चतुर्भुज, बहुभुज एवं सममिति
चतुर्भुज, बहुभुज एवं सममिति
इस विषय से 1 प्रश्न लगभग तय है और वह प्रायः किसी चतुर्भुज के विकर्ण-गुण पर होता है। सभी चतुर्भुजों के गुण अलग-अलग रटने के बजाय यह देखिए कि वे आपस में किस तरह जुड़े हैं — तब पूरा परिवार एक साथ याद रहता है।
चतुर्भुज परिवार
| चतुर्भुज | विशेष गुण |
|---|---|
| समांतर चतुर्भुज | सम्मुख भुजाएँ समांतर एवं बराबर |
| आयत | समांतर चतुर्भुज + चारों कोण समकोण |
| समचतुर्भुज | समांतर चतुर्भुज + चारों भुजाएँ बराबर |
| वर्ग | आयत + समचतुर्भुज दोनों |
| समलंब | केवल एक जोड़ी भुजाएँ समांतर |
| पतंग | आसन्न भुजाओं के दो जोड़े बराबर |
परिवार का क्रम यही है — वर्ग सबसे विशेष है, क्योंकि वह आयत भी है और समचतुर्भुज भी। इसलिए हर वर्ग आयत है, पर हर आयत वर्ग नहीं। यह दिशा वाला प्रश्न सीधे पूछा जाता है।
✗ हर समचतुर्भुज एक वर्ग होता है | ✓ उलटा सही है — हर वर्ग समचतुर्भुज है, पर हर समचतुर्भुज वर्ग नहीं
विकर्णों के गुण
| चतुर्भुज | विकर्ण बराबर | समकोण पर काटते हैं | परस्पर समद्विभाजित |
|---|---|---|---|
| समांतर चतुर्भुज | नहीं | नहीं | हाँ |
| आयत | हाँ | नहीं | हाँ |
| समचतुर्भुज | नहीं | हाँ | हाँ |
| वर्ग | हाँ | हाँ | हाँ |
| पतंग | नहीं | हाँ | एक करता है |
यह तालिका इस विषय का पूरा उत्तर है। ध्यान दीजिए कि वर्ग अकेला है जिसमें तीनों गुण हैं, और आयत में विकर्ण बराबर पर समकोण पर नहीं, जबकि समचतुर्भुज में उल्टा। यही अदला-बदली प्रश्न बनती है।
बहुभुज
अंतःकोणों का योग = (n − 2) × 180° | बाह्य कोणों का योग = 360°
विकर्णों की संख्या = n(n − 3) ÷ 2
समबहुभुज में हर अंतःकोण = (n − 2) × 180° ÷ n और हर बाह्य कोण = 360° ÷ n होता है। बाह्य कोण वाला सूत्र अधिक तेज़ है, इसलिए पहले वही निकालिए और फिर 180 में से घटाकर अंतःकोण पा लीजिए।
विकर्ण वाला सूत्र भी सीधे पूछा जाता है — षट्भुज में 6 × 3 ÷ 2 = 9 विकर्ण होते हैं।
सममिति
- रेखा सममिति — आकृति को मोड़ने पर दोनों भाग पूरी तरह मिल जाएँ।
- घूर्णन सममिति — आकृति को 360° से कम घुमाने पर वह पहले जैसी दिख जाए।
- घूर्णन की कोटि — एक पूरे चक्कर में आकृति कितनी बार पहले जैसी दिखती है।
| आकृति | सममिति रेखाएँ | घूर्णन कोटि |
|---|---|---|
| वर्ग | 4 | 4 |
| आयत | 2 | 2 |
| समबाहु त्रिभुज | 3 | 3 |
| वृत्त | अनंत | अनंत |
| समांतर चतुर्भुज | 0 | 2 |
अंतिम पंक्ति जाल है — समांतर चतुर्भुज में कोई सममिति रेखा नहीं होती, पर घूर्णन कोटि 2 होती है। दोनों बातें अलग हैं और यही अंतर परखा जाता है।
विकर्ण-गुण वाली तालिका को चित्र के साथ याद कीजिए। आयत को खींचकर उसके विकर्ण बनाइए और देखिए कि वे बराबर तो हैं पर समकोण नहीं बना रहे — एक बार देख लेने पर यह कभी नहीं भूलता।
TRE संकेत: विकर्णों की तालिका इस विषय का सबसे तय प्रश्न है, ख़ासकर आयत और समचतुर्भुज की अदला-बदली। हर वर्ग आयत है पर हर आयत वर्ग नहीं वाली दिशा याद रखिए। और समांतर चतुर्भुज में सममिति रेखा शून्य पर घूर्णन कोटि दो होती है — यह जाल स्नातक स्तर पर रखा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- हर वर्ग आयत और समचतुर्भुज दोनों है, पर उलटा सही नहीं।
- आयत के विकर्ण बराबर होते हैं पर समकोण पर नहीं काटते।
- समचतुर्भुज के विकर्ण समकोण पर काटते हैं पर बराबर नहीं होते।
- वर्ग अकेला है जिसमें विकर्णों के तीनों गुण हैं।
- n भुजा वाले बहुभुज में विकर्ण n(n − 3) ÷ 2 होते हैं।
- समांतर चतुर्भुज में सममिति रेखा नहीं, पर घूर्णन कोटि 2 है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आयत और समचतुर्भुज के विकर्णों में क्या अंतर है?
आयत के विकर्ण बराबर होते हैं पर एक-दूसरे को समकोण पर नहीं काटते। समचतुर्भुज में इसका उल्टा है — विकर्ण समकोण पर काटते हैं पर बराबर नहीं होते। दोनों में विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित ज़रूर करते हैं, और वर्ग में तीनों गुण एक साथ मिलते हैं।
बहुभुज में विकर्णों की संख्या कैसे निकालें?
n गुणा n घटा तीन बटा दो के सूत्र से, जहाँ n भुजाओं की संख्या है। षट्भुज में यह छह गुणा तीन बटा दो यानी नौ विकर्ण देता है। यह सूत्र सीधे पूछा जाता है, इसलिए इसे अलग से याद रखना चाहिए।
समबहुभुज का एक अंतःकोण कैसे निकालें?
पहले बाह्य कोण निकालिए, जो तीन सौ साठ बटा n होता है, फिर उसे एक सौ अस्सी में से घटा दीजिए। यह रास्ता अंतःकोण के सीधे सूत्र से तेज़ है, क्योंकि बाह्य कोणों का योग हमेशा तीन सौ साठ ही रहता है।
समांतर चतुर्भुज में कितनी सममिति रेखाएँ होती हैं?
एक भी नहीं, यद्यपि उसकी घूर्णन सममिति की कोटि दो होती है। इसका अर्थ है कि उसे एक सौ अस्सी अंश घुमाने पर वह पहले जैसा दिखने लगता है, पर उसे किसी रेखा पर मोड़कर दोनों भाग मिलाए नहीं जा सकते। ये दो अलग-अलग गुण हैं।
