क्रांतिकारी आंदोलन, आज़ाद हिंद फौज एवं स्वतंत्रता
क्रांतिकारी आंदोलन, आज़ाद हिंद फौज एवं स्वतंत्रता
यह विषय आंदोलन का अंतिम हिस्सा है और 1 से 2 प्रश्न देता है। क्रांतिकारी धारा, सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज और स्वतंत्रता तक की अंतिम घटनाएँ — तीनों में नाम और वर्ष सीधे पूछे जाते हैं।
क्रांतिकारी धारा
अहिंसक आंदोलन के समानांतर एक सशस्त्र धारा भी चलती रही, जो मानती थी कि सत्ता बलपूर्वक ही हटेगी।
| क्रांतिकारी | घटना |
|---|---|
| खुदीराम बोस | मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड, 1908 |
| भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव | लाहौर षड्यंत्र; 1931 में फाँसी |
| चंद्रशेखर आज़ाद | काकोरी कांड में शामिल; 1931 में शहीद |
| राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्ला | काकोरी कांड, 1925 |
खुदीराम बोस का नाम बिहार की कड़ी में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी घटना मुज़फ़्फ़रपुर में हुई थी। वे उस समय बहुत कम आयु के थे और सबसे कम उम्र के शहीदों में गिने जाते हैं।
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 1929 में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका था, जिसका उद्देश्य किसी को मारना नहीं बल्कि — जैसा उन्होंने कहा — बहरों को सुनाना था। बटुकेश्वर दत्त बिहार से थे, यह राज्य के पत्र में जोड़ने योग्य कड़ी है।
✗ भगत सिंह को 1929 में फाँसी हुई | ✓ 1929 में उन्होंने विधानसभा में बम फेंका; फाँसी 1931 में हुई
सुभाष चंद्र बोस एवं आज़ाद हिंद फौज
सुभाष चंद्र बोस 1938 और 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे, पर मतभेद के बाद उन्होंने फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। बाद में वे देश से निकलकर विदेश पहुँचे।
- आज़ाद हिंद फौज का गठन पहले रासबिहारी बोस ने किया; 1943 में इसका नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस ने सँभाला।
- उन्होंने आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की।
- रानी झाँसी रेजिमेंट महिलाओं की टुकड़ी थी, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया।
- उनके नारे — तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा और जय हिंद।
उन्हें नेताजी कहा जाता है, और यह उपाधि सीधे पूछी जाती है।
15 अगस्त 1947 तक का रास्ता
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1946 | कैबिनेट मिशन; संविधान सभा का गठन |
| 1946 | नौसेना विद्रोह, बंबई |
| 1947 | माउंटबेटन योजना, जून |
| 1947 | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, जुलाई |
| 15 अगस्त 1947 | स्वतंत्रता |
अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन थे, जो स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल भी बने। सी. राजगोपालाचारी भारत के अंतिम और पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे — यह जोड़ा अक्सर गड्डमड्ड होता है।
बिहार की कड़ी पूरे विषय में चलती है — 1857 में कुँवर सिंह, 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में खुदीराम, 1917 में चंपारण, 1929 में बटुकेश्वर दत्त, और 1942 में पटना के सप्त शहीद तथा जयप्रकाश नारायण।
TRE संकेत: खुदीराम बोस का मुज़फ़्फ़रपुर और बटुकेश्वर दत्त का बिहार से होना — दोनों राज्य की कड़ी में जोड़कर याद रखिए। 1929 बम, 1931 फाँसी का अंतर तयशुदा जाल है। माउंटबेटन अंतिम वायसराय और राजगोपालाचारी अंतिम गवर्नर जनरल — यह जोड़ा भी अलग-अलग रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- खुदीराम बोस की घटना 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में हुई।
- भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 1929 में विधानसभा में बम फेंका; फाँसी 1931 में।
- काकोरी कांड 1925 में हुआ; राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्ला उसमें शामिल थे।
- सुभाष चंद्र बोस ने फ़ॉरवर्ड ब्लॉक बनाया और 1943 में आज़ाद हिंद फौज सँभाली।
- रानी झाँसी रेजिमेंट महिलाओं की टुकड़ी थी।
- माउंटबेटन अंतिम वायसराय; राजगोपालाचारी अंतिम गवर्नर जनरल थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खुदीराम बोस की घटना कहाँ हुई थी?
मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार में, वर्ष 1908 में। वे उस समय बहुत कम आयु के थे और भारत के सबसे कम उम्र के शहीदों में गिने जाते हैं। बिहार से जुड़ी घटना होने के कारण राज्य के पत्र में यह प्रश्न आने की संभावना अधिक रहती है।
भगत सिंह ने विधानसभा में बम क्यों फेंका?
किसी को मारने के लिए नहीं, बल्कि विरोध दर्ज कराने के लिए। उनके अनुसार उद्देश्य बहरों को सुनाना था। यह 1929 की घटना है और उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर यह किया, जो स्वयं बिहार से थे। उन्हें फाँसी 1931 में हुई।
आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व किसने किया?
उसका गठन पहले रासबिहारी बोस ने किया था और 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने उसका नेतृत्व सँभाला। उन्होंने आज़ाद हिंद सरकार भी बनाई और महिलाओं की रानी झाँसी रेजिमेंट का गठन किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया।
भारत के अंतिम वायसराय और अंतिम गवर्नर जनरल कौन थे?
अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन थे, जो स्वतंत्रता के बाद पहले गवर्नर जनरल भी बने। अंतिम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे, जो इस पद पर पहुँचने वाले पहले भारतीय भी थे। दोनों पद और नाम विकल्पों में गड्डमड्ड करके पूछे जाते हैं।
