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प्रकाश का अपवर्तन, लेंस एवं वर्ण-विक्षेपण

By ExamAtlas · 29/8/2026

प्रकाश का अपवर्तन, लेंस एवं वर्ण-विक्षेपण

अपवर्तन वाला भाग परीक्षा में दो तरह से आता है — या तो रोज़मर्रा की कोई घटना देकर कारण पूछा जाता है, जैसे पानी में डूबी छड़ का टेढ़ा दिखना, या फिर लेंस का उपयोग पूछा जाता है। दोनों का आधार एक ही है कि प्रकाश की चाल माध्यम बदलने पर बदल जाती है।

प्रकाश क्यों मुड़ता है

जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाता है तो उसकी चाल बदल जाती है और इसी कारण वह अपने पथ से मुड़ जाता है। इसी मुड़ने को अपवर्तन कहते हैं।

  • विरल से सघन माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
  • सघन से विरल माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब से दूर हट जाती है।
  • अभिलंब के अनुदिश आने वाली किरण बिल्कुल नहीं मुड़ती

अपवर्तन के प्रभाव रोज़ दिखते हैं — पानी के गिलास में रखी पेंसिल टूटी हुई लगती है, तालाब कम गहरा दिखता है, और तारे टिमटिमाते हैं क्योंकि वायुमंडल की परतों का घनत्व बदलता रहता है। सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद कुछ मिनट सूर्य दिखना भी वायुमंडलीय अपवर्तन का ही परिणाम है।

जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाए तो प्रकाश बाहर निकलता ही नहीं, पूरा लौट आता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। हीरे की चमक, मरीचिका और प्रकाशिक तंतु इसी पर आधारित हैं।

लेंस

लेंसआकारप्रकृतिमुख्य उपयोग
उत्तलबीच में मोटाअभिसारीआवर्धक लेंस, दूर-दृष्टि दोष का उपचार, कैमरा
अवतलबीच में पतलाअपसारीनिकट-दृष्टि दोष का उपचार, दरवाज़े की आँख

उत्तल लेंस किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है, इसलिए उसे अभिसारी कहते हैं। वह वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बना सकता है। जब वस्तु फोकस के भीतर हो तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है — आवर्धक लेंस इसी स्थिति में काम करता है।

अवतल लेंस किरणों को फैला देता है और सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। लेंस की क्षमता डायोप्टर में मापी जाती है और वह फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है।

क्षमता (D) = 1 ÷ फोकस दूरी (मीटर में)

उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की ऋणात्मक होती है। इसीलिए चश्मे के नंबर में लगा जोड़ या घटाव का चिह्न ही बता देता है कि कौन-सा दोष है।

अवतल लेंस से वस्तु बड़ी दिखती है  |   अवतल लेंस सदैव छोटा प्रतिबिंब बनाता है; बड़ा प्रतिबिंब उत्तल लेंस देता है

वर्ण-विक्षेपण एवं स्पेक्ट्रम

श्वेत प्रकाश काँच के प्रिज़्म से गुजरने पर सात रंगों में बँट जाता है, इसे वर्ण-विक्षेपण कहते हैं। रंगों का क्रम बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल होता है और इसे संक्षेप में बैजानीहपीनाला से याद रखा जाता है।

विक्षेपण इसलिए होता है क्योंकि हर रंग की चाल काँच में अलग होती है। बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम मुड़ता है। इंद्रधनुष भी इसी का उदाहरण है, जिसमें वर्षा की बूँदें प्रिज़्म का काम करती हैं और अपवर्तन के साथ पूर्ण आंतरिक परावर्तन भी होता है।

प्रकाश और ध्वनि की चाल का नियम उल्टा है। ध्वनि ठोस में सबसे तेज़ चलती है, जबकि प्रकाश सघन माध्यम में धीमा हो जाता है और निर्वात में सबसे तेज़ चलता है।

TRE संकेत: अवतल लेंस निकट-दृष्टि में और उत्तल लेंस दूर-दृष्टि में — यह जोड़ी सबसे अधिक पूछी जाती है। हीरे की चमक पूर्ण आंतरिक परावर्तन से है, यह भी तयशुदा तथ्य है। बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम विक्षेपित होता है, इसे उलटकर पूछा जाता है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • माध्यम बदलने पर चाल बदलती है, इसी से अपवर्तन होता है।
  • विरल से सघन में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
  • पूर्ण आंतरिक परावर्तन से हीरे की चमक और प्रकाशिक तंतु काम करते हैं।
  • उत्तल लेंस अभिसारी और अवतल लेंस अपसारी होता है।
  • लेंस की क्षमता डायोप्टर में और फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है।
  • श्वेत प्रकाश प्रिज़्म से सात रंगों में बँटता है; बैंगनी सर्वाधिक मुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पानी में डूबी छड़ टेढ़ी क्यों दिखती है?

क्योंकि पानी से निकलकर हवा में आते समय प्रकाश की किरणें अपवर्तित होकर मुड़ जाती हैं। हमारी आँख किरणों को सीधी रेखा में आया मानती है, इसलिए डूबा हुआ भाग अपनी वास्तविक जगह से ऊपर उठा दिखता है और छड़ मुड़ी हुई लगती है। इसी कारण तालाब भी कम गहरा दिखता है।

हीरा इतना क्यों चमकता है?

हीरे का क्रांतिक कोण बहुत छोटा होता है, इसलिए भीतर घुसा प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से टकराता रहता है और आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। तराशने से यह प्रभाव और बढ़ जाता है, जिससे हीरे से निकलने वाला प्रकाश बहुत तीव्र दिखाई देता है।

लेंस की क्षमता का चिह्न क्या बताता है?

धनात्मक चिह्न बताता है कि लेंस उत्तल है और वह किरणों को मिलाता है, जबकि ऋणात्मक चिह्न बताता है कि लेंस अवतल है और वह किरणों को फैलाता है। इसीलिए चश्मे के नंबर पर लगा चिह्न देखकर ही पता चल जाता है कि व्यक्ति को कौन-सा दृष्टि दोष है।

इंद्रधनुष कैसे बनता है?

वर्षा के बाद हवा में लटकी पानी की सूक्ष्म बूँदें प्रिज़्म की तरह काम करती हैं। सूर्य का श्वेत प्रकाश बूँद में घुसते समय अपवर्तित होता है, भीतर पूर्ण आंतरिक परावर्तन से लौटता है और बाहर निकलते समय फिर अपवर्तित होकर सात रंगों में बँट जाता है। इसीलिए इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखता है।