प्रकाश का परावर्तन एवं दर्पण
प्रकाश का परावर्तन एवं दर्पण
दर्पण से लगभग हर वर्ष एक प्रश्न आता है और वह अधिकतर इसी पर होता है कि किस काम में कौन-सा दर्पण लगता है। इसलिए परावर्तन के दो नियम और तीनों दर्पणों के प्रतिबिंब की प्रकृति — ये दो चीज़ें रट जाइए, बाकी अपने आप बन जाता है।
परावर्तन के दो नियम
- आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं।
ये नियम समतल और गोलीय दोनों प्रकार के दर्पणों पर लागू होते हैं। चिकनी सतह से नियमित परावर्तन होता है और हमें प्रतिबिंब दिखता है, जबकि खुरदरी सतह से विसरित परावर्तन होता है और प्रतिबिंब नहीं बनता। दीवार दिखती तो है पर उसमें चेहरा नहीं दिखता — कारण यही है।
समतल दर्पण का प्रतिबिंब
- प्रतिबिंब आभासी और सीधा होता है।
- वस्तु के बराबर आकार का होता है।
- दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु सामने है।
- उसमें पार्श्व परिवर्तन होता है — दायाँ बायाँ दिखता है।
पार्श्व परिवर्तन के कारण ही एंबुलेंस के आगे AMBULANCE उल्टा लिखा जाता है, ताकि आगे चल रहे वाहन के चालक को अपने दर्पण में सीधा पढ़ा जा सके। यह उदाहरण परीक्षा में बार-बार आया है।
गोलीय दर्पण
| दर्पण | परावर्तक सतह | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| अवतल | भीतर की ओर धँसी | शेविंग दर्पण, टॉर्च, वाहन की हेडलाइट, सौर कुकर, डॉक्टर का सिर-दर्पण |
| उत्तल | बाहर की ओर उभरी | वाहनों का पश्च-दृश्य दर्पण, दुकानों का सुरक्षा दर्पण, सड़क के मोड़ पर |
अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक या आभासी दोनों प्रकार का प्रतिबिंब बना सकता है। जब वस्तु फोकस और दर्पण के बीच हो, तभी प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है — शेविंग दर्पण इसी स्थिति में काम करता है।
उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। छोटा बनने का अर्थ है अधिक क्षेत्र एक साथ दिखना, इसलिए वाहन में पीछे का दृश्य देखने के लिए यही उपयुक्त है।
✗ वाहन के पश्च-दृश्य दर्पण में अवतल दर्पण लगता है | ✓ उसमें उत्तल दर्पण लगता है, क्योंकि वह छोटा प्रतिबिंब बनाकर अधिक चौड़ा क्षेत्र दिखाता है
फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या का संबंध सरल है — फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। यह संबंध दोनों गोलीय दर्पणों पर लागू होता है।
f = R ÷ 2
रोज़मर्रा के उपयोग
- वाहन की हेडलाइट में अवतल दर्पण बल्ब को फोकस पर रखकर समांतर किरण-पुंज भेजता है।
- सौर कुकर में अवतल दर्पण सूर्य की किरणों को एक बिंदु पर एकत्र करता है।
- दंत चिकित्सक दाँत का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए अवतल दर्पण प्रयोग करते हैं।
- दुकानों में एक कोने से पूरा हॉल देखने के लिए उत्तल दर्पण लगाया जाता है।
दोनों दर्पणों में अंतर याद रखने का सरल सूत्र — जहाँ चीज़ को बड़ा करके देखना हो वहाँ अवतल, और जहाँ ज़्यादा क्षेत्र एक साथ देखना हो वहाँ उत्तल।
TRE संकेत: वाहन के पश्च-दृश्य दर्पण में उत्तल और शेविंग दर्पण में अवतल — यह जोड़ी सबसे अधिक पूछी जाती है। उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, इसमें 'सदैव' शब्द महत्वपूर्ण है। f = R ÷ 2 वाला संबंध भी सीधे पूछा जा चुका है।
60 सेकंड का रिवीजन
- आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- समतल दर्पण का प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का और पार्श्व-परिवर्तित होता है।
- अवतल दर्पण स्थिति के अनुसार वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
- उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- वाहन का पश्च-दृश्य दर्पण उत्तल तथा शेविंग दर्पण अवतल होता है।
- फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाहनों में उत्तल दर्पण ही क्यों लगाया जाता है?
क्योंकि उत्तल दर्पण हमेशा छोटा और सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे पीछे का बहुत बड़ा क्षेत्र एक ही दर्पण में समा जाता है। चालक को एक नज़र में अधिक सड़क दिख जाती है। अवतल दर्पण लगाने पर प्रतिबिंब उल्टा भी बन सकता है, जो चालक के लिए भ्रामक होगा।
पार्श्व परिवर्तन क्या है?
समतल दर्पण में वस्तु का दायाँ भाग प्रतिबिंब में बायाँ और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है, इसी को पार्श्व परिवर्तन कहते हैं। इसी कारण एंबुलेंस के आगे उसका नाम उल्टा लिखा जाता है, ताकि आगे चलते वाहन के दर्पण में वह सीधा पढ़ा जा सके।
नियमित और विसरित परावर्तन में क्या अंतर है?
चिकनी सतह पर सभी परावर्तित किरणें एक ही दिशा में जाती हैं, इसे नियमित परावर्तन कहते हैं और इसी से स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है। खुरदरी सतह पर किरणें अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती हैं, इसे विसरित परावर्तन कहते हैं। दोनों में परावर्तन के नियम लागू होते हैं।
क्या अवतल दर्पण हमेशा बड़ा प्रतिबिंब बनाता है?
नहीं। अवतल दर्पण का प्रतिबिंब वस्तु की स्थिति पर निर्भर करता है। वस्तु फोकस और दर्पण के बीच हो तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है, पर वस्तु वक्रता केंद्र से दूर हो तो वह वास्तविक, उल्टा और छोटा बनता है।
