संक्षेपण
संक्षेपण
संक्षेपण लेखन कौशल का सबसे तकनीकी भाग है, क्योंकि यहाँ नियम बहुत निश्चित हैं और उन्हीं पर प्रश्न बनते हैं। यही कारण है कि इससे प्रश्न बनाना परीक्षकों के लिए आसान होता है और परीक्षार्थी केवल नियम न जानने के कारण ऐसे अंक खो बैठते हैं जो वास्तव में बहुत सरल थे।
संक्षेपण क्या है
संक्षेपण किसी अंश का वह संक्षिप्त रूप है जिसमें उसके सारे मुख्य विचार आ जाएँ पर विस्तार हट जाए। उसकी लंबाई मूल की लगभग एक तिहाई होती है।
- वह अपने शब्दों में लिखा जाता है।
- उसमें अन्य पुरुष और प्रायः भूतकाल का प्रयोग होता है।
- वह एक ही अनुच्छेद में लिखा जाता है।
- उसे एक उपयुक्त शीर्षक दिया जाता है।
विधि
- पूरा अंश एक बार पढ़कर मुख्य विचार समझिए।
- दूसरी बार पढ़ते हुए मुख्य बिंदु रेखांकित कीजिए।
- मूल बंद करके बिंदुओं को अपने शब्दों में लिखिए।
- उन्हें जोड़कर एक प्रवाहमय अनुच्छेद बनाइए।
- शब्द गिनकर शीर्षक दीजिए।
तीसरा कदम सबसे महत्वपूर्ण है। मूल सामने रखकर लिखने पर भाषा अपने आप उसी की हो जाती है और संक्षेपण केवल कटा हुआ अंश बनकर रह जाता है, जिसके अंक कट जाते हैं।
क्या हटाया जाता है
| हटाइए | क्यों |
|---|---|
| उदाहरण और दृष्टांत | वे विचार समझाने के लिए थे, विचार स्वयं नहीं |
| दोहराव | एक ही बात दो बार कहने की ज़रूरत नहीं |
| अलंकार और उपमा | सजावट है, सामग्री नहीं |
| उद्धरण | मूल लेखक के शब्द नहीं रखे जाते |
| संवाद | उसे कथन में बदल दिया जाता है |
| आँकड़ों का विस्तार | केवल आवश्यक आँकड़ा रहेगा |
जो कभी नहीं हटता वह है मूल का केंद्रीय विचार और उसे सिद्ध करने वाले मुख्य तर्क। यदि संक्षेपण पढ़ने वाला मूल की बात समझ न पाए तो वह असफल है, चाहे शब्द सीमा कितनी ही ठीक क्यों न हो।
✗ संक्षेपण में मूल लेखक का कोई सुंदर वाक्य ज्यों का त्यों रख लेना | ✓ संक्षेपण पूरी तरह अपने शब्दों में होना चाहिए; उद्धरण वहाँ नहीं रखे जाते
संक्षेपण और सारांश
दोनों बहुत मिलते-जुलते हैं और व्यवहार में एक ही तरह लिखे जाते हैं। अंतर केवल इतना है कि संक्षेपण शब्द सीमा और नियमों के प्रति अधिक कड़ा होता है, जबकि सारांश कुछ अधिक स्वतंत्र रहता है।
परीक्षा में जो शब्द दिया गया हो उसी के अनुसार लिखिए, पर दोनों में तीन शर्तें समान रहती हैं — अपने शब्द, कोई नई बात नहीं, और कोई व्यक्तिगत राय नहीं।
संक्षेपण लिखते समय सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि क्या हटाया जाए। नियम सरल है — जो बात हटा देने पर भी मूल का तर्क पूरा रहे, वह हट सकती है; और जिसे हटाने पर तर्क टूट जाए, वह रहेगी।
TRE संकेत: संक्षेपण मूल का एक तिहाई होना चाहिए — यह सीधे पूछा जाता है। अन्य पुरुष में लिखा जाता है यह भी तयशुदा है। उदाहरण और उद्धरण हटा दिए जाते हैं तथा शीर्षक अनिवार्य है भी बार-बार आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- संक्षेपण मूल के सारे मुख्य विचार संक्षेप में रखता है।
- उसकी लंबाई मूल की लगभग एक तिहाई होती है।
- वह अपने शब्दों में और अन्य पुरुष में लिखा जाता है।
- उदाहरण, दोहराव, अलंकार और उद्धरण हटा दिए जाते हैं।
- केंद्रीय विचार और मुख्य तर्क कभी नहीं हटते।
- संक्षेपण को एक उपयुक्त शीर्षक देना अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संक्षेपण की लंबाई कितनी होनी चाहिए?
मूल अंश की लगभग एक तिहाई। यदि प्रश्न में शब्द सीमा दी गई हो तो वही मानिए। सीमा से बहुत अधिक लिखने पर संक्षेपण का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है और बहुत कम लिखने पर मुख्य विचार छूट जाते हैं। दोनों स्थितियों में अंक कटते हैं।
संक्षेपण में क्या हटाया जा सकता है?
उदाहरण, दृष्टांत, दोहराव, अलंकार, उद्धरण और संवाद। ये सब विचार को समझाने या सजाने के लिए होते हैं, विचार स्वयं नहीं। कसौटी यह है कि हटा देने के बाद भी मूल का तर्क पूरा रहना चाहिए। यदि तर्क टूट जाए तो वह बात हटाई नहीं जा सकती।
संक्षेपण अन्य पुरुष में क्यों लिखा जाता है?
क्योंकि वह मूल लेखक की बात है, संक्षेपण करने वाले की नहीं। मैं या हम लिखने पर ऐसा लगेगा कि विचार लिखने वाले के अपने हैं। अन्य पुरुष का प्रयोग यह स्पष्ट रखता है कि यह किसी और की बात का संक्षिप्त रूप है, और यही परीक्षा में अपेक्षित है।
संक्षेपण और सारांश में क्या अंतर है?
व्यवहार में दोनों लगभग एक ही तरह लिखे जाते हैं। संक्षेपण शब्द सीमा और नियमों के प्रति अधिक कड़ा होता है और उसमें शीर्षक देना अनिवार्य माना जाता है, जबकि सारांश थोड़ा अधिक स्वतंत्र रहता है। दोनों में अपने शब्द, कोई नई बात नहीं और कोई राय नहीं — ये तीन शर्तें समान हैं।
