राजनीतिक दल, दबाव समूह एवं जन आंदोलन
राजनीतिक दल, दबाव समूह एवं जन आंदोलन
इस अध्याय से प्रश्न प्रायः दो बिंदुओं पर आते हैं — राजनीतिक दल और दबाव समूह में क्या अंतर है, और दलों को मान्यता किस आधार पर मिलती है। पहला समझने का प्रश्न है और दूसरा तथ्य का, इसलिए दोनों को अलग-अलग तैयार कीजिए।
राजनीतिक दल क्या करता है
- चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करता है।
- अपनी नीतियाँ और कार्यक्रम जनता के सामने रखता है।
- कानून बनाने में भूमिका निभाता है।
- हारने पर विपक्ष की भूमिका निभाता है।
- जनता और सरकार के बीच कड़ी का काम करता है।
दल का सबसे बुनियादी काम यह है कि वह बिखरी हुई राय को संगठित विकल्प में बदल देता है। बिना दलों के हर उम्मीदवार अपनी अलग बात कहता और मतदाता के सामने कोई स्पष्ट विकल्प नहीं होता।
दलों की मान्यता
| वर्ग | आधार |
|---|---|
| राष्ट्रीय दल | कई राज्यों में निर्धारित मत या सीट प्राप्त करना |
| राज्यीय दल | किसी एक राज्य में निर्धारित प्रदर्शन |
| पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त | पंजीकृत तो हैं पर मानक पूरे नहीं करते |
मान्यता भारत निर्वाचन आयोग देता है और उसी के साथ दल को स्थायी चुनाव चिह्न मिलता है। मान्यता के मानक समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए यहाँ प्रक्रिया समझना अधिक उपयोगी है और सटीक प्रतिशत रटना कम।
भारत में बहुदलीय व्यवस्था है और इसका कारण देश की सामाजिक तथा क्षेत्रीय विविधता है। इसी से गठबंधन सरकारें बनती हैं, जिनके अपने लाभ और सीमाएँ दोनों हैं।
✗ भारत में दो दलीय व्यवस्था है | ✓ भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, जो देश की सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता का परिणाम है
दबाव समूह और जन आंदोलन
| बिंदु | राजनीतिक दल | दबाव समूह |
|---|---|---|
| उद्देश्य | सत्ता प्राप्त करना | नीति को प्रभावित करना |
| चुनाव | सीधे लड़ता है | सामान्यतः नहीं लड़ता |
| दायरा | सभी विषय | प्रायः एक या कुछ विषय |
| उदाहरण | विभिन्न राजनीतिक दल | व्यापार संघ, किसान संगठन, शिक्षक संघ |
सबसे बड़ा अंतर सत्ता के लक्ष्य का है — दल सत्ता चाहता है, दबाव समूह केवल नीति को अपने पक्ष में मोड़ना चाहता है। यही अंतर परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
जन आंदोलन किसी विशिष्ट मुद्दे पर उठते हैं और लक्ष्य पूरा होने पर प्रायः समाप्त हो जाते हैं। भारत में चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन और सूचना का अधिकार आंदोलन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
बिहार के संदर्भ में किसान सभा एक ऐतिहासिक उदाहरण है, जो पहले दबाव समूह की तरह उठा और आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने लगा।
दल और दबाव समूह का अंतर एक ही प्रश्न से तय कीजिए — क्या यह संगठन स्वयं सरकार बनाना चाहता है। यदि हाँ तो दल, और यदि वह केवल किसी नीति पर असर डालना चाहता है तो दबाव समूह।
TRE संकेत: दल और दबाव समूह का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था भी तयशुदा है। दलों को मान्यता निर्वाचन आयोग देता है और चिपको तथा नर्मदा बचाओ जन आंदोलन भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- राजनीतिक दल चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना चाहता है।
- दल बिखरी हुई राय को संगठित विकल्प में बदल देता है।
- दलों को मान्यता भारत निर्वाचन आयोग देता है।
- भारत में बहुदलीय व्यवस्था है।
- दबाव समूह सत्ता नहीं, नीति को प्रभावित करना चाहता है।
- जन आंदोलन किसी विशिष्ट मुद्दे पर उठते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजनीतिक दल और दबाव समूह में मूल अंतर क्या है?
राजनीतिक दल स्वयं सत्ता प्राप्त करना चाहता है, इसलिए वह चुनाव लड़ता है और सभी विषयों पर अपनी नीति रखता है। दबाव समूह सत्ता नहीं चाहता, वह केवल किसी नीति को अपने सदस्यों के हित में प्रभावित करना चाहता है और प्रायः एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है।
भारत में बहुदलीय व्यवस्था क्यों है?
क्योंकि देश की सामाजिक, भाषाई और क्षेत्रीय विविधता बहुत अधिक है और अलग-अलग समूहों की चिंताएँ अलग हैं। इतनी विविधता को दो दल नहीं समेट सकते, इसलिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों तरह के दल बने। इसका एक परिणाम गठबंधन सरकारें हैं।
दबाव समूह लोकतंत्र के लिए उपयोगी हैं या हानिकारक?
दोनों पक्ष हैं। वे नागरिकों को दो चुनावों के बीच भी अपनी बात कहने का रास्ता देते हैं और सरकार तक विशेषज्ञ जानकारी पहुँचाते हैं, जो लोकतंत्र को मज़बूत करता है। दूसरी ओर यदि कोई समूह बहुत साधन संपन्न हो तो वह अपने संकीर्ण हित के लिए नीति मोड़ भी सकता है।
जन आंदोलन का कोई भारतीय उदाहरण दीजिए।
चिपको आंदोलन, जिसमें लोगों ने पेड़ों से लिपटकर उनकी कटाई रोकी और वन संरक्षण को राष्ट्रीय विषय बनाया। इसी तरह नर्मदा बचाओ आंदोलन ने बड़े बाँधों से विस्थापन का प्रश्न उठाया और सूचना का अधिकार आंदोलन के दबाव से 2005 में कानून बना।
