Topic 39.37 min read

रीतिकाल: प्रवृत्तियाँ एवं प्रमुख कवि

Ritikal: Tendencies and Major Poets

WhatsApp

रीतिकाल से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और यह भाग तीन उपधाराओं पर टिका है — रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त। किस कवि को किस उपधारा में रखा जाए, यही परीक्षा का मुख्य प्रश्न है, इसलिए तीनों का आधार समझ लीजिए।

रीतिकाल की प्रवृत्तियाँ

  • शृंगार रस की प्रधानता, विशेषकर संयोग शृंगार।
  • लक्षण ग्रंथों की रचना — काव्य के नियम बताने वाले ग्रंथ।
  • नायिका भेद और नख-शिख वर्णन का विस्तार।
  • ब्रजभाषा का परिष्कृत और अलंकृत रूप।
  • दरबारी संरक्षण — अधिकांश कवि राजाश्रय में थे।

इसी शृंगार प्रधानता के कारण इस काल को शृंगार काल भी कहा जाता है। नाम रीतिकाल इसलिए पड़ा कि कवियों ने काव्य की रीति यानी नियम बताने वाले ग्रंथ लिखे।

तीन उपधाराएँ

उपधाराआधारप्रमुख कवि
रीतिबद्धलक्षण ग्रंथ लिखे, नियम के अनुसार काव्यकेशवदास, चिंतामणि, मतिराम, देव
रीतिसिद्धलक्षण ग्रंथ नहीं लिखे, पर रीति में सिद्धबिहारी
रीतिमुक्तरीति के बंधन से मुक्त, स्वच्छंद प्रेमघनानंद, बोधा, आलम, ठाकुर

बिहारी अकेले रीतिसिद्ध कवि माने जाते हैं — उन्होंने कोई लक्षण ग्रंथ नहीं लिखा, पर उनकी बिहारी सतसई रीति में पूर्ण सिद्ध है। यह अकेलापन ही इसे तय प्रश्न बनाता है।

✗ बिहारी रीतिबद्ध कवि हैं क्योंकि उन्होंने सतसई लिखी  |  ✓ वे रीतिसिद्ध हैं; सतसई लक्षण ग्रंथ नहीं, मुक्तक काव्य है

प्रमुख कवि एवं रचनाएँ

कविरचनाएँ
केशवदासरसिकप्रिया, कविप्रिया, रामचंद्रिका
बिहारीबिहारी सतसई
मतिरामरसराज, ललित ललाम
देवभाव विलास, रस विलास
घनानंदसुजान हित, इश्क लता
भूषणशिवराज भूषण, शिवा बावनी

भूषण इस काल के अपवाद हैं — उन्होंने शृंगार नहीं, वीर रस लिखा और शिवाजी तथा छत्रसाल की प्रशंसा की। रीतिकाल में वीर रस का यह अकेला बड़ा नाम होने के कारण भूषण बार-बार पूछे जाते हैं।

आसान पहचान: लक्षण ग्रंथ लिखा तो रीतिबद्ध, नहीं लिखा पर रीति में पक्का तो रीतिसिद्ध, और रीति की परवाह ही नहीं की तो रीतिमुक्त। एक ही प्रश्न से तीनों तय हो जाते हैं।

TRE संकेत: बिहारी अकेले रीतिसिद्ध और घनानंद रीतिमुक्त के प्रमुख — ये दो लगभग तय प्रश्न हैं। भूषण का वीर रस इस काल का अपवाद है, इसलिए वह भी पूछा जाता है। रीतिकाल का दूसरा नाम शृंगार काल याद रखिए, और नाम का आधार — लक्षण ग्रंथ यानी रीति।

60 सेकंड का रिवीजन

  • रीतिकाल में शृंगार रस और लक्षण ग्रंथों की प्रधानता रही।
  • इसे शृंगार काल और उत्तर मध्यकाल भी कहा जाता है।
  • तीन उपधाराएँ — रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त।
  • बिहारी अकेले रीतिसिद्ध कवि हैं; उनकी रचना बिहारी सतसई है।
  • घनानंद, बोधा, आलम और ठाकुर रीतिमुक्त कवि हैं।
  • भूषण ने शृंगार नहीं, वीर रस लिखा — शिवराज भूषण और शिवा बावनी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहारी को रीतिसिद्ध कवि क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उन्होंने काव्य के नियम बताने वाला कोई लक्षण ग्रंथ नहीं लिखा, फिर भी उनकी बिहारी सतसई रीति की दृष्टि से पूर्ण सिद्ध मानी जाती है। वे इस उपधारा के लगभग अकेले प्रतिनिधि हैं, इसीलिए यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।

रीतिमुक्त कवि किन्हें कहते हैं?

उन कवियों को जिन्होंने रीति के बंधन और लक्षण ग्रंथों की परंपरा से मुक्त होकर स्वच्छंद प्रेम काव्य लिखा। घनानंद, बोधा, आलम और ठाकुर इसके प्रमुख नाम हैं। इनका प्रेम दरबारी शृंगार नहीं, बल्कि गहरी वैयक्तिक अनुभूति है।

रीतिकाल का दूसरा नाम क्या है?

शृंगार काल, क्योंकि इस काल की प्रधान प्रवृत्ति शृंगार रस थी। आचार्य शुक्ल के विभाजन में इसे उत्तर मध्यकाल भी कहा गया है। रीतिकाल नाम इसलिए पड़ा कि कवियों ने काव्य की रीति यानी नियम बताने वाले ग्रंथ लिखे।

भूषण रीतिकाल में अलग क्यों माने जाते हैं?

क्योंकि पूरे काल में शृंगार की प्रधानता थी, पर उन्होंने वीर रस में लिखा और शिवाजी तथा छत्रसाल की वीरता का वर्णन किया। शिवराज भूषण और शिवा बावनी उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। यह अपवाद होना ही उन्हें परीक्षा का लोकप्रिय प्रश्न बनाता है।

Checking your account…

It takes a minute with your WhatsApp number. Reading is free.

Done with this topic?

Lock it in with a quick Practice Set, then move on.

रीतिकाल की प्रवृत्तियाँ एवं कवि | BPSC TRE 4.0 नोट्स — ExamAtlas