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प्रतिशत एवं उसके अनुप्रयोग

Percentage and Its Applications

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प्रतिशत से 2 प्रश्न तक आते हैं और यह पूरे वाणिज्यिक गणित की रीढ़ है, क्योंकि लाभ-हानि, छूट और ब्याज — तीनों इसी पर चलते हैं। यहाँ सबसे बड़ी भूल गणना में नहीं, आधार चुनने में होती है, इसलिए हर सवाल में पहले आधार तय कीजिए।

रूपांतरण एवं भिन्न तालिका

भिन्नप्रतिशतभिन्नप्रतिशत
1/250%1/616⅔%
1/333⅓%1/714²/₇%
1/425%1/812½%
1/520%1/911⅑%
1/1010%1/128⅓%
1/166¼%1/205%

यह तालिका याद होने पर 16⅔ प्रतिशत जैसी संख्या देखते ही 1/6 लिख देना संभव हो जाता है, और लंबी गणना बच जाती है। परीक्षा में समय यहीं बचता है।

प्रतिशत परिवर्तन

प्रतिशत परिवर्तन = (परिवर्तन ÷ मूल मान) × 100

मूल नियम एक ही है — प्रतिशत सदा मूल मान पर लगता है, नए मान पर नहीं। इसी कारण बढ़ाकर उतना ही घटाने पर मूल मान वापस नहीं आता।

✗ किसी संख्या को 25% बढ़ाकर 25% घटाने पर वही संख्या मिलेगी  |  ✓ 6.25% की कमी होगी, क्योंकि दूसरी बार प्रतिशत बढ़े हुए मान पर लगता है

क्रमिक परिवर्तन

कुल परिवर्तन = a + b + (ab ÷ 100)

घटने पर चिह्न ऋणात्मक लीजिए। 25 और −25 रखने पर 25 − 25 − 625/100 = −6.25 प्रतिशत आता है, जो ऊपर वाले उदाहरण से मेल खाता है।

यही सूत्र दो क्रमिक छूट और मूल्य तथा खपत वाले सवालों में भी चलता है। एक सूत्र, तीन विषय — इसीलिए इसे अच्छी तरह याद कर लेना चाहिए।

जनसंख्या, मूल्यह्रास एवं त्रुटि प्रतिशत

n वर्ष बाद जनसंख्या = P × (1 + r/100)ⁿ

n वर्ष बाद मूल्यह्रास के बाद मूल्य = P × (1 − r/100)ⁿ

दोनों सूत्र वही हैं जो चक्रवृद्धि ब्याज के हैं — केवल बढ़ने पर जोड़ और घटने पर घटाव का चिह्न बदलता है। इसलिए तीनों को एक साथ याद कीजिए, अलग-अलग नहीं।

त्रुटि प्रतिशत में आधार सदा सही मान होता है, ग़लत मान नहीं। यदि किसी ने 20 के स्थान पर 25 लिख दिया, तो त्रुटि 5 है और प्रतिशत 5/20 × 100 = 25 प्रतिशत होगा, 20 प्रतिशत नहीं।

हर प्रतिशत वाले सवाल में पहले यह तय कीजिए कि आधार क्या है — मूल मान, सही मान, या अंकित मूल्य। आधार सही चुन लिया तो गणना अपने आप सही बैठ जाती है।

TRE संकेत: भिन्न-प्रतिशत तालिका पूरी याद कीजिए, यह तीन विषयों में लौटती है। क्रमिक परिवर्तन का सूत्र तयशुदा प्रश्न है — बढ़ाकर घटाने पर हमेशा कमी आती है। त्रुटि प्रतिशत में आधार सही मान होता है, ग़लत मान नहीं — यह जाल स्नातक स्तर पर रखा जाता है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • प्रतिशत का अर्थ प्रति सौ है; 25% यानी 1/4।
  • प्रतिशत सदा मूल मान पर लगता है, नए मान पर नहीं।
  • क्रमिक परिवर्तन = a + b + ab/100, घटने पर चिह्न ऋणात्मक।
  • 25% बढ़ाकर 25% घटाने पर 6.25% की कमी होती है।
  • जनसंख्या और मूल्यह्रास के सूत्र चक्रवृद्धि ब्याज जैसे ही हैं।
  • त्रुटि प्रतिशत में आधार सही मान होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बढ़ाकर उतना ही घटाने पर मूल मान क्यों नहीं मिलता?

क्योंकि पहली बार प्रतिशत मूल मान पर लगता है और दूसरी बार बढ़े हुए मान पर, जो बड़ा होता है। इसलिए घटने वाली मात्रा बढ़ने वाली मात्रा से अधिक हो जाती है और अंत में कमी रह जाती है। पच्चीस प्रतिशत के मामले में यह कमी सवा छह प्रतिशत होती है।

क्रमिक परिवर्तन का सूत्र कहाँ-कहाँ काम आता है?

तीन जगह — क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन, दो क्रमिक छूट, और मूल्य तथा खपत वाले सवाल। तीनों में एक ही सूत्र चलता है, बस घटने वाली मात्रा का चिह्न ऋणात्मक लेना पड़ता है। इसीलिए इसे एक बार अच्छी तरह याद कर लेना कई विषयों में काम आता है।

त्रुटि प्रतिशत में आधार क्या होता है?

सही मान, ग़लत मान नहीं। यदि किसी ने बीस के स्थान पर पच्चीस लिख दिया तो त्रुटि पाँच है, और प्रतिशत पाँच बटा बीस गुणा सौ यानी पच्चीस प्रतिशत होगा। ग़लत मान को आधार बनाने पर बीस प्रतिशत आता है, जो उत्तर विकल्पों में जाल की तरह रखा जाता है।

मूल्यह्रास का सूत्र चक्रवृद्धि ब्याज जैसा क्यों है?

क्योंकि दोनों में परिवर्तन हर वर्ष पिछले वर्ष के मान पर लगता है, न कि मूल मान पर। अंतर केवल दिशा का है — ब्याज में मान बढ़ता है इसलिए कोष्ठक में जोड़ आता है, और मूल्यह्रास में घटता है इसलिए घटाव आता है।

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