दाब: ठोस, द्रव एवं वायुदाब
दाब: ठोस, द्रव एवं वायुदाब
दाब से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और उनमें आर्किमिडीज़ का सिद्धांत तथा वायुदाब सबसे अधिक पूछे जाते हैं। सूत्र एक ही है, पर उसका प्रयोग ठोस, द्रव और गैस तीनों में अलग-अलग तरह से होता है।
मूल संबंध
दाब = बल ÷ क्षेत्रफल
SI मात्रक पास्कल है, जो एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर के बराबर होता है। इस सूत्र से एक बात सीधे निकलती है — क्षेत्रफल घटाने पर दाब बढ़ता है, बल वही रहते हुए भी।
- चाकू की धार पतली होती है ताकि कम बल से अधिक दाब बने।
- ऊँट के पैर चौड़े होते हैं ताकि रेत पर दाब कम पड़े और वह धँसे नहीं।
- स्कूल बैग की पट्टियाँ चौड़ी होती हैं ताकि कंधे पर दाब कम पड़े।
- नींव चौड़ी बनाई जाती है ताकि भवन का भार अधिक क्षेत्रफल पर बँट जाए।
द्रव में दाब
द्रव दाब = h × d × g (गहराई × घनत्व × गुरुत्वीय त्वरण)
इससे तीन बातें निकलती हैं — दाब गहराई के साथ बढ़ता है, द्रव के घनत्व पर निर्भर करता है, और बर्तन के आकार पर निर्भर नहीं करता। तीसरी बात सबसे अधिक चौंकाती है और इसीलिए प्रश्न बनती है।
द्रव दाब सभी दिशाओं में बराबर लगता है, केवल नीचे की ओर नहीं। यही कारण है कि बाँध की दीवार नीचे से मोटी बनाई जाती है — वहाँ गहराई अधिक होने से दाब अधिक होता है।
✗ चौड़े बर्तन में पानी का दाब संकरे बर्तन से अधिक होगा | ✓ दाब केवल गहराई पर निर्भर करता है, बर्तन के आकार पर नहीं
उत्प्लावन एवं आर्किमिडीज़ का सिद्धांत
किसी द्रव में डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला बल उत्प्लावन बल कहलाता है। आर्किमिडीज़ का सिद्धांत कहता है कि यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।
| स्थिति | परिणाम |
|---|---|
| वस्तु का घनत्व < द्रव का घनत्व | वस्तु तैरेगी |
| वस्तु का घनत्व > द्रव का घनत्व | वस्तु डूबेगी |
| वस्तु का घनत्व = द्रव का घनत्व | वस्तु द्रव में लटकी रहेगी |
इसी से समझ आता है कि लोहे की कील डूबती है पर लोहे का जहाज़ तैरता है — जहाज़ खोखला होता है, इसलिए उसका औसत घनत्व पानी से कम हो जाता है। यह प्रश्न बार-बार आता है।
पानी में वस्तु हल्की लगती है, क्योंकि उत्प्लावन बल उसके भार का कुछ हिस्सा संतुलित कर देता है। घटा हुआ भार आभासी भार कहलाता है।
वायुदाब
वायुमंडल का भार पृथ्वी की सतह पर दाब डालता है, जिसे वायुदाब कहते हैं और उसे बैरोमीटर से मापा जाता है। समुद्र तल पर यह लगभग 76 सेंटीमीटर पारे के स्तंभ के बराबर होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब घटता है, इसीलिए पहाड़ों पर साँस लेने में कठिनाई होती है।
- उसी कारण ऊँचाई पर खाना देर से पकता है, क्योंकि दाब कम होने से पानी कम तापमान पर उबल जाता है।
- प्रेशर कुकर इसका उल्टा करता है — दाब बढ़ाकर क्वथनांक बढ़ाता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
- बैरोमीटर में पारा अचानक गिरे तो तूफ़ान की संभावना मानी जाती है।
दाब के हर सवाल में पहले यह देखिए कि किस माध्यम की बात है। ठोस में बल और क्षेत्रफल, द्रव में गहराई और घनत्व, और गैस में ऊँचाई — तीनों में निर्भरता अलग है।
TRE संकेत: द्रव दाब बर्तन के आकार पर निर्भर नहीं करता — यह तयशुदा जाल है। लोहे का जहाज़ क्यों तैरता है वाला प्रश्न आर्किमिडीज़ से जुड़ा हुआ लगभग हर वर्ष आता है। और ऊँचाई पर खाना देर से पकता है वाला कारण भी सीधे पूछा जाता है — दाब कम, क्वथनांक कम।
60 सेकंड का रिवीजन
- दाब बल बटा क्षेत्रफल होता है; मात्रक पास्कल।
- क्षेत्रफल घटाने पर दाब बढ़ता है — चाकू की धार इसी सिद्धांत पर है।
- द्रव दाब गहराई और घनत्व पर निर्भर करता है, बर्तन के आकार पर नहीं।
- द्रव दाब सभी दिशाओं में बराबर लगता है।
- आर्किमिडीज़ के अनुसार उत्प्लावन बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब घटता है और क्वथनांक भी घट जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लोहे की कील डूबती है पर लोहे का जहाज़ क्यों तैरता है?
क्योंकि जहाज़ खोखला बनाया जाता है, जिससे उसका औसत घनत्व पानी के घनत्व से कम हो जाता है। तैरने या डूबने का निर्णय पदार्थ के घनत्व से नहीं, बल्कि पूरी वस्तु के औसत घनत्व से होता है। ठोस कील का औसत घनत्व पानी से अधिक रहता है, इसलिए वह डूब जाती है।
क्या द्रव का दाब बर्तन के आकार पर निर्भर करता है?
नहीं। वह केवल द्रव की गहराई, उसके घनत्व और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है। चौड़े और संकरे दोनों बर्तनों में एक ही गहराई पर दाब समान रहेगा, चाहे पानी की मात्रा कितनी भी अलग हो। यह बात अटपटी लगती है, इसीलिए प्रश्न बनती है।
पहाड़ों पर खाना देर से क्यों पकता है?
क्योंकि ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब घट जाता है, और कम दाब पर पानी सौ डिग्री से कम तापमान पर ही उबलने लगता है। कम तापमान पर पकने के कारण भोजन को अधिक समय लगता है। प्रेशर कुकर इसका उल्टा करता है, वह दाब बढ़ाकर क्वथनांक बढ़ा देता है।
आर्किमिडीज़ का सिद्धांत क्या कहता है?
किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है। इसी कारण पानी में वस्तु हल्की लगती है और उसका घटा हुआ भार आभासी भार कहलाता है।
