो स्तर भी हो सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव कराता है और राज्य वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में संसाधनों के बँटवारे की सिफ़ारिश करता है।
✗ ग्राम सभा एक निर्वाचित संस्था है | ✓ ग्राम सभा में गाँव के सभी मतदाता स्वयं सदस्य होते हैं; निर्वाचित संस्था ग्राम पंचायत है
आरक्षण और बिहार
दोनों संशोधनों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए जनसंख्या के अनुपात में तथा महिलाओं के लिए कम से कम एक तिहाई स्थान आरक्षित करने की व्यवस्था की गई। अध्यक्ष पदों पर भी यही आरक्षण लागू होता है।
बिहार ने 2006 में पंचायतों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण लागू किया और ऐसा करने वाला पहला राज्य बना। इसके बाद अनेक राज्यों ने यही रास्ता अपनाया। यह तथ्य राज्य की परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
इस व्यवस्था का व्यावहारिक महत्व शिक्षक के लिए भी है, क्योंकि विद्यालय शिक्षा समिति में पंचायत के प्रतिनिधि रहते हैं और विद्यालय के अनेक निर्णय स्थानीय निकाय से जुड़े होते हैं।
दोनों संशोधनों को उनकी संख्या से जोड़कर याद कीजिए — तिहत्तर गाँव के लिए और चौहत्तर शहर के लिए। संख्या का क्रम भी वही है, इसलिए एक बार जुड़ जाने पर ये कभी नहीं बदलतीं।
TRE संकेत: तिहत्तरवाँ संशोधन पंचायत और चौहत्तरवाँ नगरीय निकाय के लिए है — यह लगभग हर बार आता है। बिहार में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण राज्य से सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। ग्यारहवीं अनुसूची में उनतीस विषय भी सीधे आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- तिहत्तरवाँ संशोधन पंचायती राज और चौहत्तरवाँ नगरीय निकायों से जुड़ा है।
- दोनों 1992 में पारित और 1993 में लागू हुए।
- ग्यारहवीं अनुसूची में उनतीस और बारहवीं में अठारह विषय हैं।
- पंचायती राज के तीन स्तर ग्राम, प्रखंड और ज़िला हैं।
- ग्राम सभा में गाँव के सभी मतदाता सदस्य होते हैं।
- बिहार महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तिहत्तरवें संशोधन का सबसे बड़ा महत्व क्या है?
उसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दे दिया। इससे पहले पंचायतें राज्यों की इच्छा पर चलती थीं और वर्षों तक उनके चुनाव नहीं होते थे। अब हर पाँच वर्ष में चुनाव अनिवार्य है, आरक्षण की व्यवस्था है, और चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग बनाना पड़ता है।
ग्राम सभा और ग्राम पंचायत में क्या अंतर है?
ग्राम सभा गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सभा है, इसलिए उसमें कोई चुनाव नहीं होता और हर मतदाता स्वयं सदस्य होता है। ग्राम पंचायत निर्वाचित संस्था है, जिसके सदस्य ग्राम सभा के मतदाता चुनते हैं। ग्राम सभा पंचायत के कामकाज की समीक्षा करती है।
बिहार का पंचायती राज में क्या विशेष योगदान है?
बिहार 2006 में पंचायतों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत स्थान आरक्षित करने वाला पहला राज्य बना, जबकि संविधान में केवल एक तिहाई का प्रावधान था। इस पहल के बाद कई अन्य राज्यों ने भी यही व्यवस्था अपनाई, इसलिए यह राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
स्थानीय स्वशासन का शिक्षक से क्या संबंध है?
विद्यालय शिक्षा समिति में पंचायत के प्रतिनिधि और अभिभावक शामिल होते हैं, और विद्यालय भवन, मध्याह्न भोजन तथा उपस्थिति जैसे अनेक विषय स्थानीय निकाय से जुड़े रहते हैं। इसलिए शिक्षक को पंचायत की संरचना और उसके अधिकारों की व्यावहारिक जानकारी रोज़ काम आती है।
