1857 का विद्रोह एवं बिहार में उसका स्वरूप
1857 का विद्रोह एवं बिहार में उसका स्वरूप
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भाग-II के पाँच हिस्सों में से एक है, इसलिए इससे लगभग 8 प्रश्न आते हैं और 1857 से 1 से 2 रहते हैं। बिहार के पत्र में कुँवर सिंह वाला हिस्सा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, इसलिए तिथियाँ और स्थान सटीक याद कीजिए।
कारण एवं आरंभ
विद्रोह के कारण एक नहीं थे। राजनीतिक कारणों में व्यपगत का सिद्धांत, आर्थिक में भारी लगान और दस्तकारी का पतन, सामाजिक-धार्मिक में सुधारों को लेकर संदेह, और सैनिक कारणों में भारतीय सिपाहियों के साथ भेदभाव प्रमुख थे।
तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूस बने। विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से आरंभ हुआ, और मंगल पांडे ने उससे पहले 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में विरोध किया था।
| स्थान | नेतृत्व |
|---|---|
| दिल्ली | बहादुर शाह ज़फ़र |
| कानपुर | नाना साहेब |
| झाँसी | रानी लक्ष्मीबाई |
| लखनऊ | बेगम हज़रत महल |
| जगदीशपुर, बिहार | कुँवर सिंह |
✗ विद्रोह की शुरुआत बैरकपुर से हुई | ✓ बैरकपुर में मंगल पांडे का विरोध पहले हुआ, पर विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ
कुँवर सिंह: 1857 में बिहार का चेहरा
बाबू कुँवर सिंह जगदीशपुर, वर्तमान भोजपुर ज़िले के ज़मींदार थे और लगभग अस्सी वर्ष की आयु में विद्रोह का नेतृत्व किया। बिहार में विद्रोह का यही सबसे बड़ा नाम है।
उन्होंने आरा, रोहतास और आस-पास के क्षेत्रों में अंग्रेज़ों को कई बार पीछे हटाया। अप्रैल 1858 में वे जगदीशपुर लौटे और अंग्रेज़ी सेना को हराया, पर कुछ ही दिनों बाद उनका निधन हो गया। उनके बाद उनके भाई अमर सिंह ने संघर्ष जारी रखा।
बिहार के पत्र में यह हिस्सा सामान्य से अधिक पूछा जाता है, इसलिए जगदीशपुर, भोजपुर और 1858 — तीनों साथ याद रखिए।
असफलता के कारण एवं उसके बाद के बदलाव
- नेतृत्व एक जगह केंद्रित नहीं था और उद्देश्य भी अलग-अलग थे।
- देश के कई हिस्से विद्रोह से बाहर रहे।
- अंग्रेज़ों के पास बेहतर हथियार, संचार और संसाधन थे।
परिणाम बड़ा था। 1858 के भारत सरकार अधिनियम से ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और सत्ता सीधे ब्रिटिश ताज के हाथ में चली गई। यही 1857 का सबसे बड़ा परिणाम है और यही सबसे अधिक पूछा जाता है।
तिथियाँ जोड़े में याद कीजिए — 29 मार्च 1857 मंगल पांडे, 10 मई 1857 मेरठ से आरंभ, 1858 में कंपनी शासन का अंत और उसी वर्ष कुँवर सिंह की जगदीशपुर वापसी।
TRE संकेत: कुँवर सिंह और जगदीशपुर बिहार के पत्र का सबसे तय प्रश्न है। मेरठ से आरंभ, बैरकपुर से नहीं — यह जाल हर बार रखा जाता है। और 1857 का सबसे बड़ा परिणाम कंपनी शासन का अंत है, स्वतंत्रता नहीं — विकल्पों में यही अंतर परखा जाता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूस थे।
- विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से आरंभ हुआ।
- मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में विरोध किया था।
- बिहार में नेतृत्व बाबू कुँवर सिंह ने जगदीशपुर से किया।
- उनके बाद भाई अमर सिंह ने संघर्ष जारी रखा।
- 1858 में कंपनी शासन समाप्त हुआ और सत्ता ब्रिटिश ताज को मिली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
बाबू कुँवर सिंह ने, जो जगदीशपुर के ज़मींदार थे और वर्तमान भोजपुर ज़िले से थे। उन्होंने लगभग अस्सी वर्ष की आयु में नेतृत्व किया और आरा तथा रोहतास के क्षेत्रों में अंग्रेज़ों को कई बार पीछे हटाया। उनके निधन के बाद भाई अमर सिंह ने संघर्ष जारी रखा।
विद्रोह की शुरुआत कहाँ से हुई?
10 मई 1857 को मेरठ से। बैरकपुर में मंगल पांडे का विरोध इससे पहले 29 मार्च 1857 को हुआ था, पर वह एक अलग घटना थी और उसे विद्रोह का आरंभ नहीं माना जाता। विकल्पों में दोनों स्थान साथ रखे जाते हैं।
1857 के विद्रोह का सबसे बड़ा परिणाम क्या रहा?
ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत। 1858 के भारत सरकार अधिनियम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश ताज के अधीन आ गया। यही इस विद्रोह का सबसे स्थायी परिणाम था, यद्यपि विद्रोह स्वयं अपने तात्कालिक उद्देश्य में सफल नहीं हुआ।
विद्रोह असफल क्यों रहा?
क्योंकि नेतृत्व एक जगह केंद्रित नहीं था और विभिन्न नेताओं के उद्देश्य भी अलग-अलग थे। देश के कई हिस्से इससे बाहर रहे और अंग्रेज़ों के पास बेहतर हथियार, संचार व्यवस्था और संसाधन थे। इन्हीं कारणों से संगठित प्रतिरोध खड़ा नहीं हो सका।
