लाभ-हानि, छूट एवं ब्याज
Profit, Loss, Discount and Interest
वाणिज्यिक गणित से 2 प्रश्न आते हैं और ये पूरे पत्र के सबसे सूत्र-आधारित सवाल हैं। यहाँ केवल एक बात पकड़नी है — कौन-सा प्रतिशत किस राशि पर लग रहा है। यही एक बात सही हो जाए तो बाकी गणना सीधी है।
लाभ एवं हानि
लाभ% = (लाभ ÷ क्रय मूल्य) × 100 | हानि% = (हानि ÷ क्रय मूल्य) × 100
सबसे ज़रूरी बात — लाभ और हानि दोनों का प्रतिशत क्रय मूल्य पर निकलता है, विक्रय मूल्य पर नहीं। यही सबसे आम गलती है और विकल्पों में उसका उत्तर भी रखा जाता है।
✗ लाभ प्रतिशत विक्रय मूल्य पर निकाला जाता है | ✓ यह क्रय मूल्य पर निकाला जाता है
वि.मू. = क्र.मू. × (100 + लाभ%) ÷ 100
एक तयशुदा प्रश्न यह भी है — यदि कोई वस्तु बराबर मूल्य पर दो बार बेची जाए, एक बार x% लाभ पर और एक बार x% हानि पर, तो कुल मिलाकर हमेशा हानि होती है, जो x²/100 प्रतिशत के बराबर होती है। 10 प्रतिशत पर यह 1 प्रतिशत की हानि बनती है।
छूट
छूट = अंकित मूल्य − विक्रय मूल्य | छूट% = (छूट ÷ अंकित मूल्य) × 100
ध्यान दीजिए कि छूट अंकित मूल्य पर लगती है, जबकि लाभ क्रय मूल्य पर। यही भेद अधिकांश सवालों की जान है। दो क्रमिक छूटों के लिए वही सूत्र चलता है जो क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन का है।
दो क्रमिक छूट a% और b% = a + b − (ab ÷ 100)
साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज
साधारण ब्याज = (मूलधन × दर × समय) ÷ 100
चक्रवृद्धि मिश्रधन = मूलधन × (1 + दर/100)^समय
| तुलना | साधारण ब्याज | चक्रवृद्धि ब्याज |
|---|---|---|
| ब्याज किस पर | केवल मूलधन पर | मूलधन + पिछला ब्याज |
| हर वर्ष | बराबर | बढ़ता हुआ |
| पहला वर्ष | दोनों बराबर | दोनों बराबर |
पहली पंक्ति के बाद जो बात सबसे अधिक पूछी जाती है वह यह है कि पहले वर्ष दोनों ब्याज बराबर होते हैं, अंतर दूसरे वर्ष से शुरू होता है। दो वर्षों का अंतर निकालने का छोटा सूत्र भी याद रखिए।
2 वर्ष का अंतर = मूलधन × (दर ÷ 100)²
पहचान का सूत्र: प्रश्न में जो राशि आधार बन रही है उसे पहले घेर लीजिए — लाभ में क्रय मूल्य, छूट में अंकित मूल्य, ब्याज में मूलधन। आधार सही तो उत्तर सही।
TRE संकेत: लाभ क्रय मूल्य पर, छूट अंकित मूल्य पर — यह एक पंक्ति आधे सवाल हल कर देती है। बराबर मूल्य पर x% लाभ और x% हानि में हमेशा हानि तयशुदा प्रश्न है, उत्तर x²/100 प्रतिशत। ब्याज में पहले वर्ष दोनों बराबर और दो वर्ष का अंतर = मूलधन × (दर/100)² दोनों याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- लाभ और हानि का प्रतिशत क्रय मूल्य पर निकलता है।
- छूट अंकित मूल्य पर लगती है, विक्रय मूल्य पर नहीं।
- दो क्रमिक छूट a और b के लिए a + b − ab/100।
- बराबर मूल्य पर x% लाभ और x% हानि में हमेशा x²/100 की हानि होती है।
- साधारण ब्याज केवल मूलधन पर, चक्रवृद्धि पिछले ब्याज पर भी लगता है।
- पहले वर्ष दोनों ब्याज बराबर; दो वर्ष का अंतर मूलधन × (दर/100)²।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लाभ प्रतिशत किस मूल्य पर निकाला जाता है?
क्रय मूल्य पर, विक्रय मूल्य पर नहीं। लाभ को क्रय मूल्य से भाग देकर सौ से गुणा किया जाता है। हानि प्रतिशत भी इसी तरह क्रय मूल्य पर ही निकलता है। विकल्पों में विक्रय मूल्य वाला उत्तर जान-बूझकर रखा जाता है।
एक ही मूल्य पर बराबर लाभ और हानि में क्या होता है?
हमेशा हानि होती है, चाहे प्रतिशत बराबर ही क्यों न हो। यह हानि x का वर्ग बटा सौ प्रतिशत के बराबर होती है, जहाँ x वही प्रतिशत है। दस प्रतिशत पर यह एक प्रतिशत की हानि बनती है और यह प्रश्न लगभग हर वर्ष आता है।
साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज में पहला अंतर कब दिखता है?
दूसरे वर्ष से। पहले वर्ष दोनों ब्याज बराबर होते हैं, क्योंकि तब तक ब्याज पर ब्याज लगा ही नहीं होता। दूसरे वर्ष से चक्रवृद्धि में पिछला ब्याज भी मूलधन में जुड़ जाता है, इसलिए वहीं से अंतर बनना शुरू होता है।
दो क्रमिक छूट का सूत्र क्या है?
पहली छूट जोड़ दूसरी छूट घटा दोनों का गुणनफल बटा सौ। यह वही सूत्र है जो क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन का है, बस दोनों चिह्न ऋणात्मक होने के कारण रूप बदल जाता है। दो छूटों को सीधे जोड़ देना सबसे आम गलती है।
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