परिमेय एवं अपरिमेय संख्याएँ
परिमेय एवं अपरिमेय संख्याएँ
यह विषय 1 से 2 प्रश्न देता है और स्नातक स्तर पर परिभाषा से आगे बढ़कर गुण पूछे जाते हैं। कौन-सी संख्या परिमेय है, दो संख्याओं के बीच कितनी संख्याएँ हैं, और संख्या रेखा पर उनका स्थान — तीनों में तर्क चाहिए, केवल स्मरण नहीं।
संख्या परिमेय कब होती है
वह संख्या परिमेय है जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q शून्य न हो। इसमें सभी पूर्णांक, सभी सांत दशमलव और सभी आवर्ती दशमलव आ जाते हैं।
| संख्या | परिमेय या अपरिमेय | कारण |
|---|---|---|
| 7 | परिमेय | 7/1 लिखा जा सकता है |
| 0.25 | परिमेय | सांत दशमलव, 1/4 |
| 0.333... | परिमेय | आवर्ती दशमलव, 1/3 |
| √2 | अपरिमेय | न सांत, न आवर्ती |
| π | अपरिमेय | न सांत, न आवर्ती |
| √9 | परिमेय | यह 3 है |
अंतिम पंक्ति जाल है — वर्गमूल का चिह्न देखकर अपरिमेय मत मान लीजिए। √9 = 3 है, जो परिमेय है। अपरिमेय वही है जिसका वर्गमूल पूर्ण न निकले।
✗ 22/7 का मान π है, इसलिए वह अपरिमेय है | ✓ 22/7 परिमेय है; वह π का सन्निकट मान है, π स्वयं नहीं
यह अंतिम बिंदु स्नातक स्तर पर बार-बार पूछा जाता है — 22/7 परिमेय है, π अपरिमेय। 22/7 केवल एक सुविधाजनक सन्निकट मान है।
परिमेय संख्याओं के गुण
- परिमेय संख्याएँ जोड़, घटाव, गुणा और भाग — चारों के लिए संवृत हैं (शून्य से भाग को छोड़कर)।
- उनका दशमलव प्रसार या तो सांत होगा या आवर्ती — तीसरी संभावना नहीं।
- दो परिमेय संख्याओं का योग और गुणनफल हमेशा परिमेय होता है।
पर मिश्रित स्थिति में सावधानी चाहिए — परिमेय और अपरिमेय का योग सदा अपरिमेय होता है। जैसे 2 + √3 अपरिमेय है। यह गुण-आधारित प्रश्न अक्सर आता है।
सघनता: संख्याओं के बीच संख्याएँ
किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं। यही गुण सघनता कहलाता है और यह पूर्णांकों में नहीं मिलता — 2 और 3 के बीच कोई पूर्णांक नहीं है।
दो संख्याओं के बीच की संख्या = (a + b) ÷ 2
इसी सूत्र को बार-बार लगाकर जितनी चाहें उतनी संख्याएँ निकाली जा सकती हैं। यही कारण है कि उत्तर अनंत होता है, कोई निश्चित संख्या नहीं।
संख्या रेखा पर
हर वास्तविक संख्या का संख्या रेखा पर एक निश्चित बिंदु है, और हर बिंदु किसी न किसी वास्तविक संख्या को दर्शाता है। इसीलिए संख्या रेखा को वास्तविक संख्या रेखा कहते हैं।
√2 को भी संख्या रेखा पर दिखाया जा सकता है — एक इकाई भुजा वाले वर्ग का विकर्ण √2 लंबा होता है, और उसे परकार से रेखा पर उतारा जा सकता है। यह रचना-आधारित तथ्य पूछा जाता है।
पहचान का सूत्र: दशमलव लिखकर देखिए। यदि वह कहीं समाप्त हो जाए या कोई अंक-समूह दोहराने लगे तो संख्या परिमेय है। यदि न समाप्त हो और न दोहराए, तो अपरिमेय है।
TRE संकेत: 22/7 परिमेय, π अपरिमेय — यह स्नातक स्तर का सबसे तय प्रश्न है। √9 परिमेय है वाला जाल भी पहचानिए, केवल मूल चिह्न देखकर उत्तर मत दीजिए। परिमेय और अपरिमेय का योग सदा अपरिमेय होता है, यह गुण अलग से याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- परिमेय संख्या को p/q रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q शून्य न हो।
- सांत और आवर्ती दोनों दशमलव परिमेय होते हैं।
- √2 और π अपरिमेय हैं, पर √9 परिमेय है क्योंकि वह 3 है।
- 22/7 परिमेय है; वह π का सन्निकट मान भर है।
- परिमेय और अपरिमेय का योग सदा अपरिमेय होता है।
- दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 22 बटा 7 अपरिमेय संख्या है?
नहीं, वह परिमेय है, क्योंकि उसे दो पूर्णांकों के अनुपात के रूप में लिखा गया है। वह केवल पाई का एक सुविधाजनक सन्निकट मान है। पाई स्वयं अपरिमेय है क्योंकि उसका दशमलव प्रसार न समाप्त होता है और न किसी क्रम में दोहराता है।
परिमेय और अपरिमेय में पहचान कैसे करें?
संख्या का दशमलव रूप लिखकर देखिए। यदि वह कहीं समाप्त हो जाए या कोई अंक-समूह दोहराने लगे, तो संख्या परिमेय है। यदि दशमलव न समाप्त हो और न दोहराए, तो वह अपरिमेय है। यही एकमात्र भरोसेमंद कसौटी है।
क्या हर वर्गमूल अपरिमेय होता है?
नहीं। जिस संख्या का वर्गमूल पूर्ण निकल जाए, उसका मूल परिमेय होता है। नौ का वर्गमूल तीन है, जो परिमेय है। केवल उन्हीं संख्याओं के मूल अपरिमेय होते हैं जो पूर्ण वर्ग नहीं हैं, जैसे दो, तीन या पाँच।
दो परिमेय संख्याओं के बीच कितनी संख्याएँ होती हैं?
अनंत। दोनों का औसत लेकर बीच की एक संख्या निकाली जा सकती है, फिर उसी विधि को बार-बार दोहराया जा सकता है। इसी गुण को सघनता कहते हैं और यही परिमेय संख्याओं को पूर्णांकों से अलग करता है, क्योंकि दो और तीन के बीच कोई पूर्णांक नहीं है।
