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भारत के संसाधन, कृषि एवं उद्योग

By ExamAtlas · 29/8/2026

भारत के संसाधन, कृषि एवं उद्योग

आर्थिक भूगोल से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और वे प्रायः फ़सल, खनिज या उद्योग के स्थान पर होते हैं। यहाँ सूची रटने से अधिक उपयोगी है यह समझना कि कोई चीज़ वहीं क्यों होती है — कारण याद रहे तो स्थान अपने आप याद रहता है।

संसाधनों के प्रकार

आधारप्रकारउदाहरण
समाप्यतानवीकरणीयसौर, पवन, जल
समाप्यताअनवीकरणीयकोयला, पेट्रोलियम
उत्पत्तिजैववन, वन्य जीव
उत्पत्तिअजैवखनिज, चट्टान

मूल भेद यही है कि नवीकरणीय संसाधन दोबारा बन जाते हैं और अनवीकरणीय एक बार समाप्त होने पर वापस नहीं आते। इसी कारण कोयला और पेट्रोलियम को जीवाश्म ईंधन कहा जाता है और उनके संरक्षण पर ज़ोर दिया जाता है।

भारत की फ़सल ऋतुएँ

ऋतुबुआईकटाईफ़सल
खरीफ़जून-जुलाईसितंबर-अक्टूबरचावल, मक्का, जूट, कपास
रबीअक्टूबर-दिसंबरअप्रैल-जूनगेहूँ, चना, सरसों
ज़ायदमार्च-जूनमानसून से पहलेतरबूज़, ककड़ी, चारा

फ़सल और परिस्थिति का संबंध याद रखिए — चावल को अधिक वर्षा और चिकनी मिट्टी चाहिए, गेहूँ को ठंडा मौसम और पकते समय धूप, और कपास को काली मिट्टी। बिहार चावल, गेहूँ, जूट और गन्ना — चारों में आता है।

कपास जलोढ़ मिट्टी में सबसे अच्छी होती है  |   उसे काली मिट्टी चाहिए; जलोढ़ चावल और गेहूँ के लिए उपयुक्त है

हरित क्रांति से जुड़ा नाम एम. एस. स्वामीनाथन है और श्वेत क्रांति से वर्गीज़ कुरियन। रंग और उत्पाद का जोड़ा — हरित अनाज, श्वेत दूध, नीली मत्स्य, पीली तिलहन — सीधे पूछा जाता है।

खनिज एवं उद्योग

खनिजप्रमुख राज्य
कोयलाझारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़
लौह अयस्कओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड
अभ्रकझारखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान
बॉक्साइटओडिशा, गुजरात
पेट्रोलियमअसम, गुजरात, मुंबई हाई

लगभग हर पंक्ति में झारखंड या ओडिशा आता है, क्योंकि दोनों प्रायद्वीपीय पठार पर हैं, जो भारत का सबसे प्राचीन भूभाग है। बिहार में खनिज लगभग नहीं हैं, और इसका कारण भौगोलिक है — वह पूरी तरह जलोढ़ मैदान पर है, और खनिज क्षेत्र नवंबर 2000 में झारखंड के साथ चला गया।

उद्योग वहीं बसते हैं जहाँ कच्चा माल, ऊर्जा, श्रम, बाज़ार और परिवहन साथ मिलें। लोहा-इस्पात उद्योग कोयले और लौह अयस्क के पास लगता है, और चीनी मिलें गन्ने के खेतों के पास, क्योंकि कटने के बाद गन्ने में शर्करा तेज़ी से घटती है। यही कारण उत्तर बिहार में मिलों की स्थिति समझाता है।

स्थान याद करने के बजाय कारण याद कीजिए — चीनी मिल गन्ने के पास क्यों, इस्पात संयंत्र कोयले के पास क्यों। कारण एक बार समझ में आ जाए तो नया उदाहरण भी हल हो जाता है।

TRE संकेत: चीनी मिल गन्ने के पास वाला कारण सबसे अधिक पूछा जाता है और यह सीधे उत्तर बिहार से जुड़ता है। क्रांतियों का रंग-उत्पाद जोड़ा पूरा याद कीजिए। और यह याद रखिए कि बिहार में खनिज न होना भौगोलिक कारण से है — जलोढ़ मैदान में खनिज नहीं बनते।

60 सेकंड का रिवीजन

  • नवीकरणीय संसाधन दोबारा बनते हैं, अनवीकरणीय नहीं।
  • खरीफ़ मानसून में, रबी सर्दी में और ज़ायद गर्मी में बोई जाती है।
  • चावल को अधिक वर्षा, गेहूँ को ठंडा मौसम, कपास को काली मिट्टी चाहिए।
  • हरित क्रांति अनाज की, श्वेत दूध की, नीली मत्स्य और पीली तिलहन की।
  • खनिज प्रायद्वीपीय पठार पर मिलते हैं — झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़।
  • चीनी मिलें गन्ने के पास लगती हैं क्योंकि कटने पर शर्करा घटती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीनी मिलें गन्ने के खेतों के पास ही क्यों लगती हैं?

क्योंकि गन्ना कटते ही उसमें शर्करा की मात्रा तेज़ी से घटने लगती है, इसलिए उसे जल्दी पेरना पड़ता है। यह कच्चा माल भारी और शीघ्र ख़राब होने वाला दोनों है, इसलिए मिल को उगाने वाले क्षेत्र में ही जाना पड़ता है। उत्तर बिहार की मिलें इसी नियम पर हैं।

बिहार में खनिज लगभग क्यों नहीं मिलते?

क्योंकि खनिज मुख्यतः प्रायद्वीपीय पठार की प्राचीन चट्टानों में मिलते हैं, जबकि बिहार पूरी तरह नदियों से बने जलोढ़ मैदान पर स्थित है। इसके अतिरिक्त खनिज-समृद्ध ज़िले नवंबर 2000 में झारखंड बनने के साथ अलग हो गए।

खरीफ़ और रबी फ़सलों में क्या अंतर है?

खरीफ़ फ़सलें मानसून के आरंभ में जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं, जैसे चावल, मक्का और जूट। रबी फ़सलें सर्दी में अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोई जाती हैं और अप्रैल-जून में काटी जाती हैं, जैसे गेहूँ, चना और सरसों।

क्रांतियों के रंग किस उत्पाद से जुड़े हैं?

हरित क्रांति अनाज उत्पादन से, श्वेत क्रांति दुग्ध उत्पादन से, नीली क्रांति मत्स्य पालन से और पीली क्रांति तिलहन से जुड़ी है। हरित क्रांति से एम. एस. स्वामीनाथन का नाम और श्वेत क्रांति से वर्गीज़ कुरियन का नाम जुड़ा है।