लाभ, हानि एवं छूट
लाभ, हानि एवं छूट
इस विषय से 2 प्रश्न तक आते हैं और यहाँ पूरी गणना एक ही बात पर टिकी है — कौन-सा प्रतिशत किस राशि पर लग रहा है। तीन आधार हैं और तीनों अलग-अलग हैं, इसलिए सवाल पढ़ते ही आधार तय कर लेना चाहिए।
तीन आधार
| राशि | किस पर प्रतिशत लगता है |
|---|---|
| लाभ या हानि | क्रय मूल्य पर |
| छूट | अंकित मूल्य पर |
| कमीशन | बिक्री मूल्य पर |
लाभ% = (लाभ ÷ क्रय मूल्य) × 100 | छूट% = (छूट ÷ अंकित मूल्य) × 100
यह तालिका ही पूरे विषय की जान है। लाभ क्रय मूल्य पर और छूट अंकित मूल्य पर — यह एक पंक्ति आधे सवाल हल कर देती है और विकल्पों में दूसरे आधार वाला उत्तर ज़रूर रखा जाता है।
✗ लाभ प्रतिशत विक्रय मूल्य पर निकाला जाता है | ✓ वह क्रय मूल्य पर निकाला जाता है
वि.मू. = क्र.मू. × (100 + लाभ%) ÷ 100 | वि.मू. = अं.मू. × (100 − छूट%) ÷ 100
क्रमिक छूट
दो क्रमिक छूट a% और b% = a + b − (ab ÷ 100)
दो छूटों को सीधे जोड़ देना सबसे आम गलती है। 20 और 10 प्रतिशत की क्रमिक छूट 30 प्रतिशत नहीं, बल्कि 28 प्रतिशत होती है, क्योंकि दूसरी छूट घटे हुए मूल्य पर लगती है।
तयशुदा जाल
- बराबर मूल्य पर x% लाभ और x% हानि — कुल मिलाकर हमेशा हानि, और वह x²/100 प्रतिशत होती है।
- बेईमान दुकानदार — जो क्रय मूल्य पर बेचकर भी कम तौलता है, उसका लाभ प्रतिशत होता है (त्रुटि ÷ असली भार) × 100।
- लागत मूल्य = विक्रय मूल्य वाली स्थिति — जैसे 20 वस्तुओं का क्रय मूल्य 25 का विक्रय मूल्य के बराबर हो; ऐसे में लाभ प्रतिशत निकालने के लिए दोनों संख्याओं का अंतर छोटी संख्या से भाग दीजिए।
पहला जाल सबसे अधिक आता है — 10 प्रतिशत पर 1 प्रतिशत की हानि होती है, और उत्तर विकल्पों में शून्य ज़रूर रखा जाता है।
अंकित मूल्य वाले सवाल
ऐसे सवालों में क्रम यह रखिए — पहले अंकित मूल्य, फिर छूट लगाकर विक्रय मूल्य, फिर क्रय मूल्य से तुलना करके लाभ। बीच का कोई चरण छोड़ने पर आधार गड़बड़ा जाता है।
एक सामान्य प्रकार यह है कि दुकानदार क्रय मूल्य से x प्रतिशत ऊपर अंकित करता है और फिर y प्रतिशत छूट देता है। ऐसे में शुद्ध लाभ क्रमिक परिवर्तन के सूत्र से निकलता है — x, −y और उनका गुणनफल बटा 100।
हर सवाल में पहले तीन राशियाँ अलग-अलग लिख लीजिए — क्रय मूल्य, अंकित मूल्य और विक्रय मूल्य। तीनों सामने हों तो कौन-सा प्रतिशत किस पर लगेगा, यह अपने आप स्पष्ट हो जाता है।
TRE संकेत: लाभ क्रय मूल्य पर, छूट अंकित मूल्य पर — यह एक पंक्ति सबसे अधिक अंक दिलाती है। बराबर प्रतिशत पर लाभ और हानि में सदा हानि तयशुदा प्रश्न है, उत्तर x²/100। और दो छूटें जोड़ी नहीं जातीं, उनके लिए क्रमिक परिवर्तन का सूत्र लगता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- लाभ और हानि का प्रतिशत क्रय मूल्य पर निकलता है।
- छूट अंकित मूल्य पर और कमीशन बिक्री मूल्य पर लगता है।
- दो क्रमिक छूट a और b के लिए a + b − ab/100।
- 20% और 10% की क्रमिक छूट 28% होती है, 30% नहीं।
- बराबर प्रतिशत पर लाभ और हानि में x²/100 की हानि होती है।
- अंकित मूल्य वाले सवाल में क्रम से चलिए, कोई चरण मत छोड़िए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीस और दस प्रतिशत की क्रमिक छूट कुल कितनी होती है?
अट्ठाईस प्रतिशत, तीस नहीं। दूसरी छूट पहली छूट के बाद बचे हुए मूल्य पर लगती है, इसलिए दोनों को सीधे जोड़ा नहीं जा सकता। क्रमिक परिवर्तन के सूत्र से बीस जोड़ दस घटा दो सौ बटा सौ यानी अट्ठाईस प्रतिशत आता है।
बराबर प्रतिशत पर लाभ और हानि में क्या होता है?
हमेशा हानि होती है, चाहे प्रतिशत बराबर हो। यह हानि उस प्रतिशत के वर्ग को सौ से भाग देने पर मिलती है। दस प्रतिशत के मामले में यह एक प्रतिशत की हानि बनती है। विकल्पों में शून्य ज़रूर रखा जाता है, इसलिए सावधानी चाहिए।
छूट और लाभ का आधार अलग क्यों होता है?
क्योंकि दोनों अलग-अलग लेन-देन दर्शाते हैं। छूट दुकानदार अंकित मूल्य पर देता है, इसलिए उसका आधार अंकित मूल्य है। लाभ दुकानदार ने अपनी लागत पर कमाया है, इसलिए उसका आधार क्रय मूल्य है। आधार बदलते ही उत्तर बदल जाता है।
कम तौलने वाले दुकानदार का लाभ प्रतिशत कैसे निकलता है?
त्रुटि को असली भार से भाग देकर सौ से गुणा किया जाता है। यदि वह एक किलो के स्थान पर नौ सौ ग्राम देता है तो त्रुटि सौ ग्राम है और असली भार नौ सौ ग्राम, इसलिए लाभ सौ बटा नौ सौ गुणा सौ यानी लगभग ग्यारह दशमलव एक प्रतिशत होगा।
